आयात शुल्क छूट के बाद कपास और यार्न कीमतों में गिरावट
By yash chouhan 2026-06-03 15:09:30
सरकार के फैसले से कपास सस्ता, दामों में 3% की गिरावट दर्ज
भारत सरकार द्वारा कपास पर लगने वाली 11% इम्पोर्ट ड्यूटी को अक्टूबर तक निलंबित करने के फैसले का असर बाजार में तुरंत दिखाई देने लगा है। इस घोषणा के बाद कपास और धागे (यार्न) की कीमतों में करीब 3% की गिरावट दर्ज की गई है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कीमतों में 1-2% और कमी आ सकती है।
पिछले तीन महीनों में कपास की कीमतों में लगभग 27% की वृद्धि हुई थी। 29 मिमी कपास का भाव फरवरी में ₹54,200 प्रति कैंडी से बढ़कर मई के मध्य तक ₹69,200 प्रति कैंडी पहुंच गया था। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में नरमी के चलते कीमतें पहले ही कुछ घटकर ₹65,000 प्रति कैंडी के आसपास आ गई थीं। सोमवार को कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने कपास की कीमत ₹700 प्रति कैंडी घटाकर ₹64,300 कर दी, जबकि धागे की कीमतों में ₹10 प्रति किलोग्राम की कटौती की गई।
सदर्न इंडिया मिल्स एसोसिएशन (SIMA) के महासचिव के. सेल्वराजु ने कहा कि कपास की कीमतें अब नरम पड़ रही हैं और स्पिनिंग मिलों को धागे के दाम घटाने की सलाह दी गई है। उद्योग का मानना है कि आयात शुल्क हटने से बाजार में उपलब्धता बढ़ेगी और जमाखोरी पर रोक लगेगी।
टेक्सटाइल उद्योग लंबे समय से इस ड्यूटी को हटाने की मांग कर रहा था। उद्योग संगठनों का कहना है कि भारतीय निर्यातक बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहे थे, क्योंकि वहां आयातित कपास पर शुल्क नहीं लगता। बढ़ती कच्चे माल की लागत ने भारतीय धागे और कपड़ा निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता को भी प्रभावित किया है।
हालांकि इस फैसले ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए ₹5,659 करोड़ के कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन की घोषणा की है। फिर भी उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि आयात शुल्क हटाने की अवधि सीमित है और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में 7% की बढ़ोतरी किसानों को संभावित मूल्य दबाव से सुरक्षा प्रदान करेगी।