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गुजरात: रणपुर मंडी में एक दिन में 5,000 मन से अधिक कपास की आवक, भाव ₹1,901 तक पहुंचे

गुजरात: रणपुर यार्ड में एक दिन में 5,000 मन से अधिक कपास की आवक, भाव ₹1,901 प्रति मन तक पहुंचेबोटाद: गुजरात के बोटाद जिले के रणपुर मार्केटिंग यार्ड में चालू कपास सीजन के दौरान आवक में तेजी देखने को मिल रही है। कल एक ही दिन में 5,000 मन से अधिक कपास यार्ड में पहुंची। नीलामी के दौरान कपास के भाव ₹1,840 से ₹1,901 प्रति मन तक रहे। गुणवत्ता के आधार पर खरीदारी होने से किसानों को अच्छे भाव मिले।रणपुर तालुका कृषि प्रधान क्षेत्र है, जहां अधिकांश किसान कपास की खेती करते हैं। कपास सीजन के दौरान आसपास के गांवों से बड़ी मात्रा में उपज बिक्री के लिए रणपुर मार्केटिंग यार्ड पहुंचती है। इस सीजन में भी यार्ड में कपास की आवक बढ़ने से व्यापारिक गतिविधियों में तेजी देखने को मिल रही है।नीलामी के दौरान व्यापारियों ने कपास की गुणवत्ता के आधार पर खरीदारी की। अच्छी गुणवत्ता वाली कपास को बेहतर भाव मिलने से किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य प्राप्त हुआ। कपास की बढ़ती आवक के बीच किसानों को बाजार में अच्छे भाव मिलने की उम्मीद बनी हुई है।रणपुर मार्केटिंग यार्ड के चेयरमैन किशोरभाई धंधल ने बताया कि मौजूदा सीजन में बड़ी संख्या में किसान अपनी कपास बेचने के लिए यार्ड पहुंच रहे हैं। किसानों की सुविधा और बिक्री प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने के लिए यार्ड में आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी न हो और उन्हें उचित मूल्य मिल सके।उन्होंने बताया कि कल एक ही दिन में यार्ड में 5,000 मन से अधिक कपास पहुंची। आने वाले दिनों में कपास की आवक और बढ़ने की संभावना है। सीजन के आगे बढ़ने के साथ रणपुर मार्केटिंग यार्ड में कपास की खरीद-बिक्री में तेजी बने रहने की उम्मीद है। और पढ़ें:-  CAI का पहला अनुमान जारी: 2026-27 में कपास उत्पादन 45.69 लाख गांठ घटने की संभावना

CAI का पहला अनुमान जारी: 2026-27 में कपास उत्पादन 45.69 लाख गांठ घटने की संभावना

CAI का पहला अनुमान जारी! नए सीजन में कपास उत्पादन 45.69 लाख गांठ घटने की संभावनापिछले सीजन के मुकाबले उत्पादन में 45.69 लाख गांठ की कमी का अनुमान, महाराष्ट्र में सबसे बड़ी गिरावट संभव।कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) ने 2 नवंबर 2026 को कपास सीजन 2026-27 के लिए अपना पहला उत्पादन अनुमान जारी किया है। CAI के अनुसार, इस सीजन में भारत का कपास उत्पादन 280 लाख गांठ (170 किलोग्राम प्रति गांठ) रहने का अनुमान है, जबकि पिछले सीजन में 325.69 लाख गांठ उत्पादन हुआ था। इस प्रकार, सालाना आधार पर उत्पादन में 45.69 लाख गांठ की कमी का अनुमान है। CAI ने अपने अनुमान में ±3% का अंतर संभव बताया है।राज्यवार उत्पादन अनुमानमध्य क्षेत्र में 176 लाख गांठ उत्पादन का अनुमान है, जिसमें महाराष्ट्र 91 लाख, गुजरात 66 लाख और मध्य प्रदेश 19 लाख गांठ शामिल हैं।दक्षिण क्षेत्र में 71 लाख गांठ उत्पादन का अनुमान है। इसमें तेलंगाना 34 लाख, कर्नाटक 20 लाख, आंध्र प्रदेश 12 लाख और तमिलनाडु 5 लाख गांठ शामिल हैं।उत्तर क्षेत्र में 28 लाख गांठ उत्पादन का अनुमान है, जिसमें अपर राजस्थान 11.25 लाख, हरियाणा 8 लाख, लोअर राजस्थान 7.50 लाख और पंजाब 1.25 लाख गांठ शामिल हैं। इसके अलावा, ओडिशा में 3 लाख और अन्य राज्यों में 2 लाख गांठ उत्पादन का अनुमान है।प्रमुख राज्यों में सालाना बदलावपिछले सीजन की तुलना में महाराष्ट्र में 22.35 लाख गांठ, तेलंगाना में 8.10 लाख, आंध्र प्रदेश में 7.80 लाख, कर्नाटक में 6.94 लाख और गुजरात में 2.50 लाख गांठ उत्पादन कम रहने का अनुमान है। वहीं, हरियाणा और मध्य प्रदेश में 1.50-1.50 लाख गांठ की बढ़ोतरी का अनुमान है।भारतीय कपास बैलेंस शीटCAI के अनुसार, सीजन की शुरुआत में ओपनिंग स्टॉक 72.88 लाख गांठ रहने का अनुमान है। इसके साथ 280 लाख गांठ उत्पादन और 65 लाख गांठ आयात मिलाकर कुल कपास उपलब्धता 417.88 लाख गांठ रहने की संभावना है।कुल घरेलू खपत 365 लाख गांठ रहने का अनुमान है, जिसमें नॉन-MSME 248 लाख, MSME 101 लाख और नॉन-टेक्सटाइल सेक्टर 16 लाख गांठ शामिल हैं। इसके अलावा, 12 लाख गांठ निर्यात का अनुमान है। इस प्रकार, कुल घरेलू खपत और निर्यात 377 लाख गांठ रहने की संभावना है।इन अनुमानों के आधार पर 30 सितंबर 2027 को सीजन के अंत में क्लोजिंग स्टॉक 40.88 लाख गांठ रहने का अनुमान है।पिछले सीजन से बैलेंस शीट में बदलाव2025-26 की तुलना में इस सीजन में कुल उपलब्धता 35 लाख गांठ कम रहने का अनुमान है। कपास प्रेसिंग 325.69 लाख से घटकर 280 लाख गांठ और आयात 71.60 लाख से घटकर 65 लाख गांठ रहने की संभावना है। घरेलू खपत 365 लाख गांठ पर स्थिर रखी गई है, जबकि निर्यात अनुमान 15 लाख से घटाकर 12 लाख गांठ किया गया है। क्लोजिंग स्टॉक भी 72.88 लाख से घटकर 40.88 लाख गांठ रहने का अनुमान है।*नोट: CAI के सभी उत्पादन और बैलेंस शीट अनुमान ±3% के अंतर के अधीन हैं।और पढ़ें:-  डॉलर के मुकाबले रुपया 24 पैसे मजबूत होकर 94.66 पर खुला

कपास आयात नीति से किसानों की चिंता बढ़ी

महाराष्ट्र: कपास आयात नीति से किसानों की चिंता बढ़ी, कीमतों पर दबाव की आशंकाड्यूटी-मुक्त आयात की अवधि 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ी; उत्पादन में गिरावट और बढ़ती लागत के बीच किसानों को बेहतर भाव मिलने की उम्मीद प्रभावितमहाराष्ट्र सहित देश के प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल को नुकसान पहुंचा है। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने कपास के ड्यूटी-मुक्त आयात की अवधि 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दी है। इस फैसले से किसानों की चिंता बढ़ गई है। उनका मानना है कि घरेलू उत्पादन में गिरावट के बावजूद आयात जारी रहने से कपास की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में इस साल कपास उत्पादन प्रभावित हुआ है। उद्योग के अनुमानों के अनुसार, 2025-26 में घरेलू उत्पादन लगभग 280 लाख गांठ रहने की उम्मीद है, जबकि खपत करीब 360 लाख गांठ रहने का अनुमान है। इसी अवधि में लगभग 72 लाख गांठ कपास आयात होने की संभावना है। ये उद्योग के अनुमान हैं और वास्तविक आंकड़े अलग हो सकते हैं।उत्पादन में गिरावट के कारण किसानों को बेहतर कीमतों की उम्मीद थी। कुछ बाजारों में कपास के भाव ₹10,000 प्रति क्विंटल तक पहुंच चुके थे। हालांकि, ड्यूटी-मुक्त आयात की अवधि बढ़ने से घरेलू बाजार में कीमतों की तेजी सीमित रहने की आशंका है। कम पैदावार और बढ़ती उत्पादन लागत से किसानों का मुनाफा प्रभावित हो सकता है।भारत में कपास की औसत उत्पादकता लगभग 430-440 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है, जबकि वैश्विक औसत करीब 815 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बताया जाता है। उत्पादकता बढ़ाने के लिए बेहतर बीज, कृषि अनुसंधान और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल तकनीक अपनाने की जरूरत है।उद्योग सूत्रों के अनुसार, दिसंबर तक कपास आयात लगभग 25 लाख गांठ तक सीमित रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय कीमतें, आयात लागत और रुपये की कमजोरी इसके प्रमुख कारण हैं। हालांकि, आयात अवधि आगे बढ़ने पर घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।किसानों की मांग है कि ड्यूटी-मुक्त आयात को आगे न बढ़ाया जाए और घरेलू कपास उत्पादन को प्रोत्साहन देने वाली नीतियां अपनाई जाएं। सरकार को उद्योग की जरूरतों के साथ-साथ कपास उत्पादकों के हितों को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।और पढ़ें :- जम्मीकुंटा में कपास भाव ₹8,840 तक पहुंचे

जम्मीकुंटा में कपास भाव ₹8,840 तक पहुंचे

तेलंगाना: जम्मीकुंटा कपास मंडी में किसानों की भारी आवक, ₹8,840 प्रति क्विंटल तक पहुंचे भावजम्मीकुंटा: करीमनगर जिले की जम्मीकुंटा कृषि कपास मंडी में चार दिन की छुट्टी के बाद सोमवार को किसानों की भारी आवक देखने को मिली। 300 से अधिक वाहनों में कपास लेकर किसान मंडी पहुंचे। बाजार में कपास का भाव ₹8,840 प्रति क्विंटल तक पहुंच गया, जबकि निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹8,667 प्रति क्विंटल था।कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने भी कपास खरीदने का निर्णय लिया था, लेकिन कई किसान एजेंसी को अपना कपास बेचने से हिचकिचा रहे थे। किसानों ने बताया कि त्योहारों के खर्चों को पूरा करने के लिए उन्हें तत्काल नकदी की जरूरत थी। इसी वजह से वे खुले बाजार में कपास बेचने को प्राथमिकता दे रहे थे।अध्यक्ष ने स्वयं खरीद प्रक्रिया की निगरानी की और खरीदारों को किसानों को उचित भाव देने के निर्देश दिए। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि कपास की तुड़ाई के तुरंत बाद उसे मंडी में न लाएं। बिक्री से पहले यह सुनिश्चित करें कि कपास अच्छी तरह सूख चुका हो और उसमें नमी निर्धारित मानकों के अनुरूप हो।उन्होंने बताया कि अच्छी तरह सूखे और निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरने वाले कपास की CCI बिना किसी कटौती या अतिरिक्त शुल्क के खरीद करेगी। इससे किसानों को खरीद प्रक्रिया के दौरान अनावश्यक परेशानियों से बचने में मदद मिलेगी।और पढ़ें :- अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 01 पैसे गिरकर 94.90 पर बंद हुआ।

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 01 पैसे गिरकर 94.90 पर बंद हुआ।

सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 01 पैसे कमजोर होकर ₹94.90 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।घरेलू मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ₹94.89 पर खुली और पूरे ट्रेडिंग सेशन के दौरान इसमें उतार-चढ़ाव देखने को मिला। अंत में यह ₹94.90 पर बंद हुई, जो इसके शुरुआती स्तर से 01 पैसे कम है।मार्केट बंद होने पर, सेंसेक्स 1,233.25 अंक या 1.66 प्रतिशत की तेजी के साथ 75,692.78 पर, और निफ्टी 387.70 अंक या 1.68 प्रतिशत की तेजी के साथ 23,440.80 पर बंद हुआ। लगभग 2668 शेयरों में तेजी आई, 1469 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, और 162 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।और पढ़ें :- कपास ड्यूटी छूट से स्पिनिंग मिलों को राहत

कपास ड्यूटी छूट से स्पिनिंग मिलों को राहत

कपास आयात शुल्क में छूट से स्पिनिंग मिलों को राहत, मुनाफे के मार्जिन में सुधार की उम्मीदभारतीय सूती कपड़ा उद्योग, खासकर धागा बनाने वाली स्पिनिंग मिलों को बड़ी राहत मिली है। केंद्र सरकार ने कच्चे कपास के आयात पर 11% सीमा शुल्क की छूट 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दी है। इससे मिलों को कच्चे माल की लागत नियंत्रित करने और मुनाफे के मार्जिन को बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपास उत्पादक है, लेकिन चालू सीजन में घरेलू उत्पादन का अनुमान उत्साहजनक नहीं है। साउदर्न इंडिया मिल्स एसोसिएशन (SIMA) के अनुसार, कपास सीजन 2026-27 में उत्पादन लगभग 280 लाख गांठ रहने का अनुमान है। सामान्य तौर पर उत्पादन 300 लाख गांठ से अधिक रहता है, जबकि उद्योग की जरूरत करीब 360 लाख गांठ है। कमजोर उत्पादन अनुमान के बीच कपास की कीमतें पिछले एक साल की तुलना में लगभग 33% तक बढ़ गई हैं।बढ़ती लागत से निर्यात प्रतिस्पर्धा पर दबावकपास की ऊंची कीमतों से भारतीय धागे, कपड़े और परिधान की अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होने की चिंता है। यह चुनौती ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत ब्रिटेन और अमेरिका सहित नए बाजारों में व्यापार के अवसर बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। कपड़ा मंत्रालय का लक्ष्य 2030 तक कपड़ा क्षेत्र के कारोबार को मौजूदा लगभग 172 अरब डॉलर से बढ़ाकर 350 अरब डॉलर करना और निवेश के जरिए उत्पादन क्षमता का विस्तार करना है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में निर्यात में अपेक्षित तेजी नहीं आई है।स्पिनिंग मिलों के मार्जिन में सुधार की संभावनाकपास आयात पर पहले दी गई शुल्क छूट से स्पिनिंग मिलों और कपड़ा निर्माताओं को लाभ हुआ है। बाजार अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही (Q2FY2027) में सूचीबद्ध कंपनियां राजस्व वृद्धि के साथ EBITDA मार्जिन में भी सुधार दर्ज कर सकती हैं। EBITDA का अर्थ ब्याज, कर, मूल्यह्रास और अमोर्टाइजेशन से पहले की कमाई है।KPR मिल्स, वर्धमान टेक्सटाइल्स, अंबिका कॉटन और इंडो काउंट जैसी कंपनियों ने तिमाही-दर-तिमाही आधार पर मार्जिन में 200–300 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी दर्ज की है। त्योहारी मांग और निर्यात ऑर्डर बढ़ने से मिलों की क्षमता का बेहतर उपयोग होने की उम्मीद है। हालांकि, घरेलू कपास की कमी और कीमतों में संभावित बढ़ोतरी इस लाभ को सीमित कर सकती है।शून्य आयात शुल्क से कच्चे माल की उपलब्धता को मददशुल्क छूट से मिलों को घरेलू और आयातित कपास की कीमतों की तुलना कर खरीद संबंधी निर्णय लेने का अवसर मिलेगा। SIMA के अनुसार, धागा बनाने की लागत में कपास का हिस्सा लगभग 70%, कपड़ा बनाने में 50% और तैयार परिधान में 30–35% होता है। इसलिए प्रतिस्पर्धी कीमतों पर अच्छी गुणवत्ता वाला कपास पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होना जरूरी है।कपास की कीमतों में अनिश्चितता के कारण स्पिनिंग मिलों के शेयरों में तेजी प्रभावित हुई है। आगे कंपनियों की लाभप्रदता घरेलू और वैश्विक मांग, कपास की उपलब्धता तथा कच्चे माल की लागत पर निर्भर करेगी।और पढ़ें :- CCI की कपास बिक्री 99.33 लाख गांठ पहुंची

घोडेगांव में कपास का भाव ₹9,000 पहुंचा

महाराष्ट्र के घोडेगांव में कपास का खरीद भाव ₹9,000 प्रति क्विंटल तक, कम पैदावार से किसान परेशानघोडेगांव (महाराष्ट्र): महाराष्ट्र के नेवासा तालुका के घोडेगांव में कपास की खरीद तेज हो गई है। यहां किसानों से कपास की खरीद ₹9,000 प्रति क्विंटल तक के भाव पर की जा रही है। दिवाली नजदीक आने के कारण किसान अपनी उपज बेचने के लिए बाजार पहुंच रहे हैं। हालांकि, बेहतर खरीद भाव मिलने के बावजूद कम पैदावार और खेती की बढ़ती लागत ने किसानों की आर्थिक चिंताएं बढ़ा दी हैं।इस साल अनियमित बारिश और अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण कपास की फसल प्रभावित हुई है। किसानों ने खेत की तैयारी, बुआई, बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी और सिंचाई पर काफी खर्च किया। इसके बावजूद उन्हें उम्मीद के मुताबिक उत्पादन नहीं मिल पाया। कम पैदावार के कारण कपास की बिक्री से होने वाली कुल आमदनी घटने की आशंका है। ऐसे में खेती पर किया गया खर्च निकालना भी किसानों के लिए चुनौती बन गया है।₹9,000 तक का भाव मिलने के बावजूद आर्थिक परेशानीघोडेगांव में कपास का खरीद भाव ₹9,000 प्रति क्विंटल तक पहुंचने से किसानों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन कम उत्पादन के कारण यह भाव उनकी सभी आर्थिक समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रहा है। दिवाली के दौरान परिवार के लिए कपड़े खरीदने, राशन और त्योहार की अन्य जरूरतें पूरी करने के साथ किसानों को खेती के लिए लिया गया कर्ज भी चुकाना है।गुजरात भेजा जा रहा घोडेगांव का कपासघोडेगांव और आसपास के क्षेत्रों से खरीदा गया कपास गुजरात भेजा जाता है। इस क्षेत्र से बड़ी मात्रा में कपास गुजरात पहुंचाया जा रहा है। हालांकि, इस साल पिछले वर्ष की तुलना में स्थानीय स्तर पर कपास का कुल उत्पादन काफी कम बताया जा रहा है।किसानों ने सरकार से मांगी आर्थिक सहायताकिसानों ने सरकार से फसल नुकसान और उत्पादन में आई कमी का उचित आकलन करने तथा पात्र किसानों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि कम पैदावार और बढ़ती खेती की लागत के बीच केवल बेहतर बाजार भाव पर्याप्त राहत नहीं दे सकता। उन्हें आर्थिक संकट से उबरने के लिए सरकारी सहायता की भी जरूरत है।और पढ़ें :- कपास आयात पर कस्टम ड्यूटी छूट 31 दिसंबर तक बढ़ी

कपास आयात पर कस्टम ड्यूटी छूट 31 दिसंबर तक बढ़ी

केंद्र ने कपास आयात पर कस्टम ड्यूटी छूट 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ाईनई दिल्ली: केंद्र सरकार ने घरेलू कपड़ा और परिधान उद्योग को राहत देते हुए कपास आयात पर सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) से मिलने वाली छूट की अवधि दो महीने बढ़ा दी है। अब यह छूट 31 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगी। इससे पहले इसकी समय-सीमा 31 अक्टूबर 2026 निर्धारित थी। वित्त मंत्रालय ने 30 अक्टूबर को जारी अधिसूचना संख्या 35/2026-कस्टम्स के माध्यम से इस विस्तार की जानकारी दी।सरकार के इस फैसले का उद्देश्य कपड़ा और परिधान उद्योग के लिए कच्चे माल की उपलब्धता बनाए रखना और निर्माताओं की उत्पादन लागत कम करने में मदद करना है। इस कदम से कपास पर निर्भर कपड़ा मिलों, परिधान निर्माताओं और विशेष रूप से छोटे एवं मध्यम उद्यमों को राहत मिलने की उम्मीद है।कपास आयात पर छूट की अवधि बढ़ाईवित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के माध्यम से यह संशोधन जारी किया है। इसके तहत 30 मई 2026 को जारी अधिसूचना संख्या 19/2026-कस्टम्स में बदलाव किया गया है। पुरानी अधिसूचना में निर्धारित 31 अक्टूबर 2026 की तारीख को संशोधित कर 31 दिसंबर 2026 कर दिया गया है।यह संशोधन सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 25(1) और वित्त अधिनियम, 2021 की धारा 124 के तहत किया गया है। सरकार ने अधिसूचना में कहा है कि जनहित में इस अवधि का विस्तार आवश्यक माना गया है।कपड़ा और परिधान उद्योग को मिलेगी राहतसीमा शुल्क छूट जारी रहने से घरेलू कपड़ा और परिधान निर्माताओं को आयातित कपास की खरीद में राहत मिलने की उम्मीद है। इससे उद्योग को कच्चे माल की उपलब्धता बनाए रखने और उत्पादन लागत नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्यमों को इस फैसले से लाभ होने की संभावना है, क्योंकि उनकी उत्पादन गतिविधियां कच्चे माल की कीमतों और उपलब्धता पर निर्भर करती हैं। इसके अलावा, कपड़ा और परिधान क्षेत्र की पूरी मूल्य श्रृंखला को भी इस विस्तार से फायदा मिल सकता है।घरेलू कपास बाजार पर भी पड़ सकता है असरकपास आयात पर शुल्क छूट की अवधि बढ़ने से घरेलू बाजार में आयातित कपास की उपलब्धता बनी रहने की संभावना है। इससे कपड़ा उद्योग की कच्चे माल की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इसका घरेलू कपास की मांग और कीमतों पर क्या असर पड़ेगा, यह आयात की वास्तविक मात्रा, बाजार की मांग और घरेलू आपूर्ति पर निर्भर करेगा।सरकार के इस कदम का उद्देश्य कपड़ा उद्योग की कच्चे माल संबंधी जरूरतों और घरेलू कपास किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखना है। इस विस्तार के बाद कपड़ा उद्योग को 31 दिसंबर 2026 तक कपास आयात पर सीमा शुल्क छूट का लाभ मिलता रहेगा।और पढ़ें :- CCI की कपास नीलामी बिक्री घटकर 4,000 गांठ

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