पाचोरा में 43°C गर्मी के बीच 60% कपास बुवाई पूरी
43°C की भीषण गर्मी में पचोरा के 60% क्षेत्र में पूरी हुई कपास की बुवाईजलगांव जिले का पचोरा तालुका कपास उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से किसानों को लाल रोग, बॉलवर्म, अनियमित वर्षा और फसल के कम दाम जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस वर्ष भी मौसम विभाग और कृषि विशेषज्ञों ने ‘अल नीनो’ के प्रभाव के कारण कम बारिश की आशंका जताई है। इसके बावजूद किसानों ने जोखिम उठाते हुए समय से पहले कपास की बुवाई शुरू कर दी है।कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी थी कि वे 15 जून के बाद ही कपास की बुवाई करें, क्योंकि क्षेत्र में अत्यधिक गर्मी और शुष्क हवाओं का प्रभाव बना हुआ है। वर्तमान में वातावरण का तापमान लगभग 40°C है, जबकि मिट्टी का तापमान 43°C से अधिक दर्ज किया जा रहा है। ऐसी परिस्थितियों में बीजों के अंकुरण पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है और पौधों में बाद में लाल रोग जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।इसके बावजूद पचोरा तालुका के लगभग 60 प्रतिशत किसानों ने प्री-सीजन बुवाई पूरी कर ली है। किसानों का मानना है कि बुवाई में देरी होने से उत्पादन और आय प्रभावित हो सकती है, इसलिए उन्होंने उपलब्ध सिंचाई सुविधाओं के आधार पर खेती शुरू कर दी है। जिन किसानों के कुओं में पानी उपलब्ध है, उन्होंने 20 मई से ही खेतों में बीज डालना शुरू कर दिया था।पचोरा तालुका का कुल भौगोलिक क्षेत्र 82,507 हेक्टेयर है, जिसमें से 58,202 हेक्टेयर खेती योग्य भूमि है। इस वर्ष लगभग 42,950 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती की योजना बनाई गई है।वहीं, लगातार नुकसान के कारण किसानों का रुझान मक्का की खेती की ओर भी बढ़ रहा है। पिछले वर्ष 9,822 हेक्टेयर क्षेत्र में मक्का बोया गया था, जो इस वर्ष बढ़कर 11,220 हेक्टेयर हो गया है। अब किसानों की नजर मानसून पर टिकी है, क्योंकि समय पर और पर्याप्त बारिश ही उनकी इस जोखिम भरी खेती की सफलता तय करेगी।और पढ़ें :- हरियाणा में कपास रकबा घटा, किसान सभा ने सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल