Filter

Recent News

बांग्लादेश की मांग से भिलवाड़ा के सूती धागा निर्यात में तेज़ी

भीलवाड़ा ने बांग्लादेश को सूत निर्यात बढ़ाकर वैश्विक चुनौतियों का किया सफल मुकाबलाराजस्थान का प्रमुख वस्त्र केंद्र भीलवाड़ा वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और मध्य पूर्व में जारी तनाव के बावजूद निरंतर विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। बांग्लादेश को सूती सूत और धागे के निर्यात में हुई उल्लेखनीय वृद्धि ने स्थानीय कपड़ा उद्योग को नई मजबूती प्रदान की है। उद्योग जगत के अनुसार, इस बढ़ती मांग के कारण जिले में 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का नया निवेश हुआ है, जिससे आने वाले समय में रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होने की उम्मीद है।वैश्विक स्तर पर युद्ध, बढ़ती परिवहन लागत और अमेरिकी टैरिफ नीतियों के कारण कई उद्योग प्रभावित हुए हैं, लेकिन भीलवाड़ा का कपड़ा क्षेत्र अपेक्षाकृत मजबूत बना हुआ है। यहां की कताई और डेनिम इकाइयों ने आधुनिक तकनीक, स्वचालन और नवाचार को अपनाकर उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता दोनों में सुधार किया है। परिणामस्वरूप, भीलवाड़ा में निर्मित सूती धागे की मांग अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लगातार बढ़ रही है।उद्योग सूत्रों के अनुसार, जिले में सूती धागे का उत्पादन प्रतिवर्ष 15 से 17 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है, जबकि डेनिम उत्पादन में 10 से 12 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की जा रही है। बांग्लादेश का रेडीमेड गारमेंट उद्योग बड़ी मात्रा में भीलवाड़ा के सूती धागे पर निर्भर हो गया है। इसके अलावा, यहां निर्मित धागे की मांग मिस्र, चीन, पुर्तगाल, श्रीलंका और मोरक्को में भी है। वहीं, डेनिम कपड़ा कई लैटिन अमेरिकी देशों के बाजारों तक पहुंच रहा है।केंद्र सरकार द्वारा आयातित कपास पर 11 प्रतिशत शुल्क हटाने के फैसले को भी उद्योग के लिए सकारात्मक माना जा रहा है। इससे कच्चे माल की लागत कम होगी और उत्पादकों को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उत्पादन करने में मदद मिलेगी।मेवाड़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के मानद महासचिव आर. के. जैन के अनुसार, भीलवाड़ा जिले में 500 से अधिक बुनाई इकाइयां, 18 कताई इकाइयां, पांच डेनिम संयंत्र और 21 प्रोसेसिंग इकाइयां कार्यरत हैं। ये इकाइयां प्रतिवर्ष लगभग 120 करोड़ मीटर कपड़ा उत्पादन करती हैं और करीब 1.5 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराती हैं। बढ़ते निर्यात और नए निवेश के कारण उद्योग में विस्तार की संभावनाएं लगातार मजबूत हो रही हैं।और पढ़ें :- खरीफ 2026 में पंजाब में कपास की बुवाई रिकॉर्ड निचले स्तर पर

खरीफ 2026 में पंजाब में कपास की बुवाई रिकॉर्ड निचले स्तर पर

पंजाब में कपास की बुवाई रिकॉर्ड निचले स्तर परपंजाब में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और धान जैसी अधिक पानी खपत वाली फसलों पर निर्भरता कम करने के सरकार के प्रयासों को झटका लगा है। 2026-27 के खरीफ सीजन में कपास की बुवाई रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है। राज्य सरकार ने 1.25 लाख हेक्टेयर में कपास की खेती का लक्ष्य रखा था, लेकिन 2 जून तक केवल 70,000 हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुवाई हो सकी है, जो निर्धारित लक्ष्य का महज 56 प्रतिशत है।कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, फाजिल्का जिले में सबसे अधिक 40,000 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती हुई है। इसके बाद बठिंडा, मानसा और श्री मुक्तसर साहिब जिलों में लगभग 10,000-10,000 हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई दर्ज की गई है। अधिकारियों का कहना है कि अंतिम आंकड़े 15 जून के बाद सामने आएंगे, लेकिन रकबे में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम है क्योंकि किसान कपास की खेती से दूरी बना रहे हैं।कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले कई वर्षों से खराब मौसम, सफेद मक्खी और गुलाबी सुंडी जैसे कीटों के हमलों तथा आर्थिक नुकसान ने किसानों का भरोसा कमजोर कर दिया है। वर्ष 2025 में कीटों का बड़ा प्रकोप नहीं हुआ था, लेकिन अक्टूबर में कपास तुड़ाई के दौरान हुई बेमौसम बारिश ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया। इससे उत्पादन और किसानों की आय दोनों प्रभावित हुईं।पंजाब कृषि विभाग के उप निदेशक (कपास) चरणजीत सिंह ने कहा कि कपास का रकबा घटने से अधिक किसान धान की खेती की ओर रुख करेंगे, जिससे भूजल संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। उन्होंने बताया कि सरकार धान का क्षेत्र कम करने और वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर कीट-प्रतिरोधी और उच्च उत्पादकता वाली नई हाइब्रिड कपास किस्में भविष्य में किसानों का विश्वास वापस जीत सकती हैं। हालांकि, नकली बीजों की समस्या, बाजार में एमएसपी से कम कीमतें और लगातार फसल जोखिम अभी भी किसानों की सबसे बड़ी चिंताएं बनी हुई हैं।और पढ़ें :- रुपया डॉलर के मुकाबले 95.71 पर स्थिर खुला

भारत पर नए अमेरिकी टैरिफ का खतरा, दिल्ली में जारी व्यापार वार्ता

भारत सहित 60 देशों पर नए अमेरिकी टैरिफ़ की तैयारी, व्यापार वार्ता के बीच दिल्ली में अमेरिकी टीम सक्रियअमेरिका कम से कम 60 व्यापारिक साझेदार देशों पर नए आयात शुल्क (टैरिफ़) लगाने की तैयारी कर रहा है, जिनमें भारत भी शामिल है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन उन देशों के खिलाफ कार्रवाई पर विचार कर रहा है, जिन पर जबरन मज़दूरी (forced labour) से जुड़े उत्पादों के आयात को रोकने में विफल रहने का आरोप है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित टैरिफ़ 10 प्रतिशत से 12.5 प्रतिशत के बीच हो सकते हैं। कनाडा, मेक्सिको, ताइवान और यूनाइटेड किंगडम पर 10 प्रतिशत जबकि भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्राज़ील और स्विट्ज़रलैंड जैसे देशों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव है।ये शुल्क तुरंत लागू नहीं होंगे। पहले इन पर सार्वजनिक राय ली जाएगी और समीक्षा प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद ही अंतिम निर्णय होगा। यदि यह लागू होते हैं, तो यह कदम ट्रंप प्रशासन को उन कानूनी सीमाओं से आगे निकलने में मदद कर सकता है, जो हाल के सुप्रीम कोर्ट फैसलों के बाद टैरिफ़ नीतियों पर लगाई गई थीं।यह पूरी प्रक्रिया अमेरिकी ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत शुरू की गई जांच का हिस्सा है। इस जांच में यह आकलन किया गया कि क्या व्यापारिक साझेदार देशों ने जबरन मज़दूरी से बने उत्पादों के आयात पर पर्याप्त रोक लगाई है या नहीं। USTR के अनुसार, 54 अर्थव्यवस्थाएं इस दिशा में प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रही हैं, जिनमें भारत सहित कई प्रमुख देश शामिल हैं।USTR अधिकारियों ने कहा है कि यह स्थिति अमेरिकी श्रमिकों के लिए वैश्विक व्यापार में असमान प्रतिस्पर्धा पैदा करती है। हालांकि प्रस्तावित टैरिफ़ में कुछ छूट भी शामिल हैं, जैसे बीफ़, कॉफ़ी, कुछ फल और मेवे तथा USMCA नियमों के तहत आने वाले कनाडा-मेक्सिको के उत्पाद।इसी बीच, अमेरिकी व्यापार टीम मुख्य वार्ताकार ब्रेंडन लिंच के नेतृत्व में नई दिल्ली में भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर बातचीत कर रही है। भारतीय पक्ष का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन कर रहे हैं। दोनों देश बाज़ार पहुंच, टैरिफ़ कटौती, गैर-टैरिफ बाधाएं और आर्थिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं।फरवरी में हुए संयुक्त बयान के अनुसार, अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ़ घटाकर लगभग 18 प्रतिशत करने पर विचार कर रहा है। यदि यह समझौता आगे बढ़ता है तो यह भारत के निर्यातकों के लिए राहत का संकेत हो सकता है, जो पहले उच्च टैरिफ़ के दबाव का सामना कर रहे थे।और पढ़ें :- रुपया डॉलर के मुकाबले 26 पैसे गिरकर 95.71 पर बंद हुआ।

आयात शुल्क छूट के बाद कपास और यार्न कीमतों में गिरावट

सरकार के फैसले से कपास सस्ता, दामों में 3% की गिरावट दर्जभारत सरकार द्वारा कपास पर लगने वाली 11% इम्पोर्ट ड्यूटी को अक्टूबर तक निलंबित करने के फैसले का असर बाजार में तुरंत दिखाई देने लगा है। इस घोषणा के बाद कपास और धागे (यार्न) की कीमतों में करीब 3% की गिरावट दर्ज की गई है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कीमतों में 1-2% और कमी आ सकती है।पिछले तीन महीनों में कपास की कीमतों में लगभग 27% की वृद्धि हुई थी। 29 मिमी कपास का भाव फरवरी में ₹54,200 प्रति कैंडी से बढ़कर मई के मध्य तक ₹69,200 प्रति कैंडी पहुंच गया था। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में नरमी के चलते कीमतें पहले ही कुछ घटकर ₹65,000 प्रति कैंडी के आसपास आ गई थीं। सोमवार को कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने कपास की कीमत ₹700 प्रति कैंडी घटाकर ₹64,300 कर दी, जबकि धागे की कीमतों में ₹10 प्रति किलोग्राम की कटौती की गई।सदर्न इंडिया मिल्स एसोसिएशन (SIMA) के महासचिव के. सेल्वराजु ने कहा कि कपास की कीमतें अब नरम पड़ रही हैं और स्पिनिंग मिलों को धागे के दाम घटाने की सलाह दी गई है। उद्योग का मानना है कि आयात शुल्क हटने से बाजार में उपलब्धता बढ़ेगी और जमाखोरी पर रोक लगेगी।टेक्सटाइल उद्योग लंबे समय से इस ड्यूटी को हटाने की मांग कर रहा था। उद्योग संगठनों का कहना है कि भारतीय निर्यातक बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहे थे, क्योंकि वहां आयातित कपास पर शुल्क नहीं लगता। बढ़ती कच्चे माल की लागत ने भारतीय धागे और कपड़ा निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता को भी प्रभावित किया है।हालांकि इस फैसले ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब सरकार ने घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए ₹5,659 करोड़ के कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन की घोषणा की है। फिर भी उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि आयात शुल्क हटाने की अवधि सीमित है और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में 7% की बढ़ोतरी किसानों को संभावित मूल्य दबाव से सुरक्षा प्रदान करेगी।और पढ़ें :- मनवत APMC में 4.36 लाख क्विंटल कपास की रिकॉर्ड खरीद

मनवत APMC में 4.36 लाख क्विंटल कपास की रिकॉर्ड खरीद

महाराष्ट्र: मानवत APMC में कपास खरीद का रिकॉर्डपरभणी (महाराष्ट्र): परभणी जिले की मानवत कृषि उपज मंडी समिति (APMC) ने चालू कपास विपणन सीजन में खरीद का नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। उत्पादन में कमी के बावजूद मंडी में कपास की आवक और व्यापारिक गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। 13 नवंबर 2025 से 30 मई 2026 के बीच लगभग सात महीनों की अवधि में 4.36 लाख क्विंटल कपास की खरीद हुई, जो मानवत मंडी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।इस सीजन में जलवायु परिवर्तन, बेमौसम बारिश तथा कीट एवं रोगों के प्रकोप के कारण कई क्षेत्रों में कपास उत्पादन प्रभावित हुआ। इसके बावजूद मानवत मंडी में किसानों की बड़ी संख्या में आवक बनी रही। पारदर्शी नीलामी व्यवस्था, समय पर भुगतान और प्रतिस्पर्धी दरों के कारण किसानों का भरोसा मंडी पर लगातार मजबूत हुआ, जिससे व्यापारिक लेन-देन में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली।सीजन के दौरान कपास खरीद को लेकर Cotton Corporation of India (CCI) और निजी व्यापारियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा रही। CCI ने ₹7,500 से ₹8,000 प्रति क्विंटल की दर से 1,63,647 क्विंटल कपास खरीदी। हालांकि फरवरी के बाद CCI द्वारा खरीद प्रक्रिया रोकने के पश्चात निजी व्यापारियों ने बाजार में अपनी सक्रियता बढ़ा दी। निजी क्षेत्र ने 2.72 लाख क्विंटल से अधिक कपास की खरीद की, जिससे बाजार में मांग बनी रही और कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हुई।सीजन की शुरुआत में कपास का भाव लगभग ₹7,500 प्रति क्विंटल था, लेकिन मांग बढ़ने और बाजार परिस्थितियों के अनुकूल रहने से कीमतें धीरे-धीरे बढ़ती गईं। सीजन के अंतिम चरण में पहली बार कपास का भाव ₹10,000 प्रति क्विंटल के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गया। हालांकि अधिकांश किसान तब तक अपनी उपज बेच चुके थे, इसलिए केवल सीमित संख्या में उत्पादक ही इस बढ़ी हुई कीमत का लाभ उठा सके।मानवत मंडी की पारदर्शी सार्वजनिक नीलामी प्रणाली और त्वरित भुगतान व्यवस्था के कारण महाराष्ट्र के परभणी के अलावा बीड, जालना, नांदेड़ तथा अन्य पड़ोसी जिलों के किसान भी अपनी उपज यहां लेकर पहुंचे। इसके परिणामस्वरूप इस वर्ष कपास की रिकॉर्ड आवक दर्ज हुई। विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय उत्पादन, आयात-निर्यात नीतियां, वस्त्र उद्योग की मांग तथा डॉलर विनिमय दर जैसे वैश्विक कारक भी कपास की कीमतों को प्रभावित करते हैं।मंडी समिति के अध्यक्ष Pankaj Ambegaonkar ने कहा कि रिकॉर्ड खरीद और आवक किसानों के विश्वास का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि समिति ने हमेशा किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और पारदर्शी व्यवस्था के कारण ही मंडी को यह सफलता प्राप्त हुई है।और पढ़ें :- अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 18 पैसे गिरकर 95.45 पर खुला.

FY27 की शुरुआत में भारत के निर्यात में मजबूत बढ़त, FTA पर जोर

FY27 की शुरुआत में भारत के निर्यात में मजबूत वृद्धि, सरकार ने FTA विस्तार पर तेज की पहलवित्त वर्ष 2026-27 (FY27) की शुरुआत भारत के निर्यात क्षेत्र के लिए सकारात्मक रही है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, अप्रैल और मई 2026 के दौरान देश के निर्यात में दो अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है। वाणिज्य मंत्रालय 15 जून को मई महीने के व्यापार आंकड़े जारी करेगा, जिससे इस रुझान की विस्तृत पुष्टि होने की उम्मीद है।अप्रैल 2026 में भारत का निर्यात 13.78 प्रतिशत बढ़कर 43.56 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले चार वर्षों में किसी भी महीने का सबसे ऊंचा स्तर है। इस वृद्धि में पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में सुधार और कच्चे तेल की ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। हालांकि, इसी अवधि में आयात में तेज वृद्धि देखी गई, जिसके कारण व्यापार घाटा बढ़कर 28.38 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले तीन महीनों का उच्चतम स्तर है।सरकार निर्यात बढ़ाने और वैश्विक बाजारों में भारत की हिस्सेदारी मजबूत करने के लिए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) को एक महत्वपूर्ण रणनीति के रूप में आगे बढ़ा रही है। इसी दिशा में वाणिज्य मंत्रालय देशभर में FTA के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए लगभग 1,000 लोगों की भर्ती की योजना पर काम कर रहा है। इन पदों के लिए विभिन्न भारतीय भाषाओं में दक्ष उम्मीदवारों की आवश्यकता होगी, और भर्ती प्रक्रिया की औपचारिकताएं जारी हैं।वर्तमान में भारत के कई देशों और समूहों के साथ FTA लागू हैं, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ओमान, ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) और मॉरीशस शामिल हैं। इसके अलावा, यूनाइटेड किंगडम (UK), न्यूज़ीलैंड और यूरोपीय संघ (EU) के साथ भी समझौते अंतिम चरण में हैं।वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, पिछले साढ़े तीन वर्षों में भारत ने नौ मुक्त व्यापार समझौते पूरे किए हैं, जो लगभग 38 विकसित देशों को कवर करते हैं। उनका कहना है कि ये समझौते भारतीय वस्तुओं और सेवाओं को वैश्विक बाजारों में बेहतर पहुंच प्रदान कर रहे हैं और विश्व व्यापार के बड़े हिस्से को प्रभावित करते हैं।सरकार का लक्ष्य चालू वर्ष में 1 ट्रिलियन डॉलर और अगले पांच वर्षों में 2 ट्रिलियन डॉलर का निर्यात हासिल करना है। इसी उद्देश्य के तहत इज़रायल, कनाडा, खाड़ी सहयोग परिषद (GCC), दक्षिण अफ्रीकी संघ (SACU), रूस, मध्य एशियाई देशों और अन्य साझेदारों के साथ व्यापार वार्ताएं तेज की जा रही हैं।और पढ़ें :- महाराष्ट्र के 19 जिलों में लागू होगी ‘कपास क्रांति’ योजना

महाराष्ट्र के 19 जिलों में लागू होगी ‘कपास क्रांति’ योजना

महाराष्ट्र के 19 जिलों में ‘कपास क्रांति’ योजना लागू, ₹191 करोड़ का प्रावधानमुंबई: देश में कपास उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने महत्वाकांक्षी ‘कपास क्रांति’ (Cotton Revolution) योजना लागू करने का निर्णय लिया है। महाराष्ट्र के उत्तरी महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र के 19 प्रमुख कपास उत्पादक जिलों को इस योजना का लाभ मिलेगा। राज्य में इसके लिए ₹191 करोड़ का प्रावधान किया गया है।यह पहल केंद्र सरकार के ‘कपास उत्पादकता मिशन’ के अंतर्गत शुरू की जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य कपास खेती से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करना और किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। योजना का क्रियान्वयन वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक किया जाएगा। इस दौरान देशभर में लगभग ₹5,659.22 करोड़ खर्च किए जाएंगे।योजना के तहत किसानों को अधिक उपज देने वाली, जलवायु-अनुकूल तथा कीट-प्रतिरोधी बीज किस्मों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अलावा हाई-डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम (HDPS), क्लोज़र स्पेसिंग (CS) और एकीकृत कपास प्रबंधन जैसी आधुनिक कृषि तकनीकों को व्यापक स्तर पर अपनाने पर जोर दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इन उपायों से प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।‘कपास क्रांति’ योजना के अंतर्गत एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल (ELS) कपास के उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ जिनिंग और प्रसंस्करण इकाइयों के आधुनिकीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे कपास की गुणवत्ता में सुधार होगा और भारतीय कपास की वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी।भारतीय कपास को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च गुणवत्ता और टिकाऊ उत्पाद के रूप में स्थापित करने के लिए ‘कस्तूरी कॉटन भारत’ ब्रांड के तहत विशेष प्रचार अभियान भी चलाया जाएगा। यह अभियान देश के 14 राज्यों के 140 जिलों में संचालित होगा।राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरने ने कहा कि HDPS पद्धति में अधिक पानी की आवश्यकता को देखते हुए सरकार कपास किसानों को सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों पर अतिरिक्त सब्सिडी देने की संभावना पर विचार कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना से महाराष्ट्र के कपास उत्पादक क्षेत्रों में उत्पादन, उत्पादकता और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।और पढ़ें :- रुपया डॉलर के मुकाबले 22 पैसे गिरकर 95.27 पर बंद हुआ।

Showing 34 to 44 of 3310 results

Related News

Youtube Videos

SIS Connect App — Cotton & Soybean Market Rates All-in-One | Download Free on Android #smartinfo
SIS Connect App — Cotton & Soybean Market Rates All-in-One |...
ईद पर कपास बाजार में गिरावट😱 Cotton Market Rate Today #youtube
ईद पर कपास बाजार में गिरावट😱 Cotton Market Rate Today #yout...
देशभर में कपास के ताज़ा भाव 😱| Cotton rate today #youtube
देशभर में कपास के ताज़ा भाव 😱| Cotton rate today #youtube

Circular

title Created At Action
बांग्लादेश की मांग से भिलवाड़ा के सूती धागा निर्यात में तेज़ी 04-06-2026 13:23:32 view
खरीफ 2026 में पंजाब में कपास की बुवाई रिकॉर्ड निचले स्तर पर 04-06-2026 13:11:45 view
रुपया डॉलर के मुकाबले 95.71 पर स्थिर खुला 04-06-2026 09:32:04 view
भारत पर नए अमेरिकी टैरिफ का खतरा, दिल्ली में जारी व्यापार वार्ता 03-06-2026 17:59:48 view
रुपया डॉलर के मुकाबले 26 पैसे गिरकर 95.71 पर बंद हुआ। 03-06-2026 15:42:28 view
आयात शुल्क छूट के बाद कपास और यार्न कीमतों में गिरावट 03-06-2026 15:09:30 view
मनवत APMC में 4.36 लाख क्विंटल कपास की रिकॉर्ड खरीद 03-06-2026 15:02:42 view
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 18 पैसे गिरकर 95.45 पर खुला. 03-06-2026 09:23:26 view
FY27 की शुरुआत में भारत के निर्यात में मजबूत बढ़त, FTA पर जोर 02-06-2026 17:15:57 view
महाराष्ट्र के 19 जिलों में लागू होगी ‘कपास क्रांति’ योजना 02-06-2026 16:12:30 view
रुपया डॉलर के मुकाबले 22 पैसे गिरकर 95.27 पर बंद हुआ। 02-06-2026 15:41:36 view
Copyright© 2023 | Smart Info Service
Application Download