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खंडवा में 16 सितंबर से कपास कारोबार शुरू

खंडवा कृषि उपज मंडी में कपास के व्यापार के लिए 16 सितंबर की शुभ तिथि तयखंडवा। खंडवा कृषि उपज मंडी समिति (APMC) में कपास के व्यापार (खरीद-बिक्री) की शुरुआत के लिए बुधवार, 16 सितंबर 2026 को सुबह 11:00 बजे का शुभ समय तय किया गया है। इस संबंध में गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को APMC कार्यालय भवन में व्यापारियों के साथ एक बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता मंडी सचिव रामवीर किरार ने की।बैठक के दौरान, मंडी परिसर में अधिसूचित कृषि उपज—कपास—के व्यापार को शुरू करने के शुभ समय के बारे में व्यापारियों से चर्चा की गई। इन विचार-विमर्श के बाद, कपास व्यापार शुरू करने के लिए बुधवार, 16 सितंबर 2026 को सुबह 11:00 बजे का शुभ समय निर्धारित किया गया।मंडी सचिव रामवीर किरार की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कपास व्यापार और आगामी सीजन से जुड़ी आवश्यक व्यवस्थाओं पर भी चर्चा की गई। मंडी में कपास की आवक शुरू होने के साथ ही किसान अपनी उपज बिक्री के लिए मंडी ला सकेंगे, जबकि व्यापारियों के लिए कपास व्यापार का नया सीजन शुरू होगा।बैठक में मंडी समिति के अधिकारी और कर्मचारी, जिनमें अशोक शर्मा, दयाराम चौहान, प्रेमनारायण डुगाया और श्याम डांगी शामिल थे, उपस्थित रहे। बैठक में भाग लेने वाले व्यापारियों में अमित जैन, वीरेंद्र अग्रवाल, कैलाश बंसल, संजू अग्रवाल, अंकुर जैन, सुनील गुप्ता, संदीप अग्रवाल और जितेंद्र सिंह उबेजा शामिल थे।बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, खंडवा कृषि उपज मंडी परिसर में कपास की खरीद-बिक्री अब 16 सितंबर को सुबह 11:00 बजे शुरू होगी। मंडी समिति व्यापार कार्यों को शुरू करने के लिए आवश्यक तैयारियां कर रही है।और पढ़ें :- 2025-26 सीजन में CCI की कपास बिक्री 94.27 लाख गांठों तक

2025-26 सीजन में CCI की कपास बिक्री 94.27 लाख गांठों तक

 💥राज्य-वार CCI कपास बिक्री विवरण – 2025-26 सीज़न💥 कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (CCI) ने 2025-26 सीज़न के लिए इस सप्ताह अपनी कॉटन कैंडी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया। अब तक CCI द्वारा सीजन 2025-26 की लगभग कुल 94,27,700 कपास गांठें (बेल्स) बेची जा चुकी हैं। बिक्री कुछ प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में केंद्रित है, जिसमें महाराष्ट्र, तेलंगाना और गुजरात सबसे आगे हैं।महाराष्ट्र में 28,35,700 गाँठतेलंगाना में  24,28,400 गाँठगुजरात में  17,75,000 गाँठकर्नाटका में  7,10,800 गाँठमध्य प्रदेश में  5,66,400 गाँठराजस्थान में  3,28,700 गाँठआंध्र प्रदेश में  2,82,200  गाँठओडिशा में  2,69,500 गाँठहरियाणा में  1,85,500 गाँठपंजाब में  45,200 गाँठएवं वेस्ट बंगाल में 300 गाँठो की बिक्री है।

CCI कपास भाव इस हफ्ते स्थिर

इस हफ़्ते CCI के कॉटन की कीमतें जस की तस रहींकॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (CCI) ने 11 सितंबर, 2026 को खत्म हुए हफ़्ते के दौरान अपने कॉटन कैंडी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया। इस हफ़्ते, CCI ने 2025–26 की फ़सल से लगभग 2,200 बेल कॉटन बेचा, जिसे ट्रेडर्स और मिलों, दोनों ने खरीदा।📊 CCI की रोज़ाना नीलामी का प्रदर्शन07 सितंबर, 2026कुल 300 बेल बेचे गए, जिनकी पूरी खरीद ट्रेडर्स ने की।08 सितंबर, 2026इस दिन की नीलामी में 400 बेल की बिक्री हुई, और पूरी मात्रा मिलों ने खरीदी।09 सितंबर, 2026नीलामी के दौरान कुल 500 बेल बेचे गए, जिन्हें मिलों ने खरीदा।10 सितंबर, 2026इस दिन 900 बेल की बिक्री हुई, और पूरी मात्रा मिलों ने खरीदी।11 सितंबर, 2026हफ़्ते का समापन 100 बेल की बिक्री के साथ हुआ, जिन्हें ट्रेडर्स ने खरीदा।नीलामी की हालिया गतिविधियों के बाद, 2025–26 सीज़न के लिए CCI की कुल कॉटन बिक्री लगभग 94.27 लाख बेल तक पहुँच गई।और पढ़ें :-गुजरात में बारिश की कमी से ही सूखा घोषित नहीं होगा

गुजरात में बारिश की कमी से ही सूखा घोषित नहीं होगा

गुजरात सरकार ने विधानसभा को बताया: सिर्फ़ कम बारिश से सूखा घोषित नहीं किया जा सकतागांधीनगर: गुजरात सरकार ने शुक्रवार को कहा कि किसी ज़िले में सूखा घोषित करने के लिए सिर्फ़ कम बारिश का होना काफ़ी नहीं है। सरकार ने ज़ोर देकर कहा कि ऐसा फ़ैसला लेने से पहले फ़सल की स्थिति, मिट्टी में नमी, भूजल स्तर और दूसरे वैज्ञानिक पैमानों की जाँच की जानी चाहिए।गुजरात विधानसभा के नियमों के नियम 116 के तहत एक नोटिस का जवाब देते हुए, संसदीय मामलों के मंत्री ऋषिकेश पटेल ने कहा कि राज्य में 3 सितंबर तक मौसमी औसत बारिश का 75.43 प्रतिशत हिस्सा हुआ है।जहाँ दक्षिण गुजरात में औसत बारिश का 103.91 प्रतिशत हिस्सा हुआ, वहीं सौराष्ट्र, कच्छ और उत्तर गुजरात के कई ज़िलों में बारिश की भारी कमी देखी गई। देवभूमि द्वारका में औसत बारिश का सिर्फ़ 6.41 प्रतिशत हिस्सा दर्ज किया गया, इसके बाद पोरबंदर में 18.12 प्रतिशत, जामनगर में 28.88 प्रतिशत और कच्छ में 29.29 प्रतिशत बारिश हुई।हालाँकि, सरकार ने कहा कि खेती की स्थिति ऐसी नहीं है कि तुरंत सूखा घोषित किया जाए। 31 अगस्त तक, 80.39 लाख हेक्टेयर ज़मीन पर बुआई हो चुकी थी, जो राज्य के सामान्य बुआई क्षेत्र 85.30 लाख हेक्टेयर का 94.24 प्रतिशत है।मूंगफली, दालों, सोयाबीन और धान की बुआई सामान्य स्तर से ज़्यादा रही, जबकि कपास की बुआई सामान्य स्तर का 90.07 प्रतिशत रही।सरकार ने कहा कि पानी की उपलब्धता पर भी कड़ी नज़र रखी जा रही है। सरदार सरोवर बांध 88.60 प्रतिशत भरा हुआ था, जबकि राज्य के अन्य 206 जलाशयों में 66.07 प्रतिशत पानी जमा था। नर्मदा कमांड क्षेत्र में खरीफ़ फ़सलों की सिंचाई के साथ-साथ सौनी और सुजलाम सुफलाम योजनाओं के ज़रिए पीने और सिंचाई के पानी की व्यवस्था भी की गई थी।21 ज़िलों के 132 तालुका समूहों में खेती के लिए बिजली की आपूर्ति आठ घंटे से बढ़ाकर 10 घंटे कर दी गई थी। चारे की तैयारी भी चल रही थी; 402.54 लाख किलोग्राम चारा उपलब्ध था और 31 लाख किलोग्राम चारा सब्सिडी वाली दरों पर पहले ही बांटा जा चुका था। केंद्र के सूखा प्रबंधन मैनुअल का हवाला देते हुए सरकार ने कहा कि बारिश, फसल की बुवाई, NDVI, मिट्टी में नमी और भूजल स्तर का आकलन किया जाना चाहिए, और उसके बाद फसल को हुए नुकसान की भौतिक जांच होनी चाहिए।कांग्रेस और AAP ने मांग की है कि जिन इलाकों में बारिश कम हुई है, उन्हें सूखाग्रस्त घोषित किया जाए ताकि किसानों और ग्रामीण समुदायों को समय पर राहत मिल सके।और पढ़ें :- देरी से आए मानसून के कारण महाराष्ट्र में कपास का रकबा 10% घटा

देरी से आए मानसून के कारण महाराष्ट्र में कपास का रकबा 10% घटा

मानसून में देरी से महाराष्ट्र में कपास का रकबा 10% घटामहाराष्ट्र: मानसून में देरी और शुरुआती बारिश की कमी का असर महाराष्ट्र में कपास की बुवाई पर पड़ा है। देश के सबसे बड़े कपास उत्पादक राज्य में इस खरीफ सीजन कपास का रकबा करीब 10% घटकर 38.4 लाख हेक्टेयर रह गया है। पिछले पांच वर्षों में राज्य में कपास की औसत बुवाई 42.5 लाख हेक्टेयर रही है। इस लिहाज से करीब 4 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कमी आई है।भारत के कुल कपास क्षेत्र में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी करीब 38% है। कपास राज्य की प्रमुख खरीफ फसलों में शामिल है और कुल 1.4 करोड़ हेक्टेयर खरीफ क्षेत्र में इसका हिस्सा करीब 30% है। ऐसे में बुवाई क्षेत्र में कमी से उत्पादन और पैदावार को लेकर चिंता बढ़ गई है।मानसून में देरी का सबसे अधिक असर नासिक मंडल में पड़ा है। जलगांव, धुले, नंदुरबार और नासिक जिलों वाले इस मंडल में कपास की बुवाई 9.30 लाख हेक्टेयर के औसत क्षेत्र के मुकाबले घटकर 7.48 लाख हेक्टेयर रह गई है। यानी करीब 1.82 लाख हेक्टेयर की कमी आई है, जो 24% से अधिक है। जलगांव में भी कपास का रकबा 5.5 लाख हेक्टेयर के औसत से घटकर 4.3 लाख हेक्टेयर रह गया है।छत्रपति संभाजीनगर मंडल में भी कपास की बुवाई में करीब 22% की गिरावट दर्ज की गई है। छत्रपति संभाजीनगर, जालना और बीड जिलों वाले इस मंडल में औसत 10.3 लाख हेक्टेयर के मुकाबले करीब 8 लाख हेक्टेयर में कपास बोई गई है।इसके विपरीत, अमरावती मंडल में कपास की बुवाई सामान्य रही। बुलढाणा, अकोला, वाशिम, अमरावती और यवतमाल जिलों में औसत 10.9 लाख हेक्टेयर क्षेत्र के बराबर ही इस वर्ष कपास बोई गई है। कृषि अधिकारियों के अनुसार, इन क्षेत्रों में बुवाई के दौरान बारिश का वितरण बेहतर रहा।हालांकि, अब कई कपास उत्पादक क्षेत्रों में पिछले दो सप्ताह से बारिश नहीं होने के कारण किसान फसल की बढ़वार को लेकर चिंतित हैं। धुले के किसान लक्ष्मण पाटिल ने कहा कि कपास की फसल को अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश की जरूरत है। बारिश नहीं होने पर फसल प्रभावित होने के साथ पैदावार में भी गिरावट आ सकती है।और पढ़ें - टिंटुई में कपास सीजन की शुरुआत ₹2,100 पर

टिंटुई में कपास सीजन की शुरुआत ₹2,100 पर

कपास सीजन की धमाकेदार शुरुआत! टिंटोई में ₹2,100 प्रति मन बिका कपासमोडासा के टिंटोई सबयार्ड में नए कपास सीजन की शुरुआत हो गई है। मानसून के बाद तैयार हुई कपास की पहली आवक के साथ बाजार में कारोबार शुरू हुआ। पहले दिन पब्लिक ऑक्शन में कपास की शुरुआती बोली ₹1,111 प्रति मन से शुरू हुई, जबकि अंत में गुरुकृपा व्यापारियों ने सबसे ऊंची बोली लगाकर कपास ₹2,100 प्रति मन के भाव पर खरीदी।नए सीजन के पहले ही दिन कपास के ऊंचे भाव मिलने से किसानों में खुशी का माहौल रहा। ऑक्शन के दौरान व्यापारियों में भी नई कपास की खरीद को लेकर उत्साह देखा गया।क्षेत्र में इस सीजन किसानों ने 20 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में कपास की बुवाई की है। ऐसे में आने वाले दिनों में टिंटोई सबयार्ड में कपास की आवक बढ़ने की उम्मीद है।सीजन की पहली खरीद के अवसर पर मोडासा यार्ड के चेयरमैन पंकजभाई पटेल ने टिंटोई सबयार्ड के कर्मचारियों, व्यापारियों और किसानों को बधाई दी और नए सीजन के सफल कारोबार की शुभकामनाएं दीं।और पढ़ें :- बारवानी कपास को मिलेगी गुणवत्ता पहचान

बारवानी कपास को मिलेगी गुणवत्ता पहचान

बड़वानी के कपास को मिलेगी गुणवत्ता की पहचान, हर बेल पर ₹500 तक इंसेंटिवखेत से जिनिंग तक गुणवत्ता मानकों से जोड़ी जाएगी पूरी प्रक्रिया, जिले में कॉटन टेस्टिंग लैब स्थापित करने की तैयारीबड़वानी जिले के कपास को देश-विदेश के बाजार में विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए अब खेत से लेकर जिनिंग तक पूरी प्रक्रिया को गुणवत्ता मानकों से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। कस्तूरी कॉटन भारत मिशन के तहत जिले में कॉटन टेस्टिंग लैब स्थापित करने की पहल की जा रही है। इससे स्थानीय स्तर पर ही कपास की गुणवत्ता का वैज्ञानिक परीक्षण संभव हो सकेगा।कपास की गुणवत्ता में सुधार के लिए जिनिंग इकाइयों में पोस्ट-क्लीनिंग मशीन लगाने का भी प्रावधान किया गया है। वहीं, गुणवत्तायुक्त कपास को कस्तूरी कॉटन के रूप में बढ़ावा देने पर प्रत्येक बेल पर ₹500 तक का इंसेंटिव दिए जाने की जानकारी दी गई है। इससे गुणवत्ता बनाए रखने के लिए किसानों और जिनिंग इकाइयों को प्रोत्साहन मिलेगा।इस संबंध में भारतीय कपास निगम (सीसीआई) के सीएमडी ललित कुमार गुप्ता ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कलेक्टर एवं जिले के अधिकारियों के साथ जिनिंग और स्पिनिंग उद्योग से जुड़े व्यापारियों से चर्चा की। बैठक में बड़वानी के कपास को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए गुणवत्ता, स्वच्छता और ट्रेसबिलिटी पर चर्चा हुई।मिशन के तहत किसानों को कपास की पिकिंग के समय से ही साफ-सफाई का ध्यान रखने के लिए जागरूक किया जाएगा। कपास में मिट्टी, पत्तियां, कचरा अथवा अन्य बाहरी सामग्री की मिलावट रोकने पर विशेष जोर रहेगा। इसके बाद भंडारण, परिवहन और जिनिंग के दौरान भी गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जाएगा।कलेक्टर जयति सिंह ने बताया कि इस दिशा में जिले में जागरूकता बढ़ाई जा रही है। जल्द ही इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए कपास की गुणवत्ता सुधारने और बड़वानी के कपास को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।और पढ़ें :- कॉटन यार्न के दाम 60% बढ़े.

कॉटन यार्न के दाम 60% बढ़े.

सूती धागे की कीमतें 60% बढ़ीं: भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री लागत के बढ़ते संकट का सामना कर रही हैभारत का टेक्सटाइल उद्योग लागत के बढ़ते दबाव का सामना कर रहा है क्योंकि सूती धागे की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे देश के बढ़ते फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से मिलने वाले संभावित फायदों पर असर पड़ रहा है।अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC) के अनुसार, सूती धागे की कीमतें लगभग 60% बढ़कर ₹250 प्रति किलोग्राम से ₹400 प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गई हैं। कपड़ों के निर्यातकों ने सरकार से धागे के निर्यात को नियंत्रित करने और घरेलू कीमतों को काबू में रखने के उपायों पर विचार करने का आग्रह किया है।उद्योग के प्रतिनिधियों का कहना है कि धागे की बढ़ती कीमतें और कपास की सीमित उपलब्धता टेक्सटाइल सेक्टर के लिए एक गंभीर चुनौती पैदा कर रही हैं। तिरुपुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के महासचिव कुमार दुरईस्वामी ने कहा कि भारत को लगभग 10 लाख गांठों (बेल्स) की कमी का सामना करना पड़ रहा है और उन्होंने ड्यूटी-फ्री कपास आयात को बढ़ाने और घरेलू उत्पादन में वृद्धि करने की मांग की।सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि 2020-21 में 352.48 लाख गांठों की तुलना में 2025-26 में कपास का उत्पादन घटकर 290.91 लाख गांठें रह गया। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि कम उत्पादन और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थितियां धागे की कीमतों में बढ़ोतरी का कारण बन रही हैं।धागे की बढ़ती लागत टेक्सटाइल वैल्यू चेन में मुनाफे (मार्जिन) को कम कर रही है। प्राइमस पार्टनर्स के कनिष्क माहेश्वरी ने कहा कि तिरुपुर के निर्यातकों का अनुमान है कि उत्पादन लागत में 15% तक की वृद्धि हुई है। इनपुट लागत बढ़ने से कपड़े और तैयार कपड़ों की लागत भी बढ़ रही है, जबकि निर्यातकों को इस पूरी बढ़ोतरी का बोझ वैश्विक खरीदारों पर डालने में कठिनाई हो रही है।उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि FTA बाजार तक अच्छी पहुंच प्रदान कर सकते हैं, लेकिन इनपुट लागत अधिक होने से भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो सकती है। उन्होंने कच्चे माल की भरोसेमंद आपूर्ति, कपास आयात में अधिक लचीलापन, बेहतर उत्पादकता, तकनीक को अपनाने और सप्लाई-चेन की दक्षता बढ़ाने की मांग की।विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि FTA के अवसरों को लगातार निर्यात वृद्धि में बदलने के लिए भारत को पूरी टेक्सटाइल वैल्यू चेन—कपास और धागे से लेकर तैयार कपड़ों तक—को मजबूत करना होगा।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 24 पैसे की कमजोरी के साथ 95.68 पर खुला।

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