Recent News

करीमनगर में कपास पर सूखे का असर

करीमनगर में बारिश का इंतजार, सूखे से कपास की फसल की बढ़वार प्रभावितकरीमनगर, तेलंगाना: करीमनगर जिले के कपास किसान उत्तर-पूर्वी मानसून की बारिश का इंतजार कर रहे हैं। लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण जिले के कई इलाकों में कपास की फसल मुरझाने लगी है और पौधों की बढ़वार प्रभावित हुई है। किसानों के अनुसार, लाल मिट्टी वाले खेतों में कपास की स्थिति काली मिट्टी वाले खेतों की तुलना में अधिक खराब है।करीमनगर जिले में इस सीजन करीब 46,000 एकड़ क्षेत्र में कपास की खेती की गई है। धान के बाद कपास जिले की दूसरी प्रमुख फसल है। कपास में धान की तुलना में कम पानी की जरूरत होने के कारण पारंपरिक कपास उत्पादकों के साथ अन्य किसानों ने भी इस बार बड़े क्षेत्र में इसकी खेती की है।किसानों का कहना है कि खरीफ सीजन की शुरुआत से ही बारिश की कमी के कारण कपास की फसल को पानी की समस्या का सामना करना पड़ा। समय पर बुवाई के बावजूद पर्याप्त बारिश नहीं होने से कई क्षेत्रों में पौधों के अंकुरण में देरी हुई। इसके बाद लंबे समय तक बारिश नहीं होने से फसल की बढ़वार प्रभावित हुई। किसानों को आशंका है कि यदि सूखे की स्थिति बनी रही तो कपास की पैदावार में करीब 50 प्रतिशत तक कमी हो सकती है।रामाडुगु मंडल के वेंकटगिरी गांव के किसान उज्जगिरी गंगैया ने चार एकड़ में कपास और तीन एकड़ में धान की खेती की है। उन्होंने बताया कि कुआं होने के बावजूद दोनों फसलों के लिए पर्याप्त सिंचाई पानी उपलब्ध नहीं है। उनके अनुसार, अंकुरण में देरी के कारण कपास के पौधे छोटे रह गए हैं। इससे फूलों की संख्या और पैदावार प्रभावित होने की आशंका है। गंगैया ने बताया कि उन्होंने कपास की खेती पर प्रति एकड़ 30,000 रुपये से अधिक खर्च किए हैं और अब उन्हें लागत निकलने की चिंता है।करीमनगर ग्रामीण मंडल के गोपालपुर के किसान मंडा राजमल्लैया ने बताया कि अधिक तापमान और लंबे सूखे के कारण मिट्टी में नमी कम हो गई है। उनका मानना है कि यदि दो अच्छी बारिश हो जाएं तो फसल को बचाया जा सकता है। गंगैया के अनुसार, फसल की स्थिति में सुधार के लिए दिवाली तक हर 10-15 दिन में बारिश होना मददगार रहेगा। और पढ़ें :- भारतीय रुपया US डॉलर के मुकाबले 35 पैसे गिरकर 96.77 पर बंद हुआ।

महाराष्ट्र में सूखे पर सरकार के कदम तेज

महाराष्ट्र में सूखा: फसल नुकसान के बीच सरकार ने रोजगार और पलायन रोकने के उपाय तेज किएमहाराष्ट्र में सूखे की स्थिति के बीच कई इलाकों में फसलों को नुकसान की खबरें सामने आ रही हैं। राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने, पलायन रोकने और महिलाओं तथा बच्चों की सुरक्षा के लिए नए उपायों की घोषणा की है।सरकार ने सोमवार, 5 अक्टूबर को बताया कि वह रोजगार गारंटी योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक टास्क फोर्स बनाएगी। इसका उद्देश्य योजना के तहत अधिक मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराना और सूखे से प्रभावित परिवारों के पलायन को रोकना है।महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने सूखे के दौरान बाल विवाह के मामलों में बढ़ोतरी की आशंका जताई। राज्य सरकार ने स्थानीय प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों में जागरूकता अभियान और आउटरीच कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि महिलाओं और परिवारों, विशेष रूप से पलायन करने वाले परिवारों तक पहुंच बनाई जा सके।महिला एवं बाल विकास विभाग ने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि आंगनवाड़ी केंद्रों में पर्याप्त पानी और भोजन की नियमित आपूर्ति बनी रहे। सरकार के अनुसार, सूखे के कारण पलायन करने वाले परिवारों के बच्चों को सरकारी हॉस्टल और चाइल्ड केयर होम में आश्रय दिया जाएगा।विदर्भ में कपास और धान की फसल को नुकसानमराठवाड़ा और सोलापुर के अलावा विदर्भ के कई हिस्सों में भी फसलों को नुकसान की खबर है। विदर्भ के कपास उत्पादक जिलों में कपास की फसल प्रभावित हुई है। किसान केंद्र सरकार से मांग कर रहे हैं कि 31 अक्टूबर के बाद कपास के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति आगे नहीं बढ़ाई जाए।किसानों को आशंका है कि सस्ता आयातित कपास घरेलू कीमतों पर दबाव बढ़ा सकता है। विदर्भ के भंडारा जिले में भी धान की फसल को भारी नुकसान की खबर है। जिले में उगाई जाने वाली फसलों में धान की हिस्सेदारी लगभग 90% है।पिछले साल की तुलना में जल भंडारण कम5 अक्टूबर तक महाराष्ट्र में जल भंडारण 74.29% था, जबकि पिछले साल इसी तारीख को यह 89.22% था। मराठवाड़ा और विदर्भ सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं।कम जल भंडारण और फसल नुकसान के बीच राज्य के किसान सूखे के प्रभाव का सामना कर रहे हैं। राज्य सरकार रोजगार बढ़ाने, पलायन रोकने और प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए कदम उठा रही है।और पढ़ें :- अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 96.42 पर स्थिर खुला

CCI दिखाएगा डिजिटल कपास सुधार

CCI रिफॉर्म उत्सव में दिखाएगा कपास क्षेत्र के डिजिटल सुधारहैदराबाद: कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (CCI) 6 अक्टूबर 2026 को हैदराबाद में ‘रिफॉर्म उत्सव 2026’ के तहत एक विशेष कार्यक्रम आयोजित करेगा। कार्यक्रम का उद्देश्य टेक्सटाइल वैल्यू चेन को ‘खेत से फाइबर, फाइबर से फैक्ट्री, फैक्ट्री से फैशन और फैशन से विदेश’ तक मजबूत करने के सरकार के विजन को आगे बढ़ाना है। इसमें सरकारी अधिकारी, किसान, उद्योग प्रतिनिधि और नीति निर्माता शामिल होंगे।कार्यक्रम में CCI द्वारा कपास की खरीद और प्रसंस्करण से जुड़े किसान-केंद्रित, पारदर्शी और तकनीक आधारित सुधारों को प्रदर्शित किया जाएगा। CCI ने किसानों की सुविधा के लिए पंजीकरण, स्लॉट बुकिंग, सीधे बैंक खाते में भुगतान, कपास की गुणवत्ता जांच और डिजिटल ट्रेसेबिलिटी जैसी व्यवस्थाएं लागू की हैं।कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण ‘कपास किसान’ डिजिटल प्लेटफॉर्म होगा। इसके माध्यम से किसान पंजीकरण, स्लॉट बुकिंग और खरीद प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आधार आधारित भुगतान व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को पारदर्शी और सुविधाजनक भुगतान उपलब्ध कराना है।कार्यक्रम में डिजिटल ट्रेसेबिलिटी, मिलावट रोकने के उपाय, ‘कस्तूरी कॉटन भारत’ और हाई-डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम जैसी पहलों की जानकारी भी दी जाएगी। इन प्रयासों का उद्देश्य कपास की गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ाने के साथ भारतीय कपास की बाजार स्थिति को मजबूत करना है। CCI के सुधारों पर प्रस्तुति, एक शॉर्ट फिल्म और किसानों तथा व्यापार से जुड़े लोगों से फीडबैक भी लिया जाएगा।इसके अलावा, केंद्रीय रेशम बोर्ड रेशम उत्पादन क्षेत्र में किए जा रहे डिजिटल सुधारों को भी प्रदर्शित करेगा। डिजिटल ‘सिल्क मार्क’ सेवाओं के जरिए पंजीकरण, नवीनीकरण, भुगतान, दस्तावेजीकरण और शिकायत समाधान की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है।केंद्रीय रेशम बोर्ड ‘मेरा रेशम मेरा अभिमान’ अभियान के माध्यम से किसानों तक आधुनिक तकनीक पहुंचाने पर जोर देगा। इसके तहत किसानों को प्रशिक्षण और खेतों में तकनीक का प्रदर्शन कराया जाता है। कार्यक्रम में ‘सेरी-टूरिज्म’ पहल को भी प्रदर्शित किया जाएगा, जिसमें संग्रहालय, लाइव डेमो और उत्पाद केंद्रों के माध्यम से रेशम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया दिखाई जाएगी।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 1 पैसे की कमजोरी के साथ 96.31 पर खुला।

MP में कपास श्रमिकों के अधिकारों पर जोर

मध्य प्रदेश के कपास उत्पादक क्षेत्रों में श्रमिक अधिकार मजबूत करने पर जोरमध्य प्रदेश में कपास उत्पादन से जुड़े संगठनों और अन्य हितधारकों ने कपास उत्पादक समुदायों में श्रमिकों के बुनियादी अधिकारों और बेहतर कार्य परिस्थितियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन (ILO) के ‘RISE for Impact’ प्रोजेक्ट से जुड़े साझेदारों ने परियोजना के तहत किए गए काम को आगे भी जारी रखने के लिए बेहतर समन्वय, स्थानीय स्तर पर जागरूकता और किसानों को सरकारी सेवाओं से जोड़ने की जरूरत पर सहमति जताई।ILO के अनुसार, ट्रेड यूनियनों, कपास उद्योग, नागरिक समाज संगठनों और कपास उत्पादक समुदायों के प्रतिनिधियों ने अगस्त में इंदौर में बैठक की। इसमें परियोजना की प्रगति, चुनौतियों और अब तक मिली सीख की समीक्षा की गई। प्रतिभागियों ने स्थानीय नेताओं, ट्रेड यूनियनों, सामुदायिक संगठनों और सरकारी संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई। मौसमी पलायन और बाल श्रम के मूल कारणों पर भी अधिक ध्यान देने की बात कही गई।इंदौर कार्यक्रम में ILO और डॉ. बी.आर. अंबेडकर यूनिवर्सिटी ऑफ सोशल साइंसेज की संयुक्त रिपोर्ट ‘मध्य प्रदेश में कपास उगाने वाले समुदाय का सामाजिक-आर्थिक मूल्यांकन’ भी जारी की गई। रिपोर्ट में बहुत कम जमीन वाले किसानों की स्थिति पर ध्यान दिया गया है, जो खेती के लिए अपनी और परिवार की मेहनत पर काफी हद तक निर्भर रहते हैं।रतलाम में कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (CITI) और उसकी सहयोगी संस्था कॉटन डेवलपमेंट एंड रिसर्च एसोसिएशन (CITI-CDRA) की ओर से आयोजित कार्यशाला में 100 से अधिक किसानों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला में मजदूरों की कमी, खेती में युवाओं की घटती रुचि और महिला किसानों पर भुगतान वाले तथा बिना भुगतान वाले काम के दोहरे बोझ जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।कार्यशाला में किसानों को श्रम कानून, शिकायत निवारण व्यवस्था, सरकारी योजनाओं और ग्रामीण वित्त की जानकारी दी गई। केयर कोऑपरेटिव्स यानी देखभाल सहकारी समितियों की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। ILO की विशेषज्ञ भारती बिरला ने सस्ती और अच्छी गुणवत्ता वाली देखभाल सेवाओं की जरूरत पर जोर दिया। वहीं, ILO के इंसाफ निजाम ने ग्रामीण क्षेत्रों में श्रमिकों के अधिकार मजबूत करने के लिए सभी संबंधित पक्षों के प्रभावी सहयोग को जरूरी बताया।और पढ़ें :- विदर्भ में कपास भाव गिरने का डर

विदर्भ में कपास भाव गिरने का डर

ड्यूटी-फ्री कपास आयात की अवधि बढ़ने से किसानों को दाम गिरने का डर कम बारिश और सूखे की स्थिति से कपास की फसल प्रभावित होने के बीच विदर्भ के किसानों को उम्मीद है कि सरकार 31 अक्टूबर के बाद कपास के ड्यूटी-फ्री आयात की व्यवस्था को आगे नहीं बढ़ाएगी। किसानों को डर है कि यदि शुल्क मुक्त आयात जारी रहा और विदेशी कपास की आवक बढ़ी, तो घरेलू बाजार में कपास की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। नई कपास की आवक अक्टूबर के मध्य तक शुरू होने की उम्मीद है।भारत में कपास का आयात 31 अक्टूबर तक शुल्क मुक्त किया गया है। टेक्सटाइल उद्योग इस अवधि को आगे बढ़ाने की मांग कर रहा है। उद्योग का कहना है कि कपास की बढ़ती कीमतों से उत्पादन लागत बढ़ रही है और इससे मिलों के संचालन पर असर पड़ सकता है। वहीं, किसान और कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि ड्यूटी-फ्री आयात बढ़ने से घरेलू कपास के दाम कमजोर हो सकते हैं।विदर्भ में कपास की खेती का बड़ा हिस्सा बारिश पर निर्भर है। यवतमाल जिले में 4.5 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में कपास की खेती होती है। सूखे के आकलन से जुड़ी रिपोर्ट के अनुसार, बारिश की कमी और गर्मी के तनाव से कपास के पौधों की वृद्धि प्रभावित हुई है। कई क्षेत्रों में कपास के डोडे झड़ने की समस्या भी सामने आई है।किसानों के अनुसार, सामान्य स्थिति में एक पौधे पर करीब 40 से 50 डोडे हो सकते हैं, लेकिन कई खेतों में इनकी संख्या काफी कम रह गई है। यवतमाल की आर्णी तहसील के किसान शांतनु ठाकरे ने बताया कि उनके खेत में एक पौधे पर मुश्किल से 10 से 12 डोडे बचे हैं। उन्होंने कहा कि दूसरी तुड़ाई की भी ज्यादा उम्मीद नहीं है और आगे की तुड़ाई पर भी मौसम का असर पड़ सकता है।इंटरनेशनल कॉटन एडवाइजरी कमेटी (ICAC) के अनुसार, भारत में लिंट यानी बीज निकालने के बाद बचने वाले कपास के रेशे का उत्पादन करीब 431 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रहने का अनुमान है। इसके मुकाबले ब्राजील में यह करीब 2,200 किलोग्राम और उज्बेकिस्तान में करीब 1,700 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रहने का अनुमान है। इससे वैश्विक बाजार में कपास की उपलब्धता पर्याप्त रहने की संभावना है।कपास क्षेत्र के एक्टिविस्ट विजय जवंधिया ने कॉटलुक इंडेक्स का हवाला देते हुए कहा कि वैश्विक कपास की कीमत करीब 89 सेंट प्रति पाउंड है। उनके अनुसार, एक सप्ताह पहले कीमत करीब एक डॉलर प्रति पाउंड तक पहुंच गई थी, लेकिन अब इसमें गिरावट का रुख दिखाई दे रहा है। किसानों को आशंका है कि ऐसी स्थिति में ड्यूटी-फ्री आयात बढ़ने से घरेलू कपास की कीमतों पर और दबाव बन सकता है।और पढ़ें :- CCI की कपास बिक्री 94.47 लाख गांठ

Related News

Youtube Videos

Cotton Rate Today 😱 | आज के कपास के भाव | 13 October 2026 #cotton
Cotton Rate Today 😱 | आज के कपास के भाव | 13 October 2026 #...
कपास की कीमतों में उछाल 😱 CCI ने बढ़ाए ₹500 प्रति कैंडी | Cotton Market Rate Today 12 Oct 2026
कपास की कीमतों में उछाल 😱 CCI ने बढ़ाए ₹500 प्रति कैंडी | C...
साप्ताहिक कपास बाज़ार में तेज़ी 😱 | CCI रुई गठानें बिक्री रिपोर्ट | Weekly Cotton Market 10 Oct 2026
साप्ताहिक कपास बाज़ार में तेज़ी 😱 | CCI रुई गठानें बिक्री र...

Circular

title Created At Action
डॉलर के मुकाबले रुपया 6 पैसे की मजबूती के साथ 96.71 पर खुला। 08-10-2026 09:48:33 view
करीमनगर में कपास पर सूखे का असर 07-10-2026 17:39:55 view
भारतीय रुपया US डॉलर के मुकाबले 35 पैसे गिरकर 96.77 पर बंद हुआ। 07-10-2026 15:43:27 view
महाराष्ट्र में सूखे पर सरकार के कदम तेज 07-10-2026 12:34:19 view
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 96.42 पर स्थिर खुला 07-10-2026 09:35:50 view
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 11 पैसे गिरकर 96.42 पर बंद हुआ। 06-10-2026 15:48:35 view
CCI दिखाएगा डिजिटल कपास सुधार 06-10-2026 11:39:37 view
डॉलर के मुकाबले रुपया 1 पैसे की कमजोरी के साथ 96.31 पर खुला। 06-10-2026 09:34:08 view
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 08 पैसे गिरकर 96.30 पर बंद हुआ। 05-10-2026 15:42:12 view
MP में कपास श्रमिकों के अधिकारों पर जोर 05-10-2026 13:36:28 view
विदर्भ में कपास भाव गिरने का डर 05-10-2026 13:08:19 view
Application Download
Whatsapp Contact