मध्य प्रदेश में कपास मंडी शुल्क आधा, जिनिंग मिलों और आदिवासी रोजगार को मिलेगा बड़ा लाभ
2026-06-11 12:55:33
कपास पर मंडी शुल्क आधा: जिनिंग मिलों को राहत, आदिवासी क्षेत्रों में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
मध्यप्रदेश सरकार ने कपास पर लगने वाले मंडी शुल्क को 1 प्रतिशत से घटाकर 0.5 प्रतिशत करने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद बैठक में लिए गए इस निर्णय से मनावर, गंधवानी, सिंघाना और बाकानेर क्षेत्र की करीब 9 जिनिंग मिलों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही आदिवासी बहुल इलाकों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
स्थानीय उद्योग को मिलेगा प्रोत्साहन
मनावर स्थित बायोसस्टेन फाइबर्स के फैक्ट्री मैनेजर पवन कुशवाह के अनुसार, मंडी शुल्क में कमी से स्थानीय जिनिंग उद्योग को मजबूती मिलेगी। अब तक क्षेत्र का बड़ा हिस्सा कच्चा कपास पड़ोसी राज्यों, विशेषकर गुजरात के व्यापारियों द्वारा खरीदा जाता था, जिससे स्थानीय मिलों को पर्याप्त कच्चा माल नहीं मिल पाता था। लंबे समय से जिनर एसोसिएशन मंडी शुल्क में कटौती की मांग कर रहा था।
पहले सरकार कपास पर प्रति सैकड़ा एक रुपये की दर से मंडी शुल्क वसूलती थी। शुल्क घटने के बाद मध्यप्रदेश से गुजरात और महाराष्ट्र की ओर कच्चे कपास का प्रवाह कम होने की संभावना है। इसके विपरीत, महाराष्ट्र के सीमावर्ती क्षेत्रों से कपास अब मध्यप्रदेश की जिनिंग इकाइयों तक पहुंच सकता है।
रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
पिछले वर्ष मनावर में लगभग 25 हजार गठान, बाकानेर में 7,500 गठान और सिंघाना में करीब 40 हजार गठान कपास की आवक दर्ज की गई थी। उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि नई व्यवस्था से प्रदेश से बाहर चले गए कुछ उद्योग फिर लौट सकते हैं, जिससे हजारों लोगों को रोजगार मिलने की संभावना बनेगी।
यह कदम मनावर, गंधवानी और उमरबन जैसे आदिवासी विकासखंडों में मजदूरों के महाराष्ट्र और गुजरात की ओर होने वाले पलायन को कम करने में भी मददगार साबित हो सकता है।
किसानों को भी मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय मंडियों में कपास उत्पादक किसानों को प्रति क्विंटल 40 से 50 रुपये तक अधिक मूल्य मिल सकता है। व्यापारियों के परिवहन और कर संबंधी खर्च में कमी आने से उसका कुछ लाभ किसानों तक पहुंचने की संभावना है। इससे कपास उत्पादन को भी प्रोत्साहन मिल सकता है।
सामान्य मंडी शुल्क में बढ़ोतरी
मंत्रिपरिषद ने किसान हित में सामान्य मंडी शुल्क को 1 रुपये से बढ़ाकर 1.50 रुपये प्रति सैकड़ा करने का निर्णय भी लिया है। इस अतिरिक्त आय का उपयोग किसान सड़क निधि और कृषि अनुसंधान से जुड़े विकास कार्यों में किया जाएगा, जिससे कृषि अवसंरचना को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।