भारत में इस वर्ष कपास का अंतिम स्टॉक इस सीजन से सितंबर तक पिछले तीन साल के निचले स्तर पर रहने का अनुमान है। इसकी वजह ग्लोबल डिमांड और केंद्र सरकार की निर्यात प्रोत्साहन नीतियां मानी जा रही है। कपास उत्पादन और खपत समिति (सीसीपीसी) ने कपास का उत्पादन भी तीन साल के निचले स्तर पर आंका है। कपास के विशेषज्ञों की माने तो कम क्लोजिंग स्टॉक और मजबूत मांग से आने वाले दिनों में कपास की कीमतों में तेजी आने की संभावना है। सीसीपीसी ने अक्टूबर 2021 से सितंबर 2022 तक के अपने कपास बजट में 45.46 लाख (प्रत्येक 170किलोग्राम) पर बंद होने का अनुमान लगाया है। जो कि वर्ष 2018-19 के 44.41 लाख के बाद सबसे कम है।
सीसीपीसी ने कपास उत्पादन 340.62 लाख गांठ होने का अनुमान लगाया है, जो 2018-19 के बाद से सबसे कम है। अनुमान कृषि मंत्रालय के अनुरूप हैं, लेकिन कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) के 343.13 लाख गांठ से नीचे हैं। क्लोजिंग स्टॉक का अनुमान भी पिछले महीने सीएआई द्वारा अनुमानित 48.13 लाख गांठ से कम है। चालू सीजन की शुरुआत में क्लोजिंग स्टॉक 71.84 लाख गांठ था। सीसीपीसी ने निर्यात 40 लाख गांठ होने का अनुमान लगाया है।
इस सप्ताह मंगलवार को भारतीय कपास निगम, सीएआई और भारतीय कपड़ा उद्योग परिसंघ सहित संपूर्ण कपड़ा मूल्य श्रृंखला के शीर्ष 63 उद्योग प्रतिनिधियों ने बैठक में भाग लिया। उद्योग के सूत्रों ने कहा कि कैरीओवर स्टॉक में गिरावट चिंता का विषय है। साथ ही यह भी कहा कि केंद्र की ओर से न्यूनतम समर्थन मूल्य कार्यक्रम संचालित करने वाले भारतीय कपास निगम ने इस सीजन में कोई खरीद नहीं की है क्योंकि बाजार में कम आपूर्ति के कारण कीमतें लगातार अधिक रही हैं। वर्तमान में कपास की कीमतें 8,000 रुपये प्रति क्विंटल से ऊपर चल रही हैं।
पिछले तीन सालों के क्लोजिंग स्टॉक के आंकड़ो पर एक नजर