कपास आयात शुल्क छूट के बाद टेक्सटाइल शेयरों में तेजी
By yash chouhan 2026-06-01 12:54:42
कपास आयात शुल्क में अस्थायी छूट से टेक्सटाइल शेयरों में जोरदार तेजी
सोमवार के शुरुआती कारोबार में टेक्सटाइल और परिधान कंपनियों के शेयरों में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। यह उछाल केंद्र सरकार द्वारा कपास के आयात पर कस्टम ड्यूटी में अस्थायी छूट देने की घोषणा के बाद देखने को मिला। इस कदम का उद्देश्य कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाना और घरेलू टेक्सटाइल उद्योग को राहत प्रदान करना है।
वित्त मंत्रालय ने शनिवार को जारी अधिसूचना में बताया कि कपास के आयात पर लगने वाली सभी कस्टम ड्यूटी 1 जून 2026 से 30 अक्टूबर 2026 तक के लिए समाप्त कर दी गई हैं। इससे पहले आयातित कपास पर प्रभावी रूप से 11% शुल्क लागू था। नई व्यवस्था के तहत अगले पांच महीनों तक कपास का आयात पूरी तरह शुल्क-मुक्त रहेगा।
सरकार के अनुसार, यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब घरेलू बाजार में कपास की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। आयात शुल्क हटने से कपास की उपलब्धता बढ़ेगी और उन टेक्सटाइल एवं परिधान निर्माताओं को राहत मिलेगी जो आयातित कपास पर निर्भर हैं। इससे उनकी उत्पादन लागत घटने और परिचालन मार्जिन में सुधार होने की संभावना है।
सरकारी घोषणा का निवेशकों ने सकारात्मक स्वागत किया, जिसके चलते कई टेक्सटाइल कंपनियों के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में वर्धमान टेक्सटाइल्स के शेयर लगभग 6% चढ़े, जबकि अरविंद 6.44% की बढ़त के साथ नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर अपने 52-सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
इसके अलावा, नितिन स्पिनर्स में 5.53% और हिमात्सिंगका सेइड में करीब 5% की तेजी दर्ज की गई। वेलस्पन लिविंग, ट्राइडेंट और गोकलदास एक्सपोर्ट्स के शेयर लगभग 4% तक मजबूत हुए। वहीं, KPR मिल में 2.2% तथा Kitex Garments और Pearl Global Industries में करीब 2% की बढ़त देखने को मिली। Kewal Kiran Clothing के शेयर अपेक्षाकृत स्थिर रहे।
वित्त मंत्रालय का मानना है कि यह अस्थायी शुल्क छूट टेक्सटाइल और परिधान क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन में इनपुट लागत कम करने में मदद करेगी। इससे निर्माताओं और उपभोक्ताओं दोनों को राहत मिलने की उम्मीद है, जबकि घरेलू कपास उत्पादकों के हितों के साथ भी संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया गया है।
मंत्रालय ने कहा कि बेहतर कपास उपलब्धता से घरेलू टेक्सटाइल उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) को इसका लाभ मिलने की संभावना है, क्योंकि उन्हें कच्चे माल की आपूर्ति और लागत दोनों मोर्चों पर राहत मिलेगी।