कॉटन मिशन में टेक्सटाइल मंत्रालय को ₹1,100 करोड़, गुणवत्ता सुधार पर जोर

By ashish wagh 2025-12-27 01:13:40
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कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन से टेक्सटाइल मंत्रालय को ₹1,100 करोड़, गुणवत्ता और मैन्युफैक्चरिंग सुधार पर फोकस


टेक्सटाइल मंत्रालय को कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन के तहत ₹1,100 करोड़ से अधिक का आवंटन मिलने जा रहा है, जो कुल ₹6,000 करोड़ के बजट का लगभग 22% है। यह फंड केंद्र सरकार की पांच-वर्षीय योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य देश के कपास क्षेत्र को मजबूत करना और उसकी गिरती स्थिति को सुधारना है। हालांकि, इस प्रस्ताव को अभी अंतिम कैबिनेट मंजूरी मिलनी बाकी है, जिसमें करीब एक साल की देरी हो चुकी है।


यह राशि मुख्य रूप से जिनिंग फैक्ट्रियों के आधुनिकीकरण, लिंट की गुणवत्ता सुधारने और खेत से लेकर फैक्ट्री तक पूरी टेक्सटाइल वैल्यू चेन को सुदृढ़ करने पर खर्च की जाएगी।


घटता उत्पादन बना चिंता का विषय
भारत में कपास उत्पादन लगातार गिर रहा है। 2023-24 में जहां उत्पादन 32.52 मिलियन गांठ था, वहीं 2025-26 में यह घटकर 29.22 मिलियन गांठ रहने का अनुमान है। पिछले चार वर्षों में कपास का रकबा भी लगभग 20 लाख हेक्टेयर कम हुआ है। देश में औसत पैदावार 5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के आसपास है, जो वैश्विक औसत (9 क्विंटल) और अमेरिका (10 क्विंटल) से काफी कम है।


फंड का वितरण और विवाद
मिशन के ₹6,000 करोड़ बजट में से सबसे बड़ा हिस्सा—₹4,000 करोड़ से अधिक—कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को दिया गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) को लगभग ₹600 करोड़ और टेक्सटाइल मंत्रालय को ₹1,100 करोड़ आवंटित किए गए हैं।


हालांकि, ICAR के वैज्ञानिकों ने इस आवंटन पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मिशन के अधिकांश लक्ष्यों की जिम्मेदारी ICAR पर है, लेकिन संसाधन सीमित दिए गए हैं। दूसरी ओर, टेक्सटाइल मंत्रालय ने अपने हिस्से के लिए जोरदार पैरवी की, जिसके बाद यह फंड सुनिश्चित हो पाया।


टेक्सटाइल मंत्रालय की प्राथमिकताएं
मंत्रालय इस फंड का उपयोग पोस्ट-हार्वेस्ट चरण में सुधार के लिए करेगा—जैसे बेहतर जिनिंग, सही बंडलिंग (बेलिंग), गुणवत्ता जांच और स्टोरेज। वर्तमान में खराब हैंडलिंग और मिलावट के कारण कपास की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे मिलों को अच्छा कच्चा माल नहीं मिल पाता।


इंडस्ट्री के बड़े लक्ष्य
यह पहल भारत के 2030 तक $250 बिलियन के टेक्सटाइल इंडस्ट्री लक्ष्य को भी समर्थन देती है, जिसमें $100 बिलियन निर्यात से आने का लक्ष्य है। बेहतर गुणवत्ता वाले घरेलू कपास से न केवल मिलों की लागत घटेगी, बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी भारत की स्थिति मजबूत होगी।


मंत्रालय का मानना है कि कपास की गुणवत्ता केवल खेतों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि जिनिंग, प्रोसेसिंग और सर्टिफिकेशन जैसे चरणों पर भी उतनी ही निर्भर है। इसलिए इस फंडिंग से पूरी सप्लाई चेन में सुधार लाने की दिशा में काम किया जाएगा।






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