आदिलाबाद में कपास की जल्दी बुआई किसानों पर पड़ी भारी, दोबारा करनी पड़ रही बुवाई
आदिलाबाद: पुराने आदिलाबाद जिले में कपास की जल्द बुआई करने वाले किसानों को इस खरीफ सीजन में नुकसान उठाना पड़ रहा है। जून के पहले सप्ताह में बोए गए कई खेतों में कपास के बीज पर्याप्त नमी और बारिश के अभाव में ठीक से अंकुरित नहीं हो सके, जिसके कारण किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ रही है।
किसानों का कहना है कि उन्होंने कपास के बीज करीब 800 रुपये प्रति पैकेट की दर से खरीदे थे। इसके अलावा खेत तैयार करने और मजदूरी पर भी अतिरिक्त खर्च करना पड़ा। मानसून समय पर सक्रिय नहीं होने से शुरुआती बुआई करने वाले किसानों की लागत बढ़ गई है।
कृषि विभाग के अनुसार, जिले में इस समय कपास, अरहर और सोयाबीन की बुवाई का कार्य चल रहा है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में एक-दो बार बारिश हुई, लेकिन शुरुआती दौर में बोए गए कपास के बीजों को पर्याप्त नमी नहीं मिल सकी। परिणामस्वरूप कई खेतों में अंकुरण कमजोर रहा और किसानों को खाली स्थानों पर दोबारा बीज डालने पड़ रहे हैं।
अनौपचारिक अनुमान बताते हैं कि जिले में अब तक सामान्य खेती क्षेत्र के लगभग 60 प्रतिशत हिस्से में कपास की बुवाई पूरी हो चुकी है। पिछले वर्ष आदिलाबाद में करीब 4.30 लाख एकड़ भूमि पर कपास की खेती की गई थी।
आदिलाबाद ग्रामीण मंडल के मामिदिगुडा गांव के किसान मारसाकोला सारंगाराव ने बताया कि उन्होंने 5 जून को 18 एकड़ भूमि में कपास की बुवाई की थी। इसके लिए 20 पैकेट बीज का उपयोग किया गया और करीब 30 हजार रुपये खर्च हुए। लेकिन बारिश नहीं होने से फसल का अंकुरण प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि बुआई के बाद अच्छी बारिश की उम्मीद थी, जो पूरी नहीं हुई।
जिला कृषि अधिकारी रविंदर सिंह ने बताया कि जिले में चार लाख एकड़ के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 1.60 लाख एकड़ क्षेत्र में कपास की बुवाई हो चुकी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि हाल में हुई बारिश से शुरुआती दौर में बोए गए बीजों के अंकुरण और फसल की बढ़वार में सुधार होगा। वहीं कुछ किसान स्प्रिंकलर और ड्रिप सिंचाई की मदद से अपनी फसल बचाने का प्रयास कर रहे हैं।