आंध्र प्रदेश में कपास की बुवाई में तेज़ वृद्धि, 1.86 लाख हेक्टेयर के पार पहुंचा रकबा
आंध्र प्रदेश में खरीफ-2026 सीजन के दौरान कपास की बुवाई में इस वर्ष उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य कृषि विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, 1 जुलाई 2026 को समाप्त सप्ताह तक राज्य में कुल 1,86,280 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई पूरी हो चुकी है। यह पिछले वर्ष इसी अवधि के 72,282 हेक्टेयर के मुकाबले लगभग 158 प्रतिशत अधिक है, जो किसानों की बढ़ती भागीदारी और अनुकूल मौसम परिस्थितियों को दर्शाता है।
राज्य का कुल कपास बुवाई लक्ष्य 5,14,858 हेक्टेयर निर्धारित किया गया है, जिसमें से अब तक लगभग 36 प्रतिशत क्षेत्र में बुवाई हो चुकी है। सामान्य रूप से इस अवधि तक केवल 58,452 हेक्टेयर में बुवाई होती है, लेकिन इस वर्ष यह आंकड़ा सामान्य से 319 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया है, जो खरीफ सीजन की मजबूत शुरुआत को दर्शाता है।
जिलावार आंकड़ों के अनुसार कुर्नूल जिला कपास उत्पादन में सबसे आगे है, जहां अब तक 1,30,662 हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हो चुकी है। इसके बाद पलनाडु में 19,413 हेक्टेयर, अनंतपुरम में 12,846 हेक्टेयर, एनटीआर जिले में 8,989 हेक्टेयर और वाईएसआर कडप्पा में 4,955 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई दर्ज की गई है। इसके अलावा नांदयाल, श्री सत्यसाई, मार्कापुरम, प्रकाशम, एसपीएसआर नेल्लोर, काकीनाडा, एलुरु, कृष्णा और तिरुपति जैसे जिलों में भी अलग-अलग स्तर पर बुवाई की गई है।
हालांकि, राज्य के कुछ जिलों जैसे विशाखापत्तनम, पश्चिम गोदावरी, बापटला, चित्तूर, अन्नमय्या, पोलावरम, अनकापल्ली, अल्लूरी सीतारामाराजू और कोनसीमा में कपास की बुवाई अभी भी बेहद कम या शून्य स्तर पर है।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष मानसून की शुरुआत अपेक्षाकृत अनुकूल रही है, जिसके कारण किसानों ने समय पर बुवाई की है। यदि आने वाले हफ्तों में बारिश की स्थिति सामान्य रहती है, तो कपास का कुल रकबा और बढ़ने की संभावना है। इससे राज्य में इस वर्ष कपास उत्पादन में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।