CICR का बड़ा कदम: कपास की पैदावार बढ़ाने को जीनोम एडिटिंग तकनीक पर काम

2025-07-02 18:18:14
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महाराष्ट्र: अधिक पैदावार वाली कपास के लिए जीनोम एडिटिंग तकनीक पर काम कर रहा CICR


नागपुर: केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान (CICR) कपास की उत्पादकता बढ़ाने के लिए पौधों के डीएनए में बदलाव आधारित जीनोम एडिटिंग तकनीक विकसित करने पर काम कर रहा है। यह तकनीक आधुनिक कृषि अनुसंधान में तेजी से उभर रही उन्नत विधियों में से एक मानी जा रही है।


जीनोम एडिटिंग पारंपरिक जेनेटिक इंजीनियरिंग से अलग है, जिसमें बाहरी जीन जोड़ने के बजाय डीएनए अनुक्रम में ही सटीक बदलाव किए जाते हैं। वर्तमान में किसान बीटी कपास की खेती कर रहे हैं, जिसमें बॉलवर्म कीट के प्रति प्रतिरोध के लिए एक अतिरिक्त जीन शामिल होता है।


जलवायु-अनुकूल खेती पर आयोजित एक सेमिनार के दौरान CICR निदेशक वी.एन. वाघमारे ने बताया कि इस तकनीक का उद्देश्य अधिक बॉल निर्माण वाले और कॉम्पैक्ट कपास पौधों का विकास करना है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में ठोस परिणाम आने में दो से तीन वर्ष का समय लग सकता है।


CICR के पूर्व निदेशक सी.डी. माई ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) भी जीनोम एडिटिंग तकनीक को बढ़ावा दे रहा है। हाल ही में धान की नई किस्में विकसित की गई हैं, जो सूखा जैसी परिस्थितियों में बेहतर उत्पादन देने में सक्षम हो सकती हैं।

खरपतवारनाशक-सहिष्णु (HT) बीजों के अवैध उपयोग को लेकर उठ रही चिंताओं पर वाघमारे ने कहा कि यह व्यवहारिक समाधान नहीं है, क्योंकि भारत में मिश्रित खेती प्रणाली अपनाई जाती है। ऐसे में खरपतवारनाशक का व्यापक उपयोग अन्य फसलों को प्रभावित कर सकता है।

उन्होंने यह भी बताया कि धान-प्रधान क्षेत्रों में भी कपास की खेती का रुझान बढ़ रहा है, जैसे कि गढ़चिरौली में। किसान अब कपास की मजबूती और अनुकूलता के कारण इसकी खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।


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