कपास कीमतों में 25% उछाल, बुवाई क्षेत्र बढ़ने के संकेत
2026-05-28 15:04:44
कपास रकबे में बढ़ोतरी के संकेत, कीमतों में 25% उछाल
कपास की कीमतों में तेज उछाल और उत्पादन को लेकर बढ़ती आशंकाओं के बीच देश के कपड़ा उद्योग की चिंता बढ़ गई है। हालांकि, किसानों के लिए राहत की खबर यह है कि आगामी सीजन में कपास की बुआई का रकबा बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) के अनुसार वर्ष 2026 में कपास का रकबा करीब 7 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। बेहतर बाजार भाव और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी को इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है।
पिछले दो महीनों में कपास की कीमतों में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में शंकर-6 (31 एमएम) कपास का भाव 67,100 रुपये प्रति कैंडी यानी लगभग 18,869 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गया है, जबकि ईरान-अमेरिका तनाव शुरू होने से पहले इसकी कीमत करीब 15,000 रुपये प्रति क्विंटल थी। अंतरराष्ट्रीय हालात और वैश्विक महंगाई ने कपास बाजार को प्रभावित किया है, जिसका असर कपड़ा उद्योग पर भी दिखाई दे रहा है।
सरकार ने मध्यम स्टेपल कपास का एमएसपी 8,267 रुपये प्रति क्विंटल और लंबा स्टेपल कपास का एमएसपी 8,667 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। दोनों श्रेणियों में 557 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। अच्छे दाम मिलने से किसानों की आय बढ़ी है और वे अगले सीजन में अधिक क्षेत्र में कपास की खेती करने के लिए उत्साहित हैं।
सरकारी अनुमान के मुताबिक मौजूदा सीजन में कपास का उत्पादन 292 लाख गांठ रहने की संभावना है, जबकि घरेलू मांग 328 लाख गांठ तक पहुंच सकती है। वहीं सीएआई ने 2025-26 सीजन में कुल उत्पादन 334 लाख गांठ रहने का अनुमान जताया है। कपास आयात 47 लाख गांठ तक पहुंच सकता है, जबकि निर्यात 18 लाख गांठ रहने की उम्मीद है।
सीएआई के अनुसार इस सीजन में कपास का सरप्लस बढ़कर 103.59 लाख गांठ हो सकता है और सीजन के अंत में क्लोजिंग स्टॉक 85.59 लाख गांठ रहने का अनुमान है। वास्तविक स्थिति जानने के लिए सीएआई ने स्वतंत्र एजेंसी से सर्वे कराने और स्टॉक आंकड़ों के मिलान हेतु सात सदस्यीय समिति गठित करने का निर्णय लिया है।