कपास उत्पादकता मिशन: 2031 तक आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की ओर बड़ा कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने “कपास उत्पादकता मिशन” (2026–27 से 2030–31) को मंजूरी दी है, जिसके लिए 5659.22 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस मिशन का उद्देश्य कपास क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाना, गुणवत्ता सुधारना और भारत को वैश्विक कपड़ा बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है।
यह पहल सरकार के ‘5F’ विजन—खेत से फाइबर, फाइबर से फैक्ट्री, फैक्ट्री से फैशन और फैशन से विदेश—के अनुरूप है। मिशन के तहत उच्च उत्पादकता वाले, जलवायु-अनुकूल और कीट-प्रतिरोधी बीज विकसित किए जाएंगे। साथ ही, हाई डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम (HDPS), क्लोज स्पेसिंग और एकीकृत कपास प्रबंधन जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा, तथा एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल (ELS) कपास के उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाएगा।
कपास की गुणवत्ता सुधारने के लिए किसानों का प्रशिक्षण, जिनिंग और प्रोसेसिंग इकाइयों का आधुनिकीकरण, तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप परीक्षण अवसंरचना को मजबूत किया जाएगा। “कस्तूरी कॉटन भारत” ब्रांड के माध्यम से भारतीय कपास की वैश्विक पहचान, ट्रेसबिलिटी और विश्वसनीयता को बढ़ाया जाएगा।
इसके अलावा, डिजिटल मंडियों के माध्यम से किसानों को पारदर्शी मूल्य निर्धारण और बेहतर बाजार पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। कपास अपशिष्ट के पुनर्चक्रण और सर्कुलर इकॉनमी को भी बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही, सन (flax), रेमी, सिसल, मिल्कवीड, बांस और केले जैसे वैकल्पिक प्राकृतिक रेशों को शामिल कर फाइबर आधार का विस्तार किया जाएगा।
यह मिशन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और वस्त्र मंत्रालय द्वारा लागू किया जाएगा। इसमें ICAR, CSIR और विभिन्न राज्य कृषि विश्वविद्यालयों की भागीदारी होगी। शुरुआत में 14 राज्यों के 140 जिलों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा और लगभग 2000 जिनिंग इकाइयों को सशक्त किया जाएगा।
मिशन का लक्ष्य 2031 तक कपास की उत्पादकता को 440 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर 755 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर करना और कुल उत्पादन को 498 लाख गांठों तक पहुंचाना है। इससे लगभग 32 लाख किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। यह पहल भारत को कपास क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।