मानसून में देरी और वैश्विक तेजी से कपास कीमतों में उछाल
2026-06-23 11:43:09
मानसून में देरी और वैश्विक तेजी से कपास कीमतों में उछाल
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कपास वायदा कीमतों में मजबूती और देश के प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्रों में मानसून की धीमी प्रगति के कारण भारतीय कपास बाजार में हाल के दिनों में तेजी देखने को मिली है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक संकेतों और बुआई में देरी ने घरेलू कीमतों को सहारा दिया है।
पिछले कुछ दिनों में कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) द्वारा निर्धारित कपास कीमतों में लगभग ₹1,100 प्रति कैंडी (356 किलोग्राम) की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 19 जून तक देश में कपास की बुआई 25 प्रतिशत घटकर 17.13 लाख हेक्टेयर रह गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 22.82 लाख हेक्टेयर थी। मानसून के धीमे आगमन के कारण कई क्षेत्रों में बुआई प्रभावित हुई है।
कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) की क्रॉप कमेटी के चेयरमैन अतुल गनात्रा के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी कीमतों में बढ़ोतरी का प्रमुख कारण है। ICE दिसंबर कॉटन फ्यूचर्स 75 सेंट प्रति पाउंड से बढ़कर लगभग 80 सेंट प्रति पाउंड तक पहुंच गए हैं, जबकि जुलाई फ्यूचर्स करीब 76 सेंट प्रति पाउंड पर कारोबार कर रहे हैं।
अकोला के कपास ब्रोकर अरुण खेतान ने बताया कि विदर्भ जैसे प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्रों में अभी बड़े पैमाने पर बुआई शुरू नहीं हुई है। हालांकि, सिंचाई सुविधाओं वाले कुछ किसानों ने बुआई कर ली है। उन्होंने इस वर्ष कपास के कुल रकबे में लगभग 10 प्रतिशत वृद्धि की संभावना जताई।
रायचूर के सोर्सिंग एजेंट रामानुज दास बूब ने कहा कि मानसून और उत्पादन को लेकर अनिश्चितता के कारण बाजार में मजबूती बनी हुई है। उन्होंने बताया कि कपास की कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन यार्न की कीमतों में उसी अनुपात में वृद्धि नहीं हुई है।
इस बीच, CCI कपास की मांग मजबूत बनी हुई है। पिछले सप्ताह लगभग 7 लाख गांठों की बिक्री हुई। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, अच्छी गुणवत्ता वाले कपास की सीमित उपलब्धता, घटते स्टॉक और स्पिनिंग मिलों की निरंतर खरीदारी से घरेलू बाजार को समर्थन मिल रहा है।