गुजरात–महाराष्ट्र में बारिश की देरी से कपास की फसल पर संकट, किसानों को दोबारा बुवाई का डर
2026-07-18 12:40:02
गुजरात–महाराष्ट्र: बारिश में देरी से कपास की फसल पर संकट, किसानों पर दोबारा बुवाई का खतरा
गुजरात के छोटाउदेपुर जिले के बोदेली तालुका के सेगवा-सिमली गांव और महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के शेवगांव तालुका में समय पर बारिश नहीं होने से कपास उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ गई है। शुरुआती बारिश के बाद किसानों ने कपास की बुवाई पूरी कर ली थी और खेतों में पौधे निकल आए थे। लेकिन पिछले कई दिनों से बारिश नहीं होने के कारण मिट्टी की नमी कम होने लगी है, जिससे फसल की बढ़वार प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
दोनों क्षेत्रों में कपास प्रमुख खरीफ फसल है और बड़ी संख्या में किसान इस पर निर्भर हैं। किसानों ने बीज, उर्वरक, मजदूरी और खेत की तैयारी पर हजारों रुपये खर्च किए हैं। उन्हें उम्मीद थी कि मानसून समय पर आगे बढ़ेगा, लेकिन बारिश रुकने से उनकी चिंता बढ़ गई है। लगातार सूखे मौसम के कारण कई खेतों में कपास के पौधों की वृद्धि धीमी पड़ रही है। कुछ स्थानों पर पौधों के मुरझाने और सूखने की स्थिति भी देखने को मिल रही है।
महाराष्ट्र के शेवगांव तालुका में पिछले 15 दिनों से बारिश नहीं होने के कारण किसानों को दोबारा बुवाई का डर सताने लगा है। किसान यलप्पा कुसलकर ने बताया कि उन्होंने तीन एकड़ में कपास की खेती पर काफी खर्च किया है, लेकिन बारिश के अभाव में फसल प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो किसानों को दोबारा बीज और अन्य कृषि सामग्री खरीदने पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा।
गुजरात के सेगवा-सिमली और आसपास के क्षेत्रों के किसानों का कहना है कि कपास के शुरुआती विकास के लिए मिट्टी में पर्याप्त नमी जरूरी है। बारिश में और देरी होने पर पौधों की वृद्धि रुक सकती है और कुछ खेतों में दोबारा बुवाई की स्थिति बन सकती है। इससे किसानों की लागत बढ़ने के साथ उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों की नियमित निगरानी करें और मौसम की स्थिति के अनुसार कृषि प्रबंधन अपनाएं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द पर्याप्त बारिश हो जाती है, तो कपास की फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है। लेकिन बारिश में अधिक देरी होने पर उत्पादन में कमी और आर्थिक नुकसान की संभावना बढ़ सकती है।
फिलहाल गुजरात और महाराष्ट्र के कपास उत्पादक किसान अच्छी मानसूनी बारिश का इंतजार कर रहे हैं, ताकि फसल को आवश्यक नमी मिल सके और उनकी मेहनत सफल हो सके।