निर्यातकों की मांग: कपास आयात पर शुल्क हटाने की अपील
2026-04-04 11:32:12
टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स ने सरकार से कॉटन इंपोर्ट ड्यूटी माफ करने की अपील की
पुणे: टेक्सटाइल और गारमेंट निर्यातकों ने सरकार से कॉटन पर लगने वाली 11% इंपोर्ट ड्यूटी को अस्थायी रूप से हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि घरेलू कीमतों में हालिया तेजी से उनके मार्जिन घट रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा कमजोर हो रही है।
पिछले महीने स्थानीय कॉटन की कीमतों में 7-8% तक बढ़ोतरी हुई है। इसकी प्रमुख वजह डिमांड में उछाल है, क्योंकि कच्चे तेल की महंगी कीमतों के चलते सिंथेटिक फाइबर महंगे हो गए हैं और मिलें फिर से नेचुरल फाइबर की ओर लौट रही हैं।
इंडस्ट्री ने पिछले साल की तरह ही अस्थायी राहत की मांग की है, जब सरकार ने अगस्त से दिसंबर के बीच कॉटन इंपोर्ट ड्यूटी को हटाकर सप्लाई पर दबाव कम किया था। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक महीने में कॉटन की कीमतें 11-12% तक बढ़ी हैं। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमतों में 12-15% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
निर्यातकों का कहना है कि भारत को विदेशी खरीदारों की मांग के अनुरूप लॉन्ग-स्टेपल और कंटैमिनेशन-फ्री कॉटन के लिए इंपोर्ट पर निर्भर रहना पड़ता है। टेक्सटाइल वैल्यू चेन का करीब 60-70% हिस्सा कॉटन पर आधारित है, इसलिए इंडस्ट्री ने केंद्र सरकार से 3 से 6 महीने के लिए इंपोर्ट ड्यूटी में छूट देने की अपील की है।
उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक घटनाओं के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, जिससे टेक्सटाइल सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले कई कच्चे माल 10% से 60% तक महंगे हो गए हैं। साथ ही सप्लाई चेन भी प्रभावित हुई है। निर्यातकों का कहना है कि वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों को ड्यूटी-फ्री कच्चा माल मिलता है, जिससे वे कीमतों के मामले में बढ़त बनाए हुए हैं।