कर्नाटक में खरीफ बुवाई धीमी, कमजोर मानसून के बीच कपास की बुवाई में तेजी

2026-07-06 13:41:40
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कर्नाटक में खरीफ़ बुवाई सुस्त, लेकिन कपास की बुवाई ने पकड़ी रफ्तार

कर्नाटक में खरीफ़ सीजन की बुवाई इस वर्ष अपेक्षा से धीमी बनी हुई है। कृषि विभाग के 3 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 84.1 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले केवल 36.5 लाख हेक्टेयर में ही बुवाई हुई है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 43% है। यह पिछले वर्ष के इसी समय की तुलना में करीब 28% कम है, हालांकि पांच साल के औसत का लगभग 94% है।

बुवाई में देरी की मुख्य वजह राज्य के कई हिस्सों में मॉनसून का देर से पहुंचना और सामान्य से कम बारिश रहना है। इसका सबसे अधिक असर अनाज और दलहन फसलों पर पड़ा है, जबकि सिंचित क्षेत्रों में कपास और अन्य नकदी फसलों की बुवाई तेज़ी से बढ़ी है।

जिलेवार आंकड़ों के अनुसार, चिक्कबल्लापुर में सामान्य बुवाई क्षेत्र का केवल 9% हिस्सा ही कवर हो पाया है। इसके बाद बेंगलुरु ग्रामीण (24%) और कोलार जैसे जिलों में भी बुवाई काफी पीछे है। दूसरी ओर, उत्तरी कर्नाटक के सिंचित क्षेत्रों में स्थिति बेहतर है। रायचूर सामान्य क्षेत्रफल के 157% के साथ सबसे आगे है, जबकि यादगीर, हावेरी, धारवाड़ और गदग में भी बुवाई सामान्य से अधिक दर्ज की गई है।

फसलवार स्थिति देखें तो अनाज की बुवाई लक्ष्य का केवल 27% और दलहन की 44% ही पूरी हुई है। मक्का की बुवाई अपेक्षाकृत बेहतर रही है और यह सामान्य स्तर के 86% तक पहुंच चुकी है। तिलहनों में सूरजमुखी की बुवाई पांच साल के औसत के 130% पर है, जबकि मूंगफली अभी भी सामान्य से पीछे चल रही है।

सबसे बेहतर प्रदर्शन वाणिज्यिक फसलों का रहा है। इनकी बुवाई सामान्य स्तर के 121% तक पहुंच चुकी है, जबकि कपास की बुवाई पांच वर्षीय औसत के 141% पर दर्ज की गई है। इससे संकेत मिलता है कि बारिश की अनिश्चितता के बीच किसान सिंचाई उपलब्ध होने पर नकदी फसलों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जुलाई में भी सामान्य से कम बारिश होती है, तो राज्य में खरीफ़ फसलों पर दबाव बढ़ सकता है और कई क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति बनने की आशंका रहेगी।


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