खंडेश में घटी कपास की खेती, किसान मक्का और सोयाबीन की ओर बढ़े
2026-07-14 12:20:26
महाराष्ट्र के खानदेश में कपास का रकबा घटा, मक्का और सोयाबीन की ओर बढ़ा किसानों का रुझान
जलगांव/महाराष्ट्र: खरीफ सीजन में महाराष्ट्र के खानदेश क्षेत्र में इस साल खेती के पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर खरीफ फसलों की बुवाई करीब 81 प्रतिशत पूरी हो चुकी है, वहीं दूसरी ओर कपास की खेती का रकबा लगातार घट रहा है। कपास की बढ़ती लागत, बाजार में कमजोर भाव और कीटों के बढ़ते प्रकोप के कारण किसान अब मक्का, सोयाबीन और अरहर (तूर) जैसी वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ रहे हैं।
खासकर जलगांव जिले में कपास की खेती का क्षेत्र पिछले सीजन की तुलना में करीब 25,000 हेक्टेयर कम हुआ है। वर्ष 2024-25 में जिले में कपास की खेती लगभग 5.11 लाख हेक्टेयर में की गई थी, जबकि इस साल यह घटकर करीब 4.55 लाख हेक्टेयर रह गई है।
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, खानदेश के अन्य जिलों में भी कपास का रकबा कम हुआ है। धुले जिले में इस वर्ष कपास की खेती करीब 1.75 लाख हेक्टेयर में हो रही है, जबकि पिछले सीजन में यह क्षेत्र लगभग 2 लाख हेक्टेयर था। वहीं, नंदुरबार जिले में कपास का रकबा घटकर करीब 85,000 हेक्टेयर रह गया है, जो पिछले साल 97,000 हेक्टेयर से अधिक था।
किसानों के अनुसार, कपास की खेती में खर्च लगातार बढ़ रहा है, लेकिन उत्पादन के मुकाबले बाजार भाव संतोषजनक नहीं मिल रहे हैं। मजदूरी, खाद, बीज और कीटनाशकों की बढ़ती कीमतों ने किसानों की लागत बढ़ा दी है। इसके अलावा, गुलाबी सुंडी (पिंक बॉलवर्म) के प्रकोप और मौसम में बदलाव ने भी कपास उत्पादकों की चिंता बढ़ाई है।
मॉनसून की बारिश में देरी ने भी कई किसानों को वैकल्पिक फसलों की ओर जाने के लिए मजबूर किया है। इस बदलाव का असर मक्का और अन्य खरीफ फसलों के क्षेत्रफल में वृद्धि के रूप में दिखाई दे रहा है। अकेले जलगांव जिले में मक्का की खेती का रकबा करीब 10,000 हेक्टेयर बढ़ा है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इस वर्ष पूरे खानदेश क्षेत्र में कपास का कुल रकबा 8 लाख हेक्टेयर से कम रह सकता है। किसानों का फसल चयन अब लागत, जोखिम और बाजार की संभावनाओं को ध्यान में रखकर बदल रहा है।