महाराष्ट्र ने खरीफ 2026 के लिए मराठवाड़ा के तीन जिलों में कपास उत्पादकता बढ़ाने का लक्ष्य तय किया
2026-07-13 11:37:27
महाराष्ट्र: मराठवाड़ा के तीन जिलों में खरीफ 2026 के लिए कपास की उत्पादकता बढ़ाने का लक्ष्य
महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के छत्रपति संभाजीनगर, जालना और बीड जिलों में खरीफ 2026 सीजन के लिए कृषि विभाग ने कपास (रुई) की औसत उत्पादकता 3.69 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रखने का लक्ष्य प्रस्तावित किया है। विभाग का अनुमान है कि आधुनिक कृषि तकनीकों और बेहतर फसल प्रबंधन के जरिए इस वर्ष प्रमुख खरीफ फसलों की पैदावार में सुधार किया जा सकता है। इसी योजना के तहत सोयाबीन की औसत उत्पादकता 16.06 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रहने का भी अनुमान लगाया गया है।
कृषि विभाग के अनुसार, इन तीनों जिलों में खरीफ सीजन के दौरान 21.35 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। हालांकि, मानसून की धीमी शुरुआत के कारण 7 जुलाई तक केवल 11.64 लाख हेक्टेयर में ही बुआई पूरी हो सकी थी। पिछले वर्ष इसी अवधि तक 18.40 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। प्रस्तावित क्षेत्र में छत्रपति संभाजीनगर का 6.17 लाख हेक्टेयर, जालना का 6.46 लाख हेक्टेयर और बीड का 7.92 लाख हेक्टेयर शामिल है।
पिछले खरीफ सीजन (2025) में कपास की औसत उत्पादकता 3.33 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई थी। वहीं, सोयाबीन की उत्पादकता 14.42 क्विंटल, मक्का 25.11 क्विंटल, अरहर 11.51 क्विंटल और उड़द 8.66 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही थी। कृषि विभाग को उम्मीद है कि बेहतर बीज, संतुलित उर्वरक उपयोग और वैज्ञानिक खेती अपनाने से इस वर्ष उत्पादन में बढ़ोतरी होगी।
छत्रपति संभाजीनगर कृषि मंडल के अंतर्गत तीन जिले, 28 तालुके और 3,751 गांव आते हैं। इस मंडल का कुल भौगोलिक क्षेत्र 28.48 लाख हेक्टेयर है, जबकि 23.76 लाख हेक्टेयर भूमि खेती योग्य है। यहां लगभग 21.77 लाख किसान कृषि कार्य से जुड़े हैं।
हालांकि, मौसम इस सीजन की सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। मानसून में देरी, कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश और एल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए कृषि विभाग किसानों को समय पर बीज, उर्वरक और वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराने पर जोर दे रहा है। विभाग का मानना है कि मौसम अनुकूल रहने पर इस वर्ष खरीफ फसलों की उत्पादकता में सुधार संभव है।