महाराष्ट्र के 19 जिलों में लागू होगी ‘कपास क्रांति’ योजना
2026-06-02 16:12:30
महाराष्ट्र के 19 जिलों में ‘कपास क्रांति’ योजना लागू, ₹191 करोड़ का प्रावधान
मुंबई: देश में कपास उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने महत्वाकांक्षी ‘कपास क्रांति’ (Cotton Revolution) योजना लागू करने का निर्णय लिया है। महाराष्ट्र के उत्तरी महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ क्षेत्र के 19 प्रमुख कपास उत्पादक जिलों को इस योजना का लाभ मिलेगा। राज्य में इसके लिए ₹191 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
यह पहल केंद्र सरकार के ‘कपास उत्पादकता मिशन’ के अंतर्गत शुरू की जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य कपास खेती से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करना और किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। योजना का क्रियान्वयन वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक किया जाएगा। इस दौरान देशभर में लगभग ₹5,659.22 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
योजना के तहत किसानों को अधिक उपज देने वाली, जलवायु-अनुकूल तथा कीट-प्रतिरोधी बीज किस्मों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अलावा हाई-डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम (HDPS), क्लोज़र स्पेसिंग (CS) और एकीकृत कपास प्रबंधन जैसी आधुनिक कृषि तकनीकों को व्यापक स्तर पर अपनाने पर जोर दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इन उपायों से प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
‘कपास क्रांति’ योजना के अंतर्गत एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल (ELS) कपास के उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ जिनिंग और प्रसंस्करण इकाइयों के आधुनिकीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे कपास की गुणवत्ता में सुधार होगा और भारतीय कपास की वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी।
भारतीय कपास को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च गुणवत्ता और टिकाऊ उत्पाद के रूप में स्थापित करने के लिए ‘कस्तूरी कॉटन भारत’ ब्रांड के तहत विशेष प्रचार अभियान भी चलाया जाएगा। यह अभियान देश के 14 राज्यों के 140 जिलों में संचालित होगा।
राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरने ने कहा कि HDPS पद्धति में अधिक पानी की आवश्यकता को देखते हुए सरकार कपास किसानों को सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों पर अतिरिक्त सब्सिडी देने की संभावना पर विचार कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना से महाराष्ट्र के कपास उत्पादक क्षेत्रों में उत्पादन, उत्पादकता और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।