महाराष्ट्र में खरीफ बुआई पर संकट: मारेगांव और धारुर के किसानों की बढ़ी चिंता, बारिश नहीं हुई तो दोबारा बुआई का खतरा
महाराष्ट्र के कई हिस्सों में खरीफ सीजन की शुरुआत किसानों के लिए चिंता का कारण बन गई है। विशेष रूप से मारेगांव और धारुर तालुकों में शुरुआती बारिश के भरोसे कपास, सोयाबीन और अन्य खरीफ फसलों की बुआई करने वाले किसान अब पर्याप्त बारिश न होने से मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो कई क्षेत्रों में दोबारा बुआई (डबल बुवाई) की नौबत आ सकती है।
मृग नक्षत्र की शुरुआत में हुई हल्की बारिश के बाद किसानों ने बड़े पैमाने पर खेतों में बुआई शुरू कर दी थी। मारेगांव में करीब 50 से 60 प्रतिशत किसानों ने कपास की बुआई पूरी कर ली है, जबकि धारुर तालुका में अब तक लगभग 17 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई हो चुकी है। धारुर में इस वर्ष कुल 41 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ बुआई होने का अनुमान है, जिसमें कपास और सोयाबीन प्रमुख फसलें हैं।
किसानों को उम्मीद थी कि शुरुआती बारिश के बाद मानसून नियमित रूप से सक्रिय रहेगा, लेकिन बुआई के बाद लगातार पर्याप्त वर्षा नहीं होने से खेतों की नमी तेजी से कम हो रही है। कई जगहों पर बीजों का अंकुरण प्रभावित हो रहा है, जबकि जहां पौधे निकल आए हैं वहां भी उन्हें जीवित रहने के लिए तत्काल पानी की आवश्यकता है। बढ़ती गर्मी और सूखती मिट्टी ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है।
मारेगांव में सिंचाई सुविधाएं सीमित होने के कारण अधिकांश खेती पूरी तरह वर्षा पर निर्भर है। ऐसे में यदि बारिश में और देरी होती है, तो मिट्टी में मौजूद नमी खत्म होने से बीज खराब हो सकते हैं और किसानों को दोबारा बुआई करनी पड़ सकती है। धारुर में भी मुरमाड और हल्की मिट्टी वाले क्षेत्रों में फसलों पर सबसे अधिक संकट मंडरा रहा है। कृषि अधिकारियों के अनुसार, जिन खेतों में अभी कुछ नमी बची है वहां फसलें कुछ दिन और टिक सकती हैं, लेकिन यदि तीन से चार दिनों तक बारिश नहीं हुई तो दोहरी बुआई का खतरा बढ़ जाएगा।
इस स्थिति ने किसानों पर आर्थिक दबाव भी बढ़ा दिया है। महंगे बीज, रासायनिक खाद और बढ़ती खेती लागत के बीच किसानों ने बेहतर उत्पादन की उम्मीद में समय रहते बुआई की थी। लेकिन अब अनिश्चित मानसून उनकी उम्मीदों पर पानी फेरता नजर आ रहा है। पिछले वर्ष जहां अत्यधिक बारिश और फसल नुकसान किसानों के लिए बड़ी चुनौती थी, वहीं इस साल कम बारिश और नमी की कमी नया संकट बनकर सामने आई है।
धारुर के तालुका कृषि अधिकारी जनार्दन भगत ने बताया कि मृग नक्षत्र में हुई सीमित बारिश के कारण किसानों ने जल्दबाजी में बुआई की। वर्तमान हालात में यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं होती है, तो कई क्षेत्रों में दोबारा बुआई की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में दोनों तालुकों के किसानों की निगाहें अब मानसून की अगली बारिश पर टिकी हुई हैं।