नासिक डिवीजन में तेज हुई कपास की बुवाई, 1.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुआ रोपण
नासिक: मानसून के दोबारा सक्रिय होने के साथ ही नासिक डिवीजन में खरीफ सीजन की गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ ली है। पिछले तीन-चार दिनों में हुई अच्छी बारिश के कारण किसानों ने कपास की बुवाई तेज कर दी है। इससे उन किसानों को बड़ी राहत मिली है जो पर्याप्त वर्षा का इंतजार कर रहे थे और खरीफ फसलों की बुवाई शुरू नहीं कर पा रहे थे।
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, नासिक डिवीजन में अब तक लगभग 1.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई पूरी हो चुकी है। यह इस वर्ष कपास के लिए निर्धारित 10.9 लाख हेक्टेयर लक्ष्य का करीब 14 प्रतिशत है। अधिकारियों का कहना है कि हालिया बारिश से मिट्टी में पर्याप्त नमी बनी है, जिससे खेतों में बुवाई का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।
डिवीजन के जिलों में जलगांव कपास बुवाई के मामले में सबसे आगे है। यहां अब तक 83,753 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास बोई जा चुकी है। इसके बाद धुले में 45,227 हेक्टेयर और अहिल्यानगर में 8,830 हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई दर्ज की गई है। नासिक और नंदुरबार जिलों में भी बुवाई का काम जारी है और मौसम अनुकूल रहने पर इसमें और तेजी आने की उम्मीद है।
नासिक डिवीजन में कपास प्रमुख खरीफ फसल मानी जाती है। यह कुल बुवाई क्षेत्र का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा कवर करती है और करीब 20 लाख किसान प्रत्यक्ष रूप से इसकी खेती से जुड़े हुए हैं। कपास के अलावा इस क्षेत्र में मक्का, सोयाबीन, मूंग, उड़द, बाजरा, अरहर (तूर) और धान जैसी फसलों की भी खेती की जाती है।
कृषि विभाग के अनुमान के मुताबिक, इस सीजन में जलगांव में 5.5 लाख हेक्टेयर, धुले में 2.2 लाख हेक्टेयर, अहिल्यानगर में 1.6 लाख हेक्टेयर, नंदुरबार में 1.3 लाख हेक्टेयर और नासिक में लगभग 39 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती की जाएगी।
हालांकि बुवाई की शुरुआत सकारात्मक रही है, लेकिन कृषि अधिकारियों ने किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि बुवाई तभी करें जब खेतों में लगातार नमी बनी रहने की संभावना हो, ताकि बीजों का अंकुरण बेहतर हो सके।
इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने नासिक के लिए येलो अलर्ट जारी किया है और आने वाले दिनों में हल्की से मध्यम बारिश का अनुमान जताया है। मौसम विभाग के अनुसार, जलगांव, धुले और नंदुरबार में भी रविवार तक वर्षा की संभावना बनी रहेगी। लगातार बारिश और तापमान में आई गिरावट ने खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा की हैं। किसानों को उम्मीद है कि मानसून की यह सक्रियता खरीफ सीजन को मजबूत आधार प्रदान करेगी।