अनियमित बारिश से पाचोरा में कपास, मक्का और सोयाबीन की फसल संकट में, किसान चिंतित
2026-07-16 16:53:06
पाचोरा में कपास, मक्का और सोयाबीन की फसलें संकट में, बारिश की अनिश्चितता से किसान परेशान
पाचोरा (महाराष्ट्र), 16 जुलाई: महाराष्ट्र के जलगांव जिले के पाचोरा तालुका में बारिश की अनिश्चितता से कपास, मक्का और सोयाबीन की फसलें प्रभावित हो रही हैं। मृग नक्षत्र की शुरुआत में हुई बारिश के बाद लंबे समय तक बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों को फसलों की वृद्धि रुकने और उत्पादन में बड़ी गिरावट की आशंका है।
पाचोरा तालुका में कपास प्रमुख नकदी फसल है। कई किसानों ने मई के मध्य से जून की शुरुआत के बीच उम्मीद के साथ कपास की बुआई की थी। हालांकि, शुरुआती बारिश के बाद बारिश का लंबा अंतराल पड़ने से फसलों की वृद्धि प्रभावित हुई है। कपास के अलावा मक्का और सोयाबीन की फसलें भी बारिश की कमी से प्रभावित हो रही हैं।
तालुका में सालाना औसत बारिश 743.47 मिलीमीटर है। पिछले साल यहां सामान्य से करीब 125% बारिश दर्ज की गई थी। इसके विपरीत, इस साल जुलाई की शुरुआत तक केवल 161.6 मिलीमीटर बारिश हुई है। कम बारिश के कारण तालुका की नदियों और नहरों में अभी तक पर्याप्त पानी नहीं आया है।
जलस्रोतों में पानी की कमी का सीधा असर सिंचाई पर पड़ा है। कई कुएं सूख गए हैं। खेतों में ड्रिप इरिगेशन की सुविधा होने के बावजूद, कुओं में पानी नहीं होने के कारण किसान कपास की फसल को पर्याप्त सिंचाई नहीं दे पा रहे हैं। बारिश की कमी से खेतों की मेड़ों पर उगने वाली घास भी सूखने लगी है और कई फसलें मुरझाने की स्थिति में पहुंच गई हैं।
हालांकि, कुछ क्षेत्रों में हुई बारिश से किसानों को थोड़ी राहत मिली है और कृषि गतिविधियों में तेजी आई है। किसान निराई-गुड़ाई, रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल और कीटनाशकों के छिड़काव जैसे कामों में व्यस्त हैं।
इन गतिविधियों से ग्रामीण क्षेत्रों में खेतिहर मजदूरों को भी रोजगार मिल रहा है। फिलहाल, महिला मजदूरों को सुबह 8 बजे से दोपहर 1 बजे तक काम के लिए करीब 300 रुपये, जबकि पुरुष मजदूरों को लगभग 500 रुपये प्रतिदिन मजदूरी मिल रही है।
किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त और नियमित बारिश नहीं हुई, तो कपास, मक्का और सोयाबीन की फसलों पर गंभीर असर पड़ सकता है।