सूती व पॉलिस्टर धागे की कीमतों में बढ़ोतरी से बुनकरों पर दबाव
मानपुर (बिहार)- सूती और पॉलिस्टर धागों की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी ने टेक्सटाइल उद्योग, खासकर बुनकर समुदाय, के सामने गंभीर आर्थिक चुनौती खड़ी कर दी है। सूती धागे के दाम में लगभग 15% और पॉलिस्टर धागे में करीब 50% तक की वृद्धि ने उत्पादन लागत को काफी बढ़ा दिया है, जिससे छोटे और मध्यम बुनकरों पर सीधा असर पड़ रहा है।
स्थिति और जटिल इसलिए हो गई है क्योंकि बढ़ती लागत के बावजूद तैयार कपड़ों की कीमतों में समान अनुपात में वृद्धि करना संभव नहीं है। नतीजतन, बुनकरों का मुनाफा लगातार घटता जा रहा है और कई इकाइयाँ आर्थिक दबाव झेल रही हैं।
इस संकट को देखते हुए बुनकर संगठनों ने राज्य सरकार से सूती धागे पर 15% सब्सिडी देने की मांग की है, ताकि उन्हें तत्काल राहत मिल सके और उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता बनी रहे।
बुनकर प्रतिनिधियों का कहना है कि कच्चे माल की कीमतों में यह असामान्य वृद्धि पूरे उद्योग के लिए चिंताजनक है। उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार से स्पष्ट और प्रभावी रणनीति पेश करने की मांग की है, जिससे इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, बिहार में बुनकरी केवल एक पारंपरिक कला ही नहीं, बल्कि कृषि के बाद रोजगार का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ के रूप में काम करता है। यदि कच्चे माल की कीमतों में लगातार वृद्धि जारी रही, तो इससे लाखों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है और सूती वस्त्र उद्योग की स्थिरता तथा लाभप्रदता पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।