कमज़ोर मॉनसून से दाल, सोयाबीन और कपास की फसल पर संकट
2026-04-15 11:51:53
कमज़ोर मॉनसून: दाल, सोयाबीन, कपास प्रभावित
कमज़ोर मॉनसून का असर इस साल दालें, सोयाबीन और कपास जैसी फसलों पर सबसे ज्यादा पड़ने की आशंका है, जबकि बेहतर सिंचाई व्यवस्था के चलते चावल अपेक्षाकृत सुरक्षित नजर आ रहा है।
मनीकंट्रोल के विश्लेषण के मुताबिक, 2026 में सामान्य से कम मॉनसून का पूर्वानुमान उन फसलों के लिए ज्यादा खतरा पैदा करता है, जिनकी खेती मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर क्षेत्रों में होती है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 13 अप्रैल को मॉनसून वर्षा का अनुमान दीर्घकालिक औसत (LPA) का 92% लगाया है, जो करीब 26 वर्षों में सबसे कमजोर शुरुआती अनुमान है। इससे बुवाई, उत्पादन और ग्रामीण मांग प्रभावित हो सकती है, साथ ही खाद्य महंगाई पर भी दबाव बढ़ने का जोखिम है।
हालांकि अभी जलाशयों का जलस्तर संतोषजनक है और 2 अप्रैल तक भंडारण सामान्य से 27% अधिक दर्ज किया गया, लेकिन कम बारिश आगे चलकर जल-पुनर्भरण और रबी फसलों के लिए पानी की उपलब्धता को प्रभावित कर सकती है। सिंचित राज्यों में भी जोखिम बना रहेगा, लेकिन सबसे ज्यादा चुनौती उन इलाकों के लिए है जो पूरी तरह मॉनसून पर निर्भर हैं।
फसलों में सोयाबीन सबसे ज्यादा जोखिम में दिखाई दे रही है। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश मिलकर देश के 83.6% उत्पादन का योगदान देते हैं, लेकिन खासकर महाराष्ट्र में सिंचाई का स्तर राष्ट्रीय औसत से काफी कम है, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है।
कपास की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश मिलकर करीब 66% उत्पादन करते हैं। महाराष्ट्र में कम सिंचाई कवरेज इसे अधिक संवेदनशील बनाता है, जबकि गुजरात में बेहतर सिंचाई व्यवस्था कुछ राहत देती है।
कमज़ोर मॉनसून का असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। ICRA Ltd की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर के अनुसार, कमजोर मॉनसून और पश्चिम एशिया में तनाव मिलकर महंगाई को बढ़ा सकते हैं और आर्थिक वृद्धि को प्रभावित कर सकते हैं। उनका अनुमान है कि FY27 में औसत CPI महंगाई 4.5% से ऊपर रह सकती है।
वहीं CareEdge की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा का मानना है कि महंगाई दर करीब 4.6% रह सकती है। बढ़ती तेल कीमतें और एल नीनो जैसे मौसमी कारक इस पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं।
कुल मिलाकर, 2026 का संभावित कमजोर मॉनसून वर्षा-आधारित कृषि और महंगाई—दोनों के लिए बड़ा जोखिम बनकर उभर रहा है।