पश्चिम एशिया संघर्ष का असर: भीलवाड़ा कपड़ा उद्योग के ₹1000 करोड़ तक के निर्यात पर संकट
भीलवाड़ा (राजस्थान), 12 मार्च: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब राजस्थान के प्रमुख टेक्सटाइल हब भीलवाड़ा पर साफ दिखाई देने लगा है। व्यापारिक बाधाओं और अनिश्चितता के चलते करीब ₹800 से ₹1000 करोड़ तक के कपड़ा निर्यात पर असर पड़ा है, जबकि कई एक्सपोर्ट ऑर्डर फिलहाल होल्ड पर हैं।
भीलवाड़ा, जिसे देश की ‘टेक्सटाइल सिटी’ के रूप में जाना जाता है, में 450 से अधिक कपड़ा इकाइयाँ, 20 से ज्यादा स्पिनिंग यूनिट्स, 21 प्रोसेसिंग यूनिट्स और 5 से अधिक डेनिम उद्योग संचालित हैं। यहां हर महीने लगभग 10 करोड़ मीटर कपड़े का उत्पादन होता है और करीब 2 लाख लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है।
मेवाड़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के महासचिव आर.के. जैन के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण निर्यात गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि कई शिपमेंट या तो स्थानीय स्तर पर अटके हुए हैं या बंदरगाहों पर रुके हैं, जबकि विदेशी खरीदारों ने अनिश्चित स्थिति के चलते कुछ ऑर्डर अस्थायी रूप से रोक दिए हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह भू-राजनीतिक स्थिति लंबी चली, तो भीलवाड़ा के कपड़ा उद्योग को गंभीर नुकसान उठाना पड़ सकता है, खासकर निर्यात और उत्पादन दोनों मोर्चों पर।
खाड़ी देश और यूरोप भीलवाड़ा के प्रमुख निर्यात बाजार हैं। यहां से धागा बांग्लादेश और यूरोप भेजा जाता है, जबकि तैयार कपड़ा मुख्य रूप से खाड़ी देशों और यूरोपीय बाजारों में निर्यात होता है। हालांकि, वर्तमान संघर्ष के कारण व्यापार मार्गों में व्यवधान आया है, जिससे निर्यात की गति धीमी पड़ गई है और उद्योग में चिंता का माहौल बना हुआ है।