शीर्षक: सीएआई: ईएलएस कपास पर शून्य शुल्क से टेक्सटाइल निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
2026-02-10 00:42:44
सीएआई का बयान: ईएलएस कपास पर शून्य शुल्क से बढ़ेगा भारत का टेक्सटाइल निर्यात
व्यापार निकाय कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएआई) ने कहा है कि अतिरिक्त लंबे स्टेपल (ELS) कपास को पहली अनुसूची में शामिल कर सीमा शुल्क को शून्य करने के सरकार के फैसले से भारत के उच्च मूल्य वाले वस्त्र और परिधान निर्यात को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा।
सीएआई के अध्यक्ष विनय एन. कोटक ने बताया कि बजट 2026-27 को विकास और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाना और दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में मजबूत स्थिति दिलाना है।
उन्होंने कहा कि सीमा शुल्क व्यवस्था में यह बड़ा बदलाव उत्पादन को बढ़ावा देने और उद्योग को राहत देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ELS कपास पर शून्य शुल्क लागू होने से तैयार वस्त्रों के निर्यात में वृद्धि होगी और वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी मजबूत होगी।
भारत हर साल लगभग 5 से 7 लाख गांठ ELS कपास का आयात मुख्य रूप से अमेरिका और मिस्र से करता है, क्योंकि देश में इसका उत्पादन सीमित है। इस पर से आयात शुल्क हटने से कच्चे माल की लागत कम होगी और उच्च गुणवत्ता वाले फाइबर की उपलब्धता आसान होगी, जिससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी।
ELS कपास (33 मिमी या उससे अधिक फाइबर लंबाई वाला कपास) का उपयोग प्रीमियम यार्न, उच्च गुणवत्ता वाले कपड़े और परिधानों के निर्माण में किया जाता है। घरेलू उत्पादन सीमित होने के कारण उद्योग आयात पर निर्भर रहता है।
भारत में ELS कपास की खेती लगभग 2 लाख हेक्टेयर में होती है, मुख्य रूप से कर्नाटक के धारवाड़, हावेरी और मैसूरु जिलों, तमिलनाडु के कोयंबटूर, इरोड और डिंडीगुल तथा मध्य प्रदेश के रतलाम क्षेत्रों में इसकी खेती की जाती है।