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ग्लोबल मार्केट में गिरती हिस्सेदारी के बावजूद कॉटन की पकड़ बरकरार

2026-03-12 16:06:13
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ग्लोबल फाइबर मार्केट में हिस्सेदारी घटने के बावजूद कॉटन रहेगा मुख्य फाइबर


वैश्विक फाइबर खपत में हिस्सेदारी घटने के बावजूद कॉटन टेक्सटाइल उद्योग में अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आरामदायक, हवादार और प्राकृतिक गुणों के कारण कॉटन की मांग कई क्षेत्रों में स्थिर बनी रहेगी।


International Cotton Advisory Council (ICAC) की वर्ल्ड टेक्सटाइल डिमांड रिपोर्ट के अनुसार, हाल के वर्षों में ग्लोबल फाइबर खपत में कॉटन का बाजार हिस्सा 25% से नीचे आ गया है, जबकि 2000 के दशक की शुरुआत में यह लगभग 40% था।


United States Department of Agriculture (USDA) के मुताबिक, कपड़ों और होम टेक्सटाइल की रिकॉर्ड मांग के बावजूद कॉटन उत्पादों के आयात में अपेक्षित वृद्धि नहीं देखी गई है। इसका मुख्य कारण मैन-मेड फाइबर (MMF) से बढ़ती प्रतिस्पर्धा है, विशेष रूप से चीन से बड़े पैमाने पर होने वाले निर्यात के कारण।


Indian Texpreneurs Federation (ITF) के कन्वीनर Prabhu Damodaran के अनुसार, कॉटन की हिस्सेदारी में गिरावट एक धीमी लेकिन संरचनात्मक प्रक्रिया है। इसके पीछे प्रमुख कारण हैं—पॉलिएस्टर जैसे सिंथेटिक फाइबर की कम लागत और विस्कोस जैसे वैकल्पिक फाइबर की बेहतर कार्यक्षमता।

All India Cotton Brokers Association के वाइस-प्रेसिडेंट Ramanuj Das Boob का कहना है कि समस्या कॉटन की मांग में कमी नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धी फाइबर की तेजी से बढ़ती मांग है। आज टेक्सटाइल उद्योग में कॉटन के साथ पॉलिएस्टर, इलास्टेन, विस्कोस और लाइक्रा जैसे फाइबर के ब्लेंडेड फैब्रिक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कॉटन कपड़ों और होम टेक्सटाइल में अपनी अहम भूमिका बनाए रखेगा, हालांकि इसकी वृद्धि दर सिंथेटिक फाइबर की तुलना में धीमी रह सकती है। वैश्विक स्तर पर ब्लेंडेड यार्न की मांग बढ़ रही है और स्पिनिंग मिलें तेजी से पॉली-कॉटन यार्न का उत्पादन कर रही हैं।


भारत के संदर्भ में, कॉटन की प्रति हेक्टेयर उत्पादकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है। प्रभु दामोदरन के अनुसार, अधिक उत्पादकता से किसानों की आय बढ़ेगी और कॉटन की कीमतें प्रतिस्पर्धी बनी रहेंगी, जिससे यह अन्य फाइबर के साथ बेहतर प्रतिस्पर्धा कर सकेगा।


रामनुज दास बूब का मानना है कि भविष्य में एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल (ELS), कंटैमिनेशन-फ्री, सस्टेनेबल और ऑर्गेनिक कॉटन की मांग बढ़ेगी, जिससे प्रीमियम सेगमेंट मजबूत रहेगा।


वहीं, राजकोट के ट्रेडर Anand Popat के अनुसार, बाजार में सट्टेबाजी के कारण कॉटन की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, जिससे प्राकृतिक फाइबर का मार्केट शेयर प्रभावित हुआ है।


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