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ट्रंप काल में भारत–अमेरिका कपास व्यापार में उछाल, आयात पैटर्न में बदलाव

2026-02-14 18:27:19
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ट्रंप काल में भारत–अमेरिका कपास व्यापार में तेज़ी, आयात निर्भरता में बड़ा बदलाव


नई दिल्ली: व्यापार डेटा के विश्लेषण के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान भारत और अमेरिका के बीच कपास व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई थी। इस दौरान भारत, अमेरिका के लिए कच्चे कपास के प्रमुख आयातकों में से एक के रूप में उभरा।


ट्रंप प्रशासन की शुरुआत के समय 2014 में अमेरिकी कपास निर्यात में भारत की हिस्सेदारी लगभग 1.5% थी, जो 2016 तक बढ़कर 4.7% हो गई। यह रुझान आगे भी जारी रहा और 2017 में हिस्सेदारी 6% तथा 2019 तक बढ़कर 7.7% तक पहुंच गई।


हालांकि, कोविड-19 महामारी के बाद आए व्यवधानों के कारण यह हिस्सेदारी घटकर लगभग 3% के स्तर पर आ गई और हाल के वर्षों में इसी के आसपास स्थिर बनी हुई है।


भारत की आयात निर्भरता में उतार-चढ़ाव
भारत के कुल कपास आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी में भी इसी तरह का बदलाव देखा गया। 2017 में यह हिस्सेदारी बढ़कर 47.9% और 2018 में 53.2% तक पहुंच गई थी। बाद में सोर्सिंग में विविधता आने के कारण यह घटती गई और 2024 तक लगभग 19.3% रह गई।

इसके बावजूद, अमेरिका अब भी भारत के लिए कपास का एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। 2024 में भारत, अमेरिकी कच्चे कपास का सातवां सबसे बड़ा आयातक रहा, जिसने लगभग 209 मिलियन डॉलर मूल्य का आयात किया। उस वर्ष चीन, पाकिस्तान और वियतनाम प्रमुख खरीदारों में शामिल थे।


व्यापार समझौतों से फिर बदल सकते हैं रुझान

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रस्तावित भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता लागू होने पर कपास व्यापार प्रवाह में फिर से बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, भारतीय टेक्सटाइल निर्यातकों को अमेरिकी कपास से बने उत्पादों पर शून्य-पारस्परिक-शुल्क (zero-reciprocal tariff) का लाभ मिल सकता है, जिससे अमेरिकी कपास की मांग बढ़ सकती है।


वैश्विक प्रतिस्पर्धा का असर

यह पूरा घटनाक्रम बांग्लादेश जैसे देशों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच सामने आया है, जिसने अमेरिकी बाजार तक बेहतर पहुंच हासिल की है और अमेरिकी कपास के प्रमुख आयातकों में अपनी स्थिति मजबूत की है।


विश्लेषणों के अनुसार, यदि बांग्लादेश को अधिक अनुकूल व्यापार शर्तें मिलती हैं, तो भारत के कपास एवं टेक्सटाइल व्यापार का लगभग एक-चौथाई हिस्सा—करीब 1.5 अरब डॉलर—प्रतिस्पर्धी दबाव में आ सकता है।


ऐसे में आने वाली भारत–अमेरिका व्यापार वार्ताएं भविष्य के कपास व्यापार पैटर्न को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।


और पढ़ें :- जिनिंग उद्योग पर संकट, प्रदीप जैन का अलर्ट


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