इसके बावजूद, अमेरिका अब भी भारत के लिए कपास का एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। 2024 में भारत, अमेरिकी कच्चे कपास का सातवां सबसे बड़ा आयातक रहा, जिसने लगभग 209 मिलियन डॉलर मूल्य का आयात किया। उस वर्ष चीन, पाकिस्तान और वियतनाम प्रमुख खरीदारों में शामिल थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रस्तावित भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता लागू होने पर कपास व्यापार प्रवाह में फिर से बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, भारतीय टेक्सटाइल निर्यातकों को अमेरिकी कपास से बने उत्पादों पर शून्य-पारस्परिक-शुल्क (zero-reciprocal tariff) का लाभ मिल सकता है, जिससे अमेरिकी कपास की मांग बढ़ सकती है।
यह पूरा घटनाक्रम बांग्लादेश जैसे देशों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच सामने आया है, जिसने अमेरिकी बाजार तक बेहतर पहुंच हासिल की है और अमेरिकी कपास के प्रमुख आयातकों में अपनी स्थिति मजबूत की है।
विश्लेषणों के अनुसार, यदि बांग्लादेश को अधिक अनुकूल व्यापार शर्तें मिलती हैं, तो भारत के कपास एवं टेक्सटाइल व्यापार का लगभग एक-चौथाई हिस्सा—करीब 1.5 अरब डॉलर—प्रतिस्पर्धी दबाव में आ सकता है।
ऐसे में आने वाली भारत–अमेरिका व्यापार वार्ताएं भविष्य के कपास व्यापार पैटर्न को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
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