हालांकि CCI ने खरीद की अंतिम तारीख 28 फरवरी से बढ़ाकर 15 मार्च कर दी, लेकिन इसका लाभ अधिकांश किसानों तक नहीं पहुंच पाया। कई किसानों ने ऊंचे दाम की उम्मीद में कपास का भंडारण किया था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट ने उनकी उम्मीदों को भी झटका दिया।
कपास किसान संजय वानखड़े के अनुसार, सरकार केवल MSP घोषित कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेती है, जबकि जमीनी स्तर पर पंजीकरण, स्लॉट बुकिंग और कोटा जैसी प्रक्रियाएं किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता पर भी नाराजगी जताई।