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नागपुर में MSP से दूर किसान, जटिल प्रक्रिया बनी बड़ी परेशानी

2026-03-11 16:03:23
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नागपुर के कपास किसान MSP से वंचित, खरीद प्रक्रिया बनी बड़ी बाधा


नागपुर जिले के कपास किसानों को इस सीजन में मौसम की मार और जटिल खरीद प्रक्रिया के चलते भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। खुले बाजार में कपास के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे बने हुए हैं, वहीं भारतीय कपास निगम (CCI) की कठिन पंजीकरण और खरीद प्रणाली के कारण कई किसान मजबूरी में कम कीमत पर व्यापारियों को अपनी उपज बेच रहे हैं।


इस वर्ष जिले में करीब 2.21 लाख हेक्टेयर में कपास की खेती की गई थी। मौसम की अनिश्चितता और रुक-रुक कर हुई बारिश के कारण शुरुआत में फसल की वृद्धि प्रभावित रही। हालांकि बाद में अनुकूल मौसम मिलने से फसल में सुधार हुआ, लेकिन उत्पादन समय से पहले—नवंबर अंत और दिसंबर की शुरुआत में—बाजार में आ गया।


किसान बेहतर दाम की उम्मीद में अपनी उपज रोककर बैठे थे, ताकि MSP का लाभ मिल सके। लेकिन CCI द्वारा जिलेवार कोटा तय करना और ‘कपास किसान’ ऐप पर जटिल रजिस्ट्रेशन व स्लॉट बुकिंग प्रक्रिया ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी। समय पर स्लॉट न मिलने के कारण कई किसानों को मजबूरी में कम दाम पर कपास बेचनी पड़ी।

नागपुर में CCI के आठ खरीद केंद्र शुरू किए गए हैं, लेकिन इनकी दूरी, परिवहन लागत और माल उतारने में लगने वाला समय व श्रम किसानों के लिए चुनौती बन गया। इसी वजह से इन केंद्रों पर अपेक्षित खरीद नहीं हो पाई।

वर्तमान में खुले बाजार में कपास का औसत भाव करीब 7,350 रुपये प्रति क्विंटल है, जो लंबी रेशे वाली कपास के MSP 8,110 रुपये से 350 से 1,010 रुपये तक कम है। किसानों का आरोप है कि CCI नमी के नाम पर कटौती कर वास्तविक MSP का लाभ नहीं दे रही।

हालांकि CCI ने खरीद की अंतिम तारीख 28 फरवरी से बढ़ाकर 15 मार्च कर दी, लेकिन इसका लाभ अधिकांश किसानों तक नहीं पहुंच पाया। कई किसानों ने ऊंचे दाम की उम्मीद में कपास का भंडारण किया था, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट ने उनकी उम्मीदों को भी झटका दिया।


कपास किसान संजय वानखड़े के अनुसार, सरकार केवल MSP घोषित कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेती है, जबकि जमीनी स्तर पर पंजीकरण, स्लॉट बुकिंग और कोटा जैसी प्रक्रियाएं किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता पर भी नाराजगी जताई।


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