कपड़ा उद्योग में कच्चे माल की लागत बढ़ने से चुनौतियाँ
2026-03-19 12:16:15
भारत के कपड़ा उद्योग में कच्चे माल की लागत में तेज वृद्धि से बढ़ी चुनौतियाँ
भारत का कपड़ा उद्योग इन दिनों कच्चे माल की बढ़ती लागत के गंभीर दबाव का सामना कर रहा है। उद्योग से जुड़े सूत्रों और संघों के अनुसार, आधे से अधिक निर्माताओं ने अपने इनपुट खर्चों में लगभग 20–25% की वृद्धि दर्ज की है, जिससे पहले से ही कम मार्जिन पर चल रहे उत्पादकों के लिए स्थिति और कठिन हो गई है।
इस लागत वृद्धि का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी माना जा रहा है, जो भू-राजनीतिक तनावों के बीच 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। चूंकि कपड़ा उद्योग में पेट्रोलियम-आधारित कच्चे माल का व्यापक उपयोग होता है, इसलिए तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ रहा है।
विशेष रूप से पॉलिएस्टर और नायलॉन जैसे सिंथेटिक फाइबर प्रभावित हुए हैं, जो भारत के कुल कपड़ा उत्पादन का लगभग 60% हिस्सा बनाते हैं। इसके परिणामस्वरूप पॉलिएस्टर की कीमतों में करीब 20% और नायलॉन की कीमतों में लगभग 5% की बढ़ोतरी देखी गई है। साथ ही, रंगाई और रसायनों की लागत भी लगभग 20% तक बढ़ गई है, जिससे कुल मिलाकर डाइंग प्रोसेस का खर्च करीब 30% तक बढ़ गया है।
इन सभी कारकों के संयुक्त प्रभाव से परिधान निर्माण की कुल लागत में लगभग 10–15% की वृद्धि हुई है। छोटे और मध्यम स्तर के उद्यम इस दबाव के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील साबित हो रहे हैं।
इसके अलावा, लॉजिस्टिक्स खर्चों में भी 80–90% तक की तेज वृद्धि दर्ज की गई है, जिसका कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान बताया जा रहा है। यह स्थिति खासकर निर्यात-आधारित कंपनियों के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण बन गई है।
फिलहाल कई कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ स्वयं वहन कर रही हैं ताकि उपभोक्ता मांग पर नकारात्मक असर न पड़े। हालांकि, उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो कंपनियों को मजबूरन कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं, जिससे बाजार में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।