अमेरिका में कपास की खेती में 14% की गिरावट, वैश्विक उत्पादन पर दबाव की आशंका
अमेरिका में इस वर्ष कपास की खेती में लगभग 14 प्रतिशत की गिरावट आने की संभावना जताई गई है। वहीं, अतिरिक्त लंबे रेशे वाली कपास (Extra Long Staple Cotton) की खेती में करीब 24 प्रतिशत तक की कमी देखी जा सकती है।
संयुक्त राज्य अमेरिका के कृषि विभाग (United States Department of Agriculture) के अनुसार, चीन, भारत, ऑस्ट्रेलिया और तुर्की जैसे प्रमुख उत्पादक देशों में भी उत्पादन में कमी की आशंका है, जिससे वैश्विक कपास उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है।
अमेरिका में कपास का मौसम भारत से पहले शुरू होता है, इसलिए वहां के बाजार के रुझान का सीधा असर भारत में कपास की कीमतों पर पड़ता है। वर्तमान में अमेरिका में कपास के साथ-साथ सोयाबीन, मक्का और गेहूं की बुवाई में भी तेजी देखी जा रही है।
देश के दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी क्षेत्रों में बारिश में देरी के कारण कपास की बुवाई धीमी रही। हालांकि अब स्थिति में सुधार हो रहा है और लगभग 30 प्रतिशत बुवाई पूरी हो चुकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा करीब 33 प्रतिशत था।
पिछले वर्ष किसानों को कपास और सोयाबीन के कम दाम मिले थे, जबकि मक्का से बेहतर लाभ प्राप्त हुआ था। इसी कारण इस वर्ष किसान कपास और सोयाबीन की खेती घटाकर मक्का की खेती बढ़ा रहे हैं।
अनुमान के अनुसार, इस वर्ष अमेरिका में कपास की खेती लगभग 9.7 मिलियन एकड़ भूमि में हो सकती है। वहीं वैश्विक कपास उत्पादन घटकर लगभग 1,508 मिलियन गांठ रहने का अनुमान है।
इसके अलावा, सोयाबीन की बुवाई में 4% की कमी, मक्का में 5% की वृद्धि और ज्वार तथा मूंगफली की खेती में क्रमशः 4% और 8% तक की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है।
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