फरवरी 2026 में WPI मुद्रास्फीति 2.13% पर पहुंची, कपड़ा कीमतों में बढ़ोतरी से दबाव
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, भारत की थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति फरवरी 2026 में बढ़कर 2.13% हो गई, जो जनवरी में 1.81% थी। इस वृद्धि के पीछे मुख्य कारण विनिर्मित वस्तुओं, खाद्य पदार्थों और विशेष रूप से कपड़ों की बढ़ती कीमतें रहीं।
फरवरी में कुल WPI सूचकांक 157.8 से बढ़कर 158.2 पर पहुंच गया, जबकि मासिक (MoM) आधार पर इसमें 0.25% की वृद्धि दर्ज की गई। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से विनिर्माण, बुनियादी धातुओं, गैर-खाद्य वस्तुओं, खाद्य उत्पादों और टेक्सटाइल सेक्टर में कीमतों के उछाल के कारण हुई।
विनिर्माण क्षेत्र, जिसका WPI में सबसे अधिक योगदान है, फरवरी में 0.47% बढ़कर 148.2 पर पहुंच गया। 22 औद्योगिक समूहों में से 16 में कीमतें बढ़ीं, जिनमें खाद्य उत्पाद, कपड़ा, रसायन और विद्युत उपकरण शामिल हैं।
टेक्सटाइल सेक्टर में खासा दबाव देखने को मिला। कपड़ा श्रेणी का सूचकांक 0.71% बढ़कर 141.4 हो गया, जबकि सालाना आधार पर कपड़ा मुद्रास्फीति 3.29% तक पहुंच गई, जो जनवरी में 2.48% थी। यह कपड़ा उद्योग में लागत बढ़ने का संकेत है।
पहनने वाले परिधानों (Garments) में भी हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जहां कीमतें मासिक आधार पर 0.13% और सालाना आधार पर 2.14% बढ़ीं।
इसके अलावा, प्राथमिक वस्तुओं की मुद्रास्फीति 3.27% तक पहुंच गई, जबकि ईंधन और अन्य विनिर्मित उत्पादों में उतार-चढ़ाव ने भी कुल मूल्य रुझान को प्रभावित किया।
कुल मिलाकर, फरवरी में विभिन्न कमोडिटी समूहों में उत्पादक स्तर पर कीमतों का दबाव बना रहा, जिसमें कपड़ा क्षेत्र प्रमुख रहा।