महाराष्ट्र: दौंड में बढ़ा कपास का रकबा, 2,412 एकड़ में बुवाई
महाराष्ट्र के पुणे जिले के दौंड तालुका में पारंपरिक फसलों के साथ कपास की खेती का रकबा भी बढ़ रहा है। गन्ना, प्याज, गेहूं और अनार की खेती के लिए पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र में कपास खरीफ सीजन की एक महत्वपूर्ण फसल बनती जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष दौंड तालुका में 2,412 एकड़ में कपास की बुवाई की गई है।
वर्ष 2021-22 में दौंड तालुका में केवल 255 एकड़ में कपास की खेती की गई थी। इसके बाद पिछले कुछ वर्षों में कपास के रकबे में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। किसानों के बढ़ते रुझान के साथ कृषि विभाग के मार्गदर्शन को भी इस वृद्धि का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है।
दौंड क्षेत्र में कपास की बुवाई के लिए सामान्यतः 4.5×2 फीट की दूरी रखी जाती है। इसके बाद निराई-गुड़ाई के साथ आवश्यकता के अनुसार उर्वरक और कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है। क्षेत्र में कपास की औसत उपज 18 से 20 क्विंटल प्रति एकड़ बताई गई है।
मूल जानकारी के अनुसार, अच्छी गुणवत्ता वाले कपास के लिए मौजूदा MSP ₹8,667 प्रति क्विंटल बताया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में ₹557 अधिक है। अच्छी फसल होने पर किसान पांच महीने में लगभग ₹1.50 लाख से ₹1.75 लाख प्रति एकड़ तक आय प्राप्त कर सकते हैं।
कपास की खेती के बाद गन्ना लगाने से गन्ने की उपज में औसतन 15 से 20 टन प्रति एकड़ तक बढ़ोतरी होने का दावा किया गया है। इससे खेत का बेहतर उपयोग करने और फसल चक्र को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, दौंड तालुका में कपास का रकबा बढ़ने के बावजूद अभी तक कोई अधिकृत कपास खरीद केंद्र नहीं है। किसानों की मांग है कि दौंड APMC में कपास खरीद केंद्र स्थापित किया जाए, ताकि उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए दूसरे क्षेत्रों में न जाना पड़े।
इस वर्ष कपास की फसल में खरपतवार की समस्या अधिक देखी जा रही है। ऐसे में किसानों को समय पर निराई-गुड़ाई और उचित फसल प्रबंधन पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है। क्षेत्र की उपजाऊ काली मिट्टी और उचित फसल चक्र कपास की उत्पादकता बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
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