भारत को कॉटन इम्पोर्टर नहीं, एक्सपोर्टर बनाना होगा: गडकरी जी ने टेक्नोलॉजी और क्वालिटी पर दिया जोर
ऑल इंडिया कॉटन समिट 2026 में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी जी ने देशभर से आए जिनर्स, ट्रेडर्स, मिलर्स, ब्रोकर्स और एक्सपोर्टर्स को संबोधित करते हुए कहा कि कॉटन भारतीय अर्थव्यवस्था और किसानों के लिए महत्वपूर्ण कैश क्रॉप है। उन्होंने कहा कि प्रति एकड़ उत्पादकता बढ़ाना और उत्पादन लागत कम करना कॉटन सेक्टर की प्रमुख प्राथमिकता होनी चाहिए।
गडकरी जी ने कॉटन उद्योग से जुड़े लोगों से किसानों को बेहतर बीज, आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती के लिए मार्गदर्शन देने की अपील की। उन्होंने कहा कि बेहतर सीड, आधुनिक जिनिंग-प्रेसिंग और अच्छी गुणवत्ता के उत्पादन से भारतीय कॉटन की एक्सपोर्ट क्षमता बढ़ेगी और इसका लाभ किसान, जिनर, ट्रेडर और पूरी टेक्सटाइल इंडस्ट्री को मिलेगा।
उन्होंने कहा कि भारत में कॉटन की उत्पादकता अभी भी कम है और डेंसिटी के साथ प्रति एकड़ उत्पादन बढ़ाने की जरूरत है। आने वाले समय में AI, सैटेलाइट और ड्रोन जैसी तकनीकों का उपयोग बढ़ाना होगा। उन्होंने बताया कि AI और सैटेलाइट तकनीक से मौसम, बीमारी और खाद की जरूरत जैसी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कॉटन क्षेत्रों में किसान वर्कशॉप आयोजित कर उन्हें नई तकनीकों के प्रति जागरूक करने की अपील की।
कॉटन की गुणवत्ता पर जोर देते हुए गडकरी जी ने कहा कि अलग-अलग गुणवत्ता की कपास को मिक्स करने के बजाय उसकी गुणवत्ता के अनुसार अलग-अलग बैल तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ईमानदारी, पारदर्शिता, विश्वसनीयता और गुडविल 21वीं सदी की सबसे बड़ी पूंजी हैं। अल्पकालिक लाभ के लिए गुणवत्ता से समझौता करने से भारतीय कॉटन की ब्रांड वैल्यू और एक्सपोर्ट प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने देश में करीब 290 लाख टन कॉटन उत्पादन के मुकाबले लगभग 340 लाख टन खपत और करीब 50 लाख टन के अंतर का उल्लेख किया। 2025-26 में करीब 60 लाख टन कॉटन इम्पोर्ट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को आयात घटाकर एक्सपोर्ट बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
गडकरी जी ने कृषि में ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उन्होंने नैनो यूरिया एवं नैनो उर्वरकों के ड्रोन स्प्रे का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे इनपुट का अधिक प्रभावी उपयोग संभव है। उन्होंने कृषि उपकरणों को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक और सोलर ऊर्जा की ओर ले जाने की आवश्यकता भी बताई।
उन्होंने लॉजिस्टिक लागत कम करने को एक्सपोर्ट प्रतिस्पर्धा के लिए महत्वपूर्ण बताया। विदर्भ से बांग्लादेश तक कॉटन परिवहन में नागपुर-हल्दिया और रिवर रूट के उपयोग से परिवहन समय करीब 27 दिन से घटकर 15 दिन और लागत में लगभग 10% तक कमी आने की संभावना उन्होंने बताई।
गडकरी जी ने इजराइल में प्रति एकड़ अधिक कॉटन उत्पादकता का उदाहरण देते हुए भारत में उत्पादकता बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने भारत सरकार के कॉटन मिशन, बेहतर बीज और टेक्नोलॉजी के माध्यम से किसानों की आय एवं उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र की टेक्सटाइल योजनाओं की सराहना करते हुए संबंधित इंसेंटिव समय पर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
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