हरियाणा में पिंक बॉलवर्म का शुरुआती प्रकोप, कपास किसानों को वैज्ञानिक निगरानी की सलाह
By jayesh chouhan 2026-07-23 13:10:41
हरियाणा में गुलाबी सुंडी की शुरुआती सक्रियता, कपास किसानों को वैज्ञानिक निगरानी अपनाने की सलाह
हरियाणा के कपास उत्पादक क्षेत्रों में गुलाबी सुंडी (पिंक बॉलवर्म) की शुरुआती सक्रियता के संकेत मिलने के बाद कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क रहने और वैज्ञानिक निगरानी प्रणाली अपनाने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते एकीकृत कीट प्रबंधन (आईपीएम) तकनीकों को अपनाकर कपास की फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत फरीदाबाद स्थित रीजनल इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट सेंटर (आरआईपीएमसी) और सिरसा स्थित संयुक्त निदेशक कृषि (कपास) कार्यालय की संयुक्त सर्वे टीम ने सिरसा जिले के कपास खेतों का निरीक्षण किया। इस दौरान कुछ खेतों में गुलाबी सुंडी के शुरुआती प्रकोप के संकेत मिले। टीम ने किसानों को कीट नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक उपायों और आईपीएम तकनीकों की जानकारी दी।
अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी कि वे प्रति एकड़ चार से पांच फेरोमोन ट्रैप कपास विशेष फेरोमोन ल्यूर के साथ लगाएं, ताकि गुलाबी सुंडी की गतिविधियों की लगातार निगरानी की जा सके और शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रण के उपाय किए जा सकें। इसके अलावा रस चूसक कीटों की निगरानी और नियंत्रण के लिए प्रति हेक्टेयर 20 पीले या नीले स्टिकी ट्रैप लगाने की भी सिफारिश की गई है।
कपास उत्पादक जिलों सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, हांसी, भिवानी, चरखी दादरी और जींद में फेरोमोन ट्रैप आधारित डेमो प्लॉट तैयार किए गए हैं। कृषि विभाग के अनुसार, इन तकनीकों का उपयोग करने वाले किसानों को गुलाबी सुंडी की निगरानी और प्रबंधन में बेहतर परिणाम मिले हैं।
कृषि अधिकारियों ने किसानों से केवल केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (सीआईबी एंड आरसी) द्वारा पंजीकृत एवं अनुमोदित कीटनाशकों का ही प्रयोग करने की अपील की है। साथ ही, कीटनाशकों का छिड़काव तभी करने की सलाह दी गई है, जब कीटों की संख्या आर्थिक क्षति स्तर (Economic Threshold Level) से अधिक हो जाए।
सर्वे टीम ने किसानों को नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम (एनपीएसएस) मोबाइल ऐप के बारे में भी जानकारी दी। यह ऐप कीटों और रोगों की पहचान, फसल सुरक्षा संबंधी सलाह और रियल-टाइम निगरानी में मदद करता है, जिससे समय पर उचित निर्णय लिए जा सकते हैं और अनावश्यक कीटनाशक उपयोग को रोका जा सकता है।
गौरतलब है कि वर्ष 2023, 2024 और 2025 में गुलाबी सुंडी के प्रकोप से सिरसा जिले में कपास की फसल को भारी नुकसान हुआ था। इस वर्ष किसानों के सामने गुलाबी सुंडी के साथ-साथ अत्यधिक बारिश भी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है, जिससे कई क्षेत्रों में कपास की फसल प्रभावित हुई है।