भारत का ‘सफेद सोना’ कपास: 2031 तक उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य
By jayesh chouhan 2026-07-21 13:26:56
भारत का ‘सफेद सोना’ कपास: उत्पादन और वैश्विक बाजार में पकड़ मजबूत करने पर जोर
नई दिल्ली: भारत वैश्विक कपास उद्योग में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। सोमवार को जारी सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, कपास की खेती के क्षेत्रफल के मामले में भारत दुनिया में पहले स्थान पर है, जबकि कपास के उत्पादन और खपत दोनों में दूसरे स्थान पर है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2025-26 में भारत का कपास उत्पादन 290.91 लाख गांठ रहने का अनुमान है, जबकि घरेलू खपत करीब 328 लाख गांठ रहने की उम्मीद है। भारत वैश्विक फाइबर उत्पादन में लगभग 19 प्रतिशत का योगदान देता है।
सरकार ने कहा कि कपास क्षेत्र से जुड़ी हालिया पहल उत्पादकता, गुणवत्ता, बाजार तक पहुंच और मूल्यवर्धन बढ़ाने पर केंद्रित हैं। कीमतों में गिरावट के दौरान किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के माध्यम से मूल्य समर्थन मिलता है। इसके अलावा, ‘मिशन फॉर कॉटन प्रोडक्टिविटी’ के तहत वर्ष 2031 तक कपास उत्पादन बढ़ाकर 498 लाख गांठ करने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार के अनुसार, तकनीक प्रदर्शन, डिजिटल खरीद और ट्रेसेबिलिटी जैसी पहल कपास की उत्पादकता और गुणवत्ता में सुधार कर रही हैं। इनसे वैश्विक कपास बाजार में भारतीय किसानों और उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत होने की उम्मीद है।
कपास के आर्थिक महत्व के कारण इसे भारत का ‘सफेद सोना’ कहा जाता है। यह फसल करीब 60 लाख किसानों की आजीविका का आधार है। देश में कपास की खेती लगभग 114.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में होती है। वहीं, प्रोसेसिंग, व्यापार और टेक्सटाइल वैल्यू चेन से जुड़ी गतिविधियों में करीब 4-5 करोड़ लोगों को रोजगार मिलता है।
फाइबर, धागे, कपड़े और गारमेंट्स के निर्यात के जरिए कपास विदेशी मुद्रा अर्जित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 2024-25 में भारत ने करीब 18 लाख गांठ कपास का निर्यात किया, जो वैश्विक कपास निर्यात का लगभग 3.37 प्रतिशत था। वित्त वर्ष 2024-25 में कपास निर्यात का मूल्य 11.49 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
भारतीय कॉटन टेक्सटाइल और मेड-अप उत्पादों का सबसे बड़ा बाजार अमेरिका रहा, जिसकी निर्यात में 26.35 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। इसके बाद बांग्लादेश, श्रीलंका, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त अरब अमीरात प्रमुख बाजार रहे।
भारत में कपास की खेती मुख्य रूप से नौ राज्यों में होती है। इन्हें उत्तरी, मध्य और दक्षिणी कृषि-जलवायु क्षेत्रों में बांटा गया है। इसके अलावा, ओडिशा और तमिलनाडु में भी कपास की खेती की जाती है।