तेलंगाना में सूखे से कपास की फसल पर संकट, वैकल्पिक सिंचाई से फसल बचाने में जुटे किसान
आदिलाबाद, तेलंगाना: जिले में लंबे समय से बारिश नहीं होने और बढ़ते तापमान के कारण कपास की खड़ी फसल पर संकट गहरा गया है। किसान अपनी फसल बचाने के लिए स्प्रिंकलर, ड्रिप सिंचाई, बोरवेल और नहरों के पानी का सहारा ले रहे हैं। लगातार शुष्क मौसम के कारण कपास के पौधों का विकास प्रभावित हो रहा है और उत्पादन घटने की आशंका बढ़ गई है।
जिले में तापमान लगभग 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने से खेतों में नमी की कमी हो रही है। उपलब्ध कृषि आंकड़ों के अनुसार, आदिलाबाद जिले में करीब 4.30 लाख एकड़ में कपास, 56,000 एकड़ में सोयाबीन, 42,000 एकड़ में अरहर और 21,000 एकड़ में मक्का की खेती की गई है।
तामसी मंडल के कप्परला गांव के किसान गंडराथ प्रभाकर बोरवेल से पानी लेकर स्प्रिंकलर के माध्यम से कपास की सिंचाई कर रहे हैं। उनका कहना है कि बारिश की कमी के कारण पौधों में पर्याप्त टिंडे नहीं बन पाए हैं। अनियमित बिजली आपूर्ति और लगातार बिजली कटौती से सिंचाई में परेशानी बढ़ रही है।
वहीं, कुछ किसान नहरों, स्थानीय जलधाराओं और छोटी नदियों से पानी लेकर फसल बचाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, पानी की उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
भीमपुर मंडल के निपानी गांव के किसान पंजाब रेड्डी के अनुसार, सूखे के कारण कई किसानों के लिए खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है। कपास की दूसरी और तीसरी तुड़ाई प्रभावित होने की आशंका है।
तामसी, तालामाडुगु और भीमपुर के लाल मिट्टी वाले क्षेत्रों में फसल को अधिक नुकसान होने की आशंका है, जबकि काली मिट्टी वाले इलाकों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बताई जा रही है।
गर्म और शुष्क मौसम के कारण कपास में अधिक नमी की समस्या कम हो सकती है। हालांकि, कम नमी होने से किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक भाव मिलने की गारंटी नहीं है। कपास की गुणवत्ता, बाजार मांग और उत्पादन की स्थिति भी कीमतों को प्रभावित करती है।
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