STAY UPDATED WITH COTTON UPDATES ON WHATSAPP AT AS LOW AS 6/- PER DAY

Start Your 7 Days Free Trial Today

News Details

कृषि प्रौद्योगिकी: कपास में अशुद्धियों को रोकने के लिए कच्चे कपास की गांठ (बेल) बनाने की तकनीक

2026-05-07 11:52:21
First slide


कच्ची कपास में संदूषण कम करने के लिए अभिनव कपास बेलिंग तकनीक


कपास प्रसंस्करण उद्योग में बढ़ती अशुद्धियाँ एक गंभीर चुनौती बन चुकी हैं। इन संदूषकों को हटाने के लिए महंगी मशीनरी की आवश्यकता होती है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ जाती है और किसानों की आय प्रभावित होती है। इस समस्या के समाधान के रूप में परभणी (महाराष्ट्र) के युवा नवोन्मेषक कृष्ण सोमानी ने एक अभिनव मशीन विकसित की है, जो सीधे खेत में ही कच्चे कपास की गांठें (बेल्स) बनाने में सक्षम है।


इस प्रोटोटाइप मशीन के उन्नयन और परीक्षण के लिए Central Institute for Research on Cotton Technology (नागपुर) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) किया गया है। यह संस्थान कपास प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी अनुसंधान केंद्र है।

 समस्या की पृष्ठभूमि

भारत में कपास की खेती लगभग 13 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है, जिसमें महाराष्ट्र का बड़ा योगदान है। देश में कपास की कटाई प्रायः चरणबद्ध तरीके से (3–4 बार) की जाती है। किसान अपनी पूरी उपज को एक साथ बेचने के लिए इसे महीनों तक घरों में संग्रहित रखते हैं। इस दौरान:

*कपास में धूल, कचरा और अन्य अशुद्धियाँ मिल जाती हैं
*चूहों और कीटों का प्रकोप बढ़ता है
*गुणवत्ता और वजन में कमी आती है (प्रति क्विंटल 5–6 किग्रा तक नुकसान)
*आग और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ जाते हैं

समाधान: खेत पर ही बेलिंग तकनीक

इन समस्याओं से निपटने के लिए विकसित यह मशीन कटाई के बाद तुरंत कपास की बेलिंग कर देती है। इससे:

*कपास खुला नहीं रहता, इसलिए अशुद्धियाँ कम होती हैं
*भंडारण आसान और सुरक्षित होता है
*परिवहन लागत और श्रम घटता है

विदेशों में जहां 2.5 टन की बड़ी गांठें बनाई जाती हैं, वहीं इस भारतीय तकनीक में लगभग 35 किलोग्राम की छोटी और हल्की बेल्स बनाई जाती हैं, जिन्हें हाथ से आसानी से उठाया जा सकता है।

तकनीकी विशेषताएँ

*प्रारंभ में बिजली से संचालित, अब ट्रैक्टर (PTO) आधारित यूनिट उपलब्ध
*उत्पादन क्षमता: लगभग 40 बेल प्रति घंटा
*साइलेज मशीन को संशोधित कर विकसित (कुल लागत ~₹9–10 लाख)
*वर्तमान मशीन कीमत: ₹7–7.5 लाख
*प्रति क्विंटल बेलिंग लागत: ₹100–₹150

भंडारण और आर्थिक लाभ

बेल्स के समान आकार के कारण भंडारण अधिक व्यवस्थित हो जाता है—10×10 फुट के कमरे में 35–40 क्विंटल कपास रखा जा सकता है।
एक किसान के उदाहरण में, बेलिंग और गोदाम भंडारण के माध्यम से बेहतर कीमत मिलने पर 110 क्विंटल उत्पादन पर ₹1.1 लाख अतिरिक्त लाभ हुआ।

संस्थागत सहयोग और भविष्य

इस तकनीक के विकास और प्रसार के लिए Central Institute for Research on Cotton Technology तथा Bajaj Industries के साथ साझेदारी की गई है। साथ ही, ‘RAFTAAR’ योजना के तहत ₹20 लाख की वित्तीय सहायता भी प्रदान की गई है।

संस्थान के निदेशक Dr. S. K. Shukla के अनुसार, इस मशीन को सरकारी सब्सिडी योजनाओं में शामिल करने के प्रयास जारी हैं, जिससे यह तकनीक अधिक किसानों तक पहुँच सके।

 निष्कर्ष

कच्चे कपास की खेत-स्तरीय बेलिंग तकनीक न केवल अशुद्धियों को कम करती है, बल्कि भंडारण, परिवहन और विपणन को भी अधिक कुशल बनाती है। हालांकि अभी इसकी जागरूकता सीमित है, लेकिन भविष्य में यह तकनीक कपास उद्योग में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।


और पढ़ें :- रुपया 14 पैसे की गिरावट के साथ 94.75 पर खुला.








Regards
Team Sis
Any query plz call 9111677775

https://wa.me/919111677775

Videos