महाराष्ट्र: अहिल्यानगर में कपास का रकबा 1.33 लाख हेक्टेयर के पार
अहिल्यानगर, महाराष्ट्र: महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले में इस साल मानसून की देरी और कई क्षेत्रों में कम बारिश के बावजूद किसानों ने कपास की खेती को प्राथमिकता दी है। जिले में अब तक 1,33,010 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हो चुकी है। तालुका-वार आंकड़ों के अनुसार, शेवगांव में कपास का सबसे अधिक रकबा दर्ज किया गया है, जबकि इसके बाद नेवासा और पाथर्डी का स्थान है।
जिले में खरीफ फसलों का औसत क्षेत्रफल 5,79,768 हेक्टेयर है। इस वर्ष मानसून करीब एक महीने की देरी से पहुंचा, जिसका सीधा असर खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ा। बारिश देर से होने के कारण कपास की बुवाई भी निर्धारित समय के मुकाबले पीछे रही। इसके बावजूद किसानों ने कपास को प्रमुख फसलों में शामिल रखा है।
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, कपास की बुवाई का समय लगभग समाप्त हो चुका है। ऐसे में इस वर्ष जिले में कपास का कुल रकबा पिछले वर्ष की तुलना में कम रहने की संभावना जताई जा रही है। अकोले तालुका में अब तक कपास की बुवाई नहीं हुई है। वहीं, अहिल्यानगर, जामखेड़, कोपरगांव, पारनेर और राहाता तालुकाओं में कपास का रकबा अपेक्षाकृत कम है।
शेवगांव तालुका 42,037 हेक्टेयर कपास क्षेत्र के साथ जिले में सबसे आगे है। इसके बाद नेवासा में 29,383 हेक्टेयर और पाथर्डी में 26,382 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई है। राहुरी में भी 18,623 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती दर्ज की गई है।
जिले के कई हिस्सों में अभी भी पर्याप्त बारिश का इंतजार है। अकोले तालुका के पश्चिमी हिस्से को छोड़कर कई क्षेत्रों में बारिश की कमी बनी हुई है। कम बारिश की स्थिति में कपास की फसल प्रभावित होने की आशंका है। किसानों को अब आगे होने वाली बारिश से फसल की स्थिति में सुधार की उम्मीद है।
देर से हुई बारिश के बावजूद कपास किसानों की प्रमुख पसंद बना हुआ है। हालांकि, अंतिम बुवाई आंकड़े जारी होने के बाद ही पिछले वर्ष की तुलना में कपास के रकबे में वास्तविक कमी या बढ़ोतरी की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।
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