महाराष्ट्र: अच्छी बारिश से खरीफ बुवाई ने पकड़ी रफ्तार, 1.20 लाख हेक्टेयर में बुवाई पूरी; कपास के रकबे में बढ़ोतरी के आसार
महाराष्ट्र के अकोला जिले में जुलाई की शुरुआत में हुई अच्छी बारिश से खरीफ सीजन की बुवाई ने रफ्तार पकड़ ली है। कृषि विभाग के अनुसार, जिले के कुल 4,32,010 हेक्टेयर खेती योग्य क्षेत्र में से अब तक करीब 1,20,000 हेक्टेयर में बुवाई पूरी हो चुकी है। पिछले वर्ष जिले में कुल 4,31,884 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई थी।
इस वर्ष किसानों का रुझान कपास की खेती की ओर तेजी से बढ़ा है। कृषि अधिकारियों के मुताबिक, मूंग और उड़द की बुवाई का उपयुक्त समय समाप्त हो चुका है। ऐसे में अब इन फसलों की बुवाई करने पर उत्पादन प्रभावित होने और फसल खराब होने की आशंका है। इसी कारण अधिकांश किसानों ने कपास की खेती को प्राथमिकता दी है। अब तक जिले में कपास की लगभग 30 प्रतिशत बुवाई पूरी हो चुकी है और इस वर्ष इसके कुल रकबे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
जिले में अब तक हुई वर्षा के आंकड़ों के अनुसार, तेलहारा तालुका में सबसे अधिक 191.7 मिमी बारिश दर्ज की गई है। इसके बाद अकोट में 161.3 मिमी, पातुर में 141.9 मिमी, मूर्तिजापुर में 132.9 मिमी, बरशीटाकली में 124.9 मिमी, बालापुर में 111.9 मिमी तथा अकोला तालुका में 95 मिमी वर्षा हुई है। जिले का औसत वर्षापात 132.2 मिमी दर्ज किया गया है।
कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि अब मूंग और उड़द की बुवाई से बचें, क्योंकि इन फसलों का अनुकूल समय निकल चुका है। विभाग का कहना है कि इस समय बुवाई करने पर अपेक्षित उत्पादन मिलने की संभावना काफी कम रहती है। विशेष रूप से तेलहारा और पातुर क्षेत्र में शुरुआती बारिश और बुवाई में हुई देरी के कारण कई किसानों को अपनी मूल फसल योजना बदलकर कपास की खेती अपनानी पड़ रही है।
हालांकि जिले में कुल मिलाकर बुवाई का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन अकोट, तेलहारा और पातुर तालुका के कुछ हिस्सों में लगातार हो रही भारी बारिश से बुवाई प्रभावित हुई है। पातुर के निचले इलाकों में जलभराव और मिट्टी में अत्यधिक नमी के कारण कई स्थानों पर बुवाई का कार्य फिलहाल रुका हुआ है।