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कपास की खेती बढ़ाना चुनौती, 15 अप्रैल से बुवाई

2026-04-14 12:02:04
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सोनीपत में कपास का रकबा बढ़ाना चुनौती, 15 अप्रैल से शुरू होगी बिजाई


सोनीपत में लगातार घटते कपास के रकबे को बढ़ाना इस बार कृषि विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। पिछले वर्ष जिले में केवल 1200 एकड़ में ही कपास की खेती की गई थी, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम है। ऐसे में विभाग ने किसानों को जागरूक करने के लिए विशेष टीमें गठित की हैं, जो गांव-गांव जाकर कपास की खेती के फायदे और रोग प्रबंधन की जानकारी देंगी।


कृषि विभाग के अनुसार खरीफ सीजन में कपास की बिजाई का उपयुक्त समय 15 अप्रैल से 15 मई तक है। हाल ही में हुई हल्की बारिश और बूंदाबांदी से खेतों में पर्याप्त नमी बनी हुई है, जिससे शुरुआती सिंचाई की जरूरत कम पड़ेगी और बिजाई के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हैं।


विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे बीज उपचार (seed treatment) के बाद ही बिजाई करें, ताकि फसल को शुरुआती बीमारियों और कीटों से बचाया जा सके।


आंकड़ों पर नजर डालें तो कपास का रकबा लगातार घट रहा है—2022 में 5400 एकड़, 2023 में 4500 एकड़, 2024 में 2700 एकड़ और पिछले वर्ष घटकर केवल 1200 एकड़ रह गया। इस गिरावट के पीछे कई कारण हैं, जिनमें गुलाबी सुंडी का प्रकोप, फसल के समय बारिश, मजदूरों पर निर्भरता और बाजार में कम दाम शामिल हैं।


किसान अब धान की खेती को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे कपास का रकबा और सिमटता जा रहा है।

उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. संदीप वर्मा के अनुसार, विभाग ने कपास का रकबा बढ़ाने के लिए विशेष रणनीति तैयार की है। साथ ही, इस बार मौसम भी कपास की बिजाई के लिए अनुकूल माना जा रहा है, जिससे बेहतर उत्पादन की उम्मीद की जा रही है।

और पढ़ें:- MSP से कम दाम पर कपास बेचने पर मिलेगा मुआवजा


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