भारत, जो दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, हाल के महीनों में मौसम संबंधी चुनौतियों से जूझ रहा है, जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ है। हालांकि, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) नीति के चलते सरकार को बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ सकता है। इससे कपास की सरकारी खरीद बढ़ेगी, लेकिन सीमित भंडारण क्षमता के कारण बाद में इसे कम कीमत पर बाजार में लाना पड़ सकता है।
पाकिस्तान में उत्पादन घटकर 5.7 मिलियन गांठ रहने का अनुमान है, जबकि कीमतों में हल्की बढ़त देखी गई है। देश को खराब बीज गुणवत्ता, बाढ़ और अत्यधिक गर्मी जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं, ब्राजील 2025 के लिए एक अहम कारक बन सकता है। वहां अनुकूल जलवायु के कारण दो फसलें लेने की क्षमता है और पिछले साल रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज किया गया था।
कुल मिलाकर, शुरुआती संकेत बताते हैं कि 2025 में वैश्विक कपास बाजार अपेक्षाकृत स्थिर रह सकता है, जो विश्व अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
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