कॉटन में तेजी पर लगेगा ब्रेक? अतुल गणात्रा ने बताया आगे का बाजार रुख
हाल ही में CNBC Awaaz के इंटरव्यू में श्री अतुल गणात्रा जी (सीएमडी, राधा लक्ष्मी ग्रुप) ने कॉटन मार्केट की संभावित दिशा पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि करीब 10 दिन पहले ICE Cotton Futures 80–81 सेंट पर था, जो अब बढ़कर 84–85 सेंट हो गया है। इसी दौरान भारतीय कॉटन मार्केट भी ₹65,000 से बढ़कर करीब ₹68,000 प्रति कैंडी हो गया।
मौजूदा भाव पर दक्षिण भारत की स्पिनिंग मिलों के लिए मिल डिलीवरी के बाद कॉटन की लागत करीब ₹71,000 प्रति कैंडी बैठती है। इस लागत पर 30s काउंट यार्न की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट लगभग ₹310–320 प्रति किलोग्राम आती है, जबकि गुजरात की मिलें समान यार्न करीब ₹295 प्रति किलोग्राम में बेच रही हैं। ऐसे में ऊंचे भाव पर कॉटन खरीदने वाली मिलों को ₹15–20 प्रति किलो तक का नुकसान हो सकता है।
इसी वजह से कॉटन में जारी तेजी पर अब विराम लगने की संभावना बन रही है। साथ ही, इस वर्ष स्पिनिंग मिलों के पास कॉटन का स्टॉक रिकॉर्ड स्तर पर है और करीब 150 दिनों की इन्वेंट्री उपलब्ध है। मौजूदा ऊंचे भाव पर मिलों की नई खरीदारी भी सीमित रहने की संभावना है।
31 जुलाई तक मिलों के पास करीब 85 लाख बेल्स का स्टॉक बताया गया है। इसके अलावा CCI के पास 25–26 लाख और ट्रेडर्स के पास लगभग 25 लाख बेल्स हैं। करीब 10 लाख बेल्स के इम्पोर्ट की संभावना भी है। पुराने और नए कपास की आवक को देखते हुए सीजन के अंत में स्टॉक पर्याप्त रहने की उम्मीद है।
अंततः भारतीय कॉटन बाजार की दिशा मुख्य रूप से ICE Cotton Futures पर निर्भर करेगी और घरेलू बाजार ICE Cotton की चाल को फॉलो कर सकता है।
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