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वैश्विक तेज़ी के चलते कपास की कीमतें ₹60,000 प्रति कैंडी के पार

2026-04-11 12:29:07
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कपास की कीमतें ₹60,000/कैंडी के पार, वैश्विक तेज़ी का असर


घरेलू बाज़ार में कपास की कीमतें और मज़बूत हुई हैं; इस सीज़न में पहली बार कीमतें ₹60,000 प्रति कैंडी (356 किलोग्राम) के निशान को पार कर गई हैं। इसकी मुख्य वजह वैश्विक बाज़ार से मिले मज़बूत संकेत और लगातार बनी मांग है।


घरेलू कीमतें इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज (ICE) पर वैश्विक वायदा कीमतों (futures) पर बारीकी से नज़र रख रही हैं। शुक्रवार को ICE पर जुलाई के सौदे 73 सेंट प्रति पाउंड से ऊपर पहुंच गए — जो जून 2024 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।


घरेलू मोर्चे पर, कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (CCI) ने शुक्रवार को अपनी बेंचमार्क कीमतों में ₹300 प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की। पिछले दो हफ़्तों में कीमतों में लगभग ₹1,400 प्रति कैंडी की बढ़ोतरी हुई है, और पिछले कुछ महीनों में यह बढ़ोतरी लगभग ₹4,500 तक पहुंच गई है।


वैश्विक आपूर्ति-मांग का परिदृश्य

संयुक्त राज्य अमेरिका के कृषि विभाग (USDA) के अनुसार, वैश्विक कपास उत्पादन में लगभग 900,000 गांठों (bales) की बढ़ोतरी का अनुमान है, जिससे कुल उत्पादन 121.9 मिलियन गांठों तक पहुंच जाएगा। इस बढ़ोतरी में चीन, भारत और पाकिस्तान में बढ़े हुए उत्पादन का योगदान है, जो अर्जेंटीना में आई गिरावट की भरपाई कर रहा है।

वैश्विक खपत में भी लगभग 600,000 गांठों की बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे कुल खपत 119.1 मिलियन गांठों तक पहुंच जाएगी। इसमें चीन और भारत से मिली मज़बूत मांग की भूमिका अहम है, जो बांग्लादेश और वियतनाम में कमज़ोर मांग की भरपाई कर रही है। 

कीमतें MSP से ऊपर, लेकिन मांग मिली-जुली

कई घरेलू बाज़ारों में कपास की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से ऊपर चल रही हैं। रायचूर में शुक्रवार को कच्ची कपास (कपास) की कीमतें ₹9,000 प्रति क्विंटल तक पहुंच गईं।

हालांकि, उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि जहां एक ओर कपास की कीमतें मज़बूत बनी हुई हैं, वहीं दूसरी ओर सूत (yarn) की मांग को ऊंचे स्तरों पर कुछ रुकावटों का सामना करना पड़ रहा है।

बाज़ार के सूत्रों के अनुसार, मिलें नकद बाज़ार (cash market) में नई खरीदारी करने को लेकर सतर्कता बरत रही हैं। उनकी खरीदारी मुख्य रूप से उन व्यापारियों तक ही सीमित है, जो भुगतान के लिए लंबी अवधि (extended payment terms) की सुविधा दे रहे हैं। बेहतर फ़सल की उम्मीदें भी मिलों को आक्रामक खरीदारी करने से रोक रही हैं।

निर्यात की मांग से सूत की कीमतों में तेज़ी

कपास की कीमतों में आई तेज़ी का असर सूत के बाज़ारों में भी देखने को मिल रहा है। हाल के हफ़्तों में 30 CCH (कॉम्ब्ड होज़री) सूत की कीमतों में ₹55–60 प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है। इसकी कीमतें लगभग ₹235 प्रति किलोग्राम से बढ़कर लगभग ₹295 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं। इस बढ़ोतरी में चीनी खरीदारों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों से मिली मांग का अहम योगदान है। आवक अपडेट

व्यापार के अनुमानों के अनुसार, मार्च के अंत तक कपास की कुल आवक लगभग 294 लाख गांठें (प्रत्येक 170 किलोग्राम) रही है। इसमें महाराष्ट्र 95.25 लाख गांठों के साथ सबसे आगे है, जिसके बाद गुजरात 59 लाख गांठों के साथ दूसरे स्थान पर है। तेलंगाना में 46.80 लाख गांठों की आवक दर्ज की गई है, जबकि कर्नाटक में यह आंकड़ा लगभग 25 लाख गांठों का है।

कुल मिलाकर, जहाँ एक ओर वैश्विक संकेतों के कारण कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, वहीं दूसरी ओर मिलों की सतर्क मांग और बेहतर फसल उत्पादन की उम्मीदों के चलते घरेलू बाज़ार में आगे कुछ स्थिरता देखने को मिल सकती है।

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