आयात शुल्क में छूट 31 दिसंबर तक बढ़ने से कपास की कीमतों में ₹1,000 की गिरावट
छत्रपति संभाजीनगर में सूखे से उत्पादन घटकर 4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर; किसानों को ₹113 करोड़ तक के नुकसान का अनुमान
छत्रपति संभाजीनगर, महाराष्ट्र। छत्रपति संभाजीनगर जिले में कपास की कीमतों में ₹1,000 प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई है। नई कपास की आवक शुरू होने पर बाजार में भाव ₹9,500 प्रति क्विंटल थे, जो अब घटकर ₹8,500 प्रति क्विंटल रह गए हैं। केंद्र सरकार द्वारा कपास पर 11% आयात शुल्क की छूट 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ाए जाने से घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
छत्रपति संभाजीनगर जिला कपास उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र है। इस वर्ष सूखे और प्रतिकूल मौसम के कारण कपास की पैदावार एवं गुणवत्ता दोनों प्रभावित हुई हैं। जिले में लगभग 2.82 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती होती है। खराब मौसम के चलते औसत उत्पादन घटकर करीब 4 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रहने का अनुमान है।
व्यापारियों और जिनिंग उद्योग के अनुसार, जिले में लगभग 11.30 लाख क्विंटल कच्ची कपास बाजार में आने की संभावना है। कीमतों में ₹500 प्रति क्विंटल की गिरावट से किसानों के कुल बिक्री मूल्य में करीब ₹56.50 करोड़ की कमी हो सकती है। वहीं, ₹1,000 प्रति क्विंटल की गिरावट से यह नुकसान बढ़कर लगभग ₹113 करोड़ तक पहुंच सकता है।
कच्ची कपास से 33% लिंट प्राप्त होने की दर के आधार पर जिले में करीब 74,500 गांठें तैयार होने का अनुमान है। जिनिंग उद्योग की गणना के अनुसार, प्रति गांठ ₹1,000 की कीमत घटने से लिंट के कुल बिक्री मूल्य में लगभग ₹7.45 करोड़ की कमी आ सकती है।
जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी दीपक गवली ने कहा कि कपास उत्पादकों को बेहतर मूल्य दिलाने के लिए निर्यात को बढ़ावा देना और आवश्यक शुल्क संबंधी रियायतों पर विचार करना जरूरी है।
वैजापुर स्थित भाग्योदय जिनिंग इंडस्ट्री के अध्यक्ष शांतिलाल पहाड़े ने कहा कि आयात शुल्क में छूट बढ़ने से कपास की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। इस वर्ष उत्पादन और गुणवत्ता में गिरावट से जिनिंग उद्योग पहले ही आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। सस्ती आयातित कपास की उपलब्धता बढ़ने से घरेलू लिंट की मांग भी प्रभावित हो सकती है।
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