कपास खरीद नीति में बदलाव: MSP खरीद की जगह ‘भावांतर योजना’ लागू करने की तैयारी
कॉटन मार्केट से जुड़ी बड़ी नीति अपडेट सामने आई है। कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) अब न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सीधे कपास खरीदने के बजाय ‘भावांतर योजना’ लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। इस नई व्यवस्था का पायलट प्रोजेक्ट 2026-27 सीज़न में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में शुरू किया जाएगा। उद्योग जगत ने इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए इसे पूरे देश में लागू करने की मांग की है।
अब तक सरकार कीमतों में गिरावट के दौरान CCI के जरिए MSP पर कपास खरीदकर किसानों को सुरक्षा देती थी। हालांकि, पिछले दो सीज़न में CCI पर भारी दबाव रहा और उसे 100 लाख गांठ से अधिक कपास खरीदनी पड़ी। इसके बावजूद सभी किसानों को MSP का लाभ नहीं मिल सका।
इसी चुनौती को देखते हुए दिसंबर 2024 में नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में बैठक हुई, जिसमें यह विचार किया गया कि किसानों तक बेहतर लाभ कैसे पहुंचाया जाए। इस बैठक में ‘भावांतर योजना’ को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
क्या है भावांतर योजना?
इस योजना के तहत किसान अपनी कपास खुले बाजार में बेचेंगे। यदि बाजार भाव MSP से कम रहता है, तो दोनों कीमतों के बीच का अंतर सीधे किसान के खाते में DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से जमा किया जाएगा।
उदाहरण के लिए, यदि MSP ₹8,110 प्रति क्विंटल है और किसान को बाजार में ₹7,000 मिलते हैं, तो ₹1,110 का अंतर सरकार सीधे उसके खाते में ट्रांसफर करेगी।
कैसे होगा भुगतान?
यह योजना केंद्र सरकार के PM-AASHA कार्यक्रम के तहत लागू की जाएगी। पंजीकृत किसान अपनी सुविधा के अनुसार मंडियों में कपास बेच सकेंगे और मूल्य अंतर की राशि सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी।
क्या हैं चिंताएं?
विशेषज्ञों का मानना है कि योजना कागज पर प्रभावी दिखती है, लेकिन इसके सफल क्रियान्वयन पर बहुत कुछ निर्भर करेगा।
केवल भावांतर पर निर्भर रहने के बजाय MSP खरीद का विकल्प भी जारी रहना चाहिए।
योजना में समय सीमा (time limit) लागू करने से बाजार में हेरफेर की संभावना बढ़ सकती है।
उद्योग और किसानों के लिए फायदे
किसानों को अपनी जरूरत के अनुसार कभी भी बेचने की आज़ादी मिलेगी
कीमत गिरने पर भी उन्हें MSP का लाभ मिल जाएगा
उद्योगों को बाजार भाव पर कपास उपलब्ध होगी
इससे कपास, यार्न और टेक्सटाइल निर्यात वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकता है
कुल मिलाकर, ‘भावांतर योजना’ कपास बाजार में एक बड़ा बदलाव ला सकती है, लेकिन इसकी सफलता इसके पारदर्शी और प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी।
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