कपास की खेती पर ₹14,000 से ₹27,000 तक सहायता, जानें कौन उठा सकता है योजना का लाभ
2026-07-13 12:10:47
कपास की खेती के लिए ₹14,000 से ₹27,000 तक की सहायता, जानिए कौन उठा सकता है योजना का लाभ
देश में कपास का उत्पादन बढ़ाने, आयात पर निर्भरता कम करने और किसानों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से भारत सरकार ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक "मिशन फॉर कॉटन प्रोडक्टिविटी (कपास क्रांति मिशन)" शुरू किया है। इस मिशन के तहत आधुनिक खेती की तकनीकों को बढ़ावा देकर कपास की उत्पादकता में सुधार लाने का लक्ष्य रखा गया है। इसी क्रम में गुजरात सरकार ने राज्य में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ₹134.80 करोड़ के बजट को मंजूरी दी है।
गुजरात देश के प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में शामिल है। राज्य सरकार ने इस योजना के तहत कपास की खेती वाले 21 जिलों में 1 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को कवर करने का लक्ष्य तय किया है। कच्छ जिले में पिछले वर्ष 77,760 हेक्टेयर में कपास की बुवाई हुई थी, जबकि इस वर्ष बारिश के कारण अब तक केवल 48 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में ही बुवाई हो सकी है।
योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को i-Khedut पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन करने वाले किसान का पंजीकृत होना और सरकार द्वारा अनुमोदित या प्रमाणित Bt कपास के बीज का उपयोग करना अनिवार्य है।
सरकार दो आधुनिक खेती तकनीकों को अपनाने वाले किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। इंटीग्रेटेड क्रॉप मैनेजमेंट (ICM) के तहत 90×60 सेंटीमीटर की दूरी पर बुवाई करने वाले किसानों को प्रति खाते ₹14,000 तक की इनपुट सहायता मिलेगी। वहीं क्लोज़ स्पेसिंग टेक्नोलॉजी (CST) के तहत 90×30 सेंटीमीटर की दूरी पर बुवाई करने पर प्रति खाते ₹27,000 तक की सहायता दी जाएगी। दोनों ही मामलों में सहायता की अधिकतम सीमा 2 हेक्टेयर तक निर्धारित की गई है।
इस योजना के लिए आवेदन 10 जुलाई 2026 से शुरू हो चुके हैं और 24 जुलाई 2026 तक किए जा सकते हैं। योजना का लाभ केवल गुजरात के कच्छ, राजकोट, जामनगर, छोटा उदेपुर, गिर सोमनाथ, अमरेली, सुरेंद्रनगर, भावनगर, बोटाद, भरूच, अहमदाबाद, वडोदरा, साबरकांठा, नर्मदा, मेहसाणा, बनासकांठा, अरावली, गांधीनगर, मोरबी, जूनागढ़ और पाटन जिलों के किसानों को मिलेगा।
आवेदन के लिए आधार कार्ड, 7/12 और 8-A भूमि रिकॉर्ड, बैंक पासबुक या रद्द चेक की प्रति तथा आधार से लिंक सक्रिय मोबाइल नंबर आवश्यक हैं। सरकार का उद्देश्य इस योजना के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना, उत्पादन बढ़ाना और कपास की खेती को अधिक लाभकारी बनाना है।